Sri Durga Ashtottara Shatanamavali 2 – श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनामावली २ (दुर्गा कल्प)

॥ श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली २ ॥
ओं दुर्गायै नमः ।
ओं शिवायै नमः ।
ओं महालक्ष्म्यै नमः ।
ओं महागौर्यै नमः ।
ओं चण्डिकायै नमः ।
ओं सर्वज्ञायै नमः ।
ओं सर्वलोकेश्यै नमः ।
ओं सर्वकर्मफलप्रदायै नमः ।
ओं सर्वतीर्थमय्यै नमः । ९
ओं पुण्यायै नमः ।
ओं देवयोनये नमः ।
ओं अयोनिजायै नमः ।
ओं भूमिजायै नमः ।
ओं निर्गुणायै नमः ।
ओं आधारशक्त्यै नमः ।
ओं अनीश्वर्यै नमः ।
ओं निर्गुणायै नमः ।
ओं निरहङ्कारायै नमः । १८
ओं सर्वगर्वविमर्दिन्यै नमः ।
ओं सर्वलोकप्रियायै नमः ।
ओं वाण्यै नमः ।
ओं सर्वविद्याधिदेवतायै नमः ।
ओं पार्वत्यै नमः ।
ओं देवमात्रे नमः ।
ओं वनीशायै नमः ।
ओं विन्ध्यवासिन्यै नमः ।
ओं तेजोवत्यै नमः । २७
ओं महामात्रे नमः ।
ओं कोटिसूर्यसमप्रभायै नमः ।
ओं देवतायै नमः ।
ओं वह्निरूपायै नमः ।
ओं सदौजसे नमः ।
ओं वर्णरूपिण्यै नमः ।
ओं गुणाश्रयायै नमः ।
ओं गुणमय्यै नमः ।
ओं गुणत्रयविवर्जितायै नमः । ३६
ओं कर्मज्ञानप्रदायै नमः ।
ओं कान्तायै नमः ।
ओं सर्वसंहारकारिण्यै नमः ।
ओं धर्मज्ञानायै नमः ।
ओं धर्मनिष्ठायै नमः ।
ओं सर्वकर्मविवर्जितायै नमः ।
ओं कामाक्ष्यै नमः ।
ओं कामसंहर्त्र्यै नमः ।
ओं कामक्रोधविवर्जितायै नमः । ४५
ओं शाङ्कर्यै नमः ।
ओं शाम्भव्यै नमः ।
ओं शान्तायै नमः ।
ओं चन्द्रसूर्याग्निलोचनायै नमः ।
ओं सुजयायै नमः ।
ओं जयभूमिष्ठायै नमः ।
ओं जाह्नव्यै नमः ।
ओं जनपूजितायै नमः ।
ओं शास्त्रायै नमः । ५४
ओं शास्त्रमयायै नमः ।
ओं नित्यायै नमः ।
ओं शुभायै नमः ।
ओं चन्द्रार्धमस्तकायै नमः ।
ओं भारत्यै नमः ।
ओं भ्रामर्यै नमः ।
ओं कल्पायै नमः ।
ओं कराल्यै नमः ।
ओं कृष्णपिङ्गलायै नमः । ६३
ओं ब्राह्म्यै नमः ।
ओं नारायण्यै नमः ।
ओं रौद्र्यै नमः ।
ओं चन्द्रामृतपरिश्रुतायै नमः ।
ओं ज्येष्ठायै नमः ।
ओं इन्दिरायै नमः ।
ओं महामायायै नमः ।
ओं जगत्सृष्ट्यादिकारिण्यै नमः ।
ओं ब्रह्माण्डकोटिसंस्थानायै नमः । ७२
ओं कामिन्यै नमः ।
ओं कमलालयायै नमः ।
ओं कात्यायन्यै नमः ।
ओं कलातीतायै नमः ।
ओं कालसंहारकारिण्यै नमः ।
ओं योगनिष्ठायै नमः ।
ओं योगिगम्यायै नमः ।
ओं योगिध्येयायै नमः ।
ओं तपस्विन्यै नमः । ८१
ओं ज्ञानरूपायै नमः ।
ओं निराकारायै नमः ।
ओं भक्ताभीष्टफलप्रदायै नमः ।
ओं भूतात्मिकायै नमः ।
ओं भूतमात्रे नमः ।
ओं भूतेशायै नमः ।
ओं भूतधारिण्यै नमः ।
ओं स्वधानारीमध्यगतायै नमः ।
ओं षडाधारादिवर्तिन्यै नमः । ९०
ओं मोहदायै नमः ।
ओं अंशुभवायै नमः ।
ओं शुभ्रायै नमः ।
ओं सूक्ष्मायै नमः ।
ओं मात्रायै नमः ।
ओं निरालसायै नमः ।
ओं निम्नगायै नमः ।
ओं नीलसङ्काशायै नमः ।
ओं नित्यानन्दायै नमः । ९९
ओं हरायै नमः ।
ओं परायै नमः ।
ओं सर्वज्ञानप्रदायै नमः ।
ओं अनन्तायै नमः ।
ओं सत्यायै नमः ।
ओं दुर्लभरूपिण्यै नमः ।
ओं सरस्वत्यै नमः ।
ओं सर्वगतायै नमः ।
ओं सर्वाभीष्टप्रदायिन्यै नमः । १०८
॥ इति श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनामावली २ सम्पूर्णम् ॥
संलिखित ग्रंथ व स्तोत्र
नामावली २ का वैशिष्ट्य (Uniqueness of Namavali 2)
श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली (Set 2) भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है क्योंकि यह सीधे 'दुर्गा' नाम से शुरू होती है। यह नामावली देवी की सर्वव्यापकता (Omnipresence) और उनके तात्विक स्वरूप पर अधिक जोर देती है।
इसमें देवी को 'आधारशक्ति' (वह शक्ति जिस पर ब्रह्मांड टिका है) और 'मूलप्रकृति' कहा गया है। यह नामावली केवल स्तुति नहीं, बल्कि एक 'दार्शनिक चिंतन' (Philosophical Contemplation) भी है, जहाँ साधक देवी को निर्गुण और सगुण दोनों रूपों में देखता है।
नवरात्रि के दौरान या किसी विशेष अनुष्ठान में, जब 108 कमल या गुलाब के फूलों से अर्चन किया जाता है, तो इस नामावली का प्रभाव तत्काल अनुभव होता है।
गूढ़ नामों का अर्थ (Meaning of Esoteric Names)
- ॐ सर्वगर्वविमर्दिन्यै नमः: जो सभी प्रकार के अहंकार (Pride/Ego) को कुचल देती हैं। महिषासुर का वध भी वास्तव में अहंकार का ही वध था।
- ॐ कोटिसूर्यसमप्रभायै नमः: जिनकी कांति (चमक) करोड़ों सूर्यों के समान है। यह उनके तेजपुंज स्वरूप को दर्शाता है।
- ॐ कामाक्ष्यै नमः: 'कामाक्षी' का अर्थ है - जिनकी आँखों में ही प्रेम और कामना पूर्ण करने की शक्ति है। कांचीपुरम में देवी इसी रूप में पूजी जाती हैं।
- ॐ षडाधारादिवर्तिन्यै नमः: जो हमारे शरीर के छः चक्रों (मूलाधार से आज्ञा चक्र तक) में स्थित हैं। यह कुण्डलिनी योग का संकेत है।
- ॐ अयोनिजायै नमः: जिसका जन्म किसी माता के गर्भ से नहीं हुआ। देवी तेजपुंज से प्रकट हुई थीं, इसलिए वे स्वयंभू हैं।
पाठ और अर्चन के लाभ (Benefits)
1. ग्रहों की शांति
विशेष रूप से राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए इस नामावली का पाठ अचूक माना गया है।
2. विद्या और बुद्धि
'ॐ सर्वविद्याधिदेवतायै नमः' - यह नाम विद्यार्थियों और ज्ञान पिपासुओं के लिए वरदान है। यह बुद्धि को तीक्ष्ण और स्मृति (Memory) को प्रबल करता है।
3. भय और शत्रुओं का नाश
'ॐ चण्डिकायै नमः' और 'ॐ रौद्र्यै नमः' नामों से अर्चना करने पर बड़े से बड़ा शत्रु भी शांत हो जाता है और अज्ञात भय समाप्त होता है।
4. मोक्ष प्राप्ति
'ॐ नित्यानन्दायै नमः' और 'ॐ अनन्तायै नमः' - ये नाम साधक को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर शाश्वत आनंद (Eternal Bliss) की ओर ले जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. नामावली 1 और नामावली 2 में क्या अंतर है?
नामावली 1 (विश्वसार तंत्र) 'सती/साध्वी' नामों से शुरू होती है। नामावली 2 'दुर्गा/शिवा' नामों से शुरू होती है। दोनों ही प्रामाणिक हैं, लेकिन नामावली 2 का प्रयोग 'दुर्गम' संकटों के लिए अधिक किया जाता है।
2. 'ॐ दुर्गायै नमः' का क्या अर्थ है?
'दुर्गा' शब्द 'दुर्ग' (Fort) या 'दुर्गम' (Difficult) से बना है। इसका अर्थ है - वह देवी जो जीवन के कठिनाइयों से पार लगाती हैं और भक्तों की रक्षा किले की तरह करती हैं।
3. क्या महालक्ष्मी और दुर्गा एक ही हैं?
हाँ, इस नामावली में 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' (नाम 3) आता है, जो स्पष्ट करता है कि दुर्गा और लक्ष्मी तत्वतः एक ही शक्ति के अलग-अलग रूप हैं।
4. 'निर्गुणायै नमः' का क्या भाव है?
देवी सत्व, रज और तम - तीनों गुणों से परे हैं। वे निराकार ब्रह्म हैं, इसलिए उन्हें 'निर्गुणा' कहा गया है।
5. इस नामावली का पाठ कब करना चाहिए?
मंगलवार, शुक्रवार और अष्टमी तिथि को। राहू-केतु की शांति के लिए भी इस नामावली से अर्चना की जाती है।
6. 'महिषासुरमर्दिनी' नाम इसमें क्यों नहीं है?
हर अष्टोत्तर का अपना फोकस होता है। यह नामावली देवी के 'शान्त' और 'व्यापक' स्वरूप (जैसे सर्वलोकेशी, सर्वज्ञ) पर अधिक केंद्रित है, जबकि पहली नामावली युद्धक स्वरूप पर थी।
7. क्या इसे बिना दीक्षित हुए पढ़ सकते हैं?
हाँ, यह नामावली सार्वभौमिक है। कोई भी श्रद्धाभाव से माँ को पुष्प अर्पित करते हुए इसका पाठ कर सकता है।
8. 'अयोनिजायै नमः' का क्या अर्थ है?
'अयोनिजा' का अर्थ है - जिनका जन्म गर्भ से नहीं हुआ। देवी दुर्गा आदि शक्ति हैं, वे स्वयंभू (Self-manifested) हैं।
9. अर्चना में कौन से फूल प्रयोग करें?
लाल गुड़हल (Hibiscus), लाल गुलाब, या कनेर के फूल देवी को अत्यंत प्रिय हैं। यदि फूल न हों तो कुमकुम या अक्षत का प्रयोग करें।
10. 'सर्वसंहारकारिण्यै' का क्या अर्थ है?
सृष्टि के अंत में जो सब कुछ अपने भीतर समेट लेती हैं (संहार करती हैं), वे सर्वसंहारकारिणी हैं। यह विनाश नहीं, बल्कि नवीनीकरण के लिए है।
11. क्या यह धन लाभ देता है?
हाँ, 'महालक्ष्मी' और 'सर्वाभीष्टप्रदायिनी' (सब इच्छाएं पूरी करने वाली) जैसे नामों का जाप निश्चित रूप से आर्थिक बाधाओं को दूर करता है।
12. 'साध्वी' और 'शांकरी' में क्या संबंध है?
दोनों शिव से जुड़े हैं। 'शांकरी' का अर्थ है शंकर की शक्ति (कल्याण करने वाली)। यह नाम देवी के मंगलकारी स्वरूप को दर्शाता है।