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Sri Angaraka Mangala Ashtottara Shatanamavali – 108 Names of Mars (Archana & Benefits)

Sri Angaraka Mangala Ashtottara Shatanamavali – 108 Names of Mars (Archana & Benefits)
॥ श्री अंगारक (मंगल) अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॥ ॐ श्री अंगारकाय नमः ॥ ॐ महीसुताय नमः । ॐ महाभागाय नमः । ॐ मङ्गलाय नमः । ॐ मङ्गलप्रदाय नमः । ॐ महावीराय नमः । ॐ महाशूराय नमः । ॐ महाबलपराक्रमाय नमः । ॐ महारौद्राय नमः । ॐ महाभद्राय नमः । ॐ माननीयाय नमः । ॐ दयाकराय नमः । ॐ मानदाय नमः । ॐ अमर्षणाय नमः । ॐ क्रूराय नमः । ॐ तापपापविवर्जिताय नमः । ॐ सुप्रतीपाय नमः । ॐ सुताम्राक्षाय नमः । ॐ सुब्रह्मण्याय नमः । ॐ सुखप्रदाय नमः । ॐ वक्रस्तम्भादिगमनाय नमः । ॐ वरेण्याय नमः । ॐ वरदाय नमः । ॐ सुखिने नमः । ॐ वीरभद्राय नमः । ॐ विरूपाक्षाय नमः । ॐ विदूरस्थाय नमः । ॐ विभावसवे नमः । ॐ नक्षत्रचक्रसञ्चारिणे नमः । ॐ क्षत्रपाय नमः । ॐ क्षात्रवर्जिताय नमः । ॐ क्षयवृद्धिविनिर्मुक्ताय नमः । ॐ क्षमायुक्ताय नमः । ॐ विचक्षणाय नमः । ॐ अक्षीणफलदाय नमः । ॐ चक्षुर्गोचराय नमः । ॐ शुभलक्षणाय नमः । ॐ वीतरागाय नमः । ॐ वीतभयाय नमः । ॐ विज्वराय नमः । ॐ विश्वकारणाय नमः । ॐ नक्षत्रराशिसञ्चाराय नमः । ॐ नानाभयनिकृन्तनाय नमः । ॐ कमनीयाय नमः । ॐ दयासाराय नमः । ॐ कनत्कनकभूषणाय नमः । ॐ भयघ्नाय नमः । ॐ भव्यफलदाय नमः । ॐ भक्ताभयवरप्रदाय नमः । ॐ शत्रुहन्त्रे नमः । ॐ शमोपेताय नमः । ॐ शरणागतपोषकाय नमः । ॐ साहसाय नमः । ॐ सद्गुणाय नमः । ॐ अध्यक्षाय नमः । ॐ साधवे नमः । ॐ समरदुर्जयाय नमः । ॐ दुष्टदूराय नमः । ॐ शिष्टपूज्याय नमः । ॐ सर्वकष्टनिवारकाय नमः । ॐ दुश्चेष्टवारकाय नमः । ॐ दुःखभञ्जनाय नमः । ॐ दुर्धराय नमः । ॐ हरये नमः । ॐ दुःस्वप्नहन्त्रे नमः । ॐ दुर्धर्षाय नमः । ॐ दुष्टगर्वविमोचकाय नमः । ॐ भरद्वाजकुलोद्भूताय नमः । ॐ भूसुताय नमः । ॐ भव्यभूषणाय नमः । ॐ रक्ताम्बराय नमः । ॐ रक्तवपुषे नमः । ॐ भक्तपालनतत्पराय नमः । ॐ चतुर्भुजाय नमः । ॐ गदाधारिणे नमः । ॐ मेषवाहाय नमः । ॐ अमिताशनाय नमः । ॐ शक्तिशूलधराय नमः । ॐ शक्ताय नमः । ॐ शस्त्रविद्याविशारदाय नमः । ॐ तार्किकाय नमः । ॐ तामसाधाराय नमः । ॐ तपस्विने नमः । ॐ ताम्रलोचनाय नमः । ॐ तप्तकाञ्चनसङ्काशाय नमः । ॐ रक्तकिञ्जल्कसन्निभाय नमः । ॐ गोत्राधिदेवाय नमः । ॐ गोमध्यचराय नमः । ॐ गुणविभूषणाय नमः । ॐ असृजे नमः । ॐ अङ्गारकाय नमः । ॐ अवन्तीदेशाधीशाय नमः । ॐ जनार्दनाय नमः । ॐ सूर्ययाम्यप्रदेशस्थाय नमः । ॐ यौवनाय नमः । ॐ याम्यदिङ्मुखाय नमः । ॐ त्रिकोणमण्डलगताय नमः । ॐ त्रिदशाधिपसन्नुताय नमः । ॐ शुचये नमः । ॐ शुचिकराय नमः । ॐ शूराय नमः । ॐ शुचिवश्याय नमः । ॐ शुभावहाय नमः । ॐ मेषवृश्चिकराशीशाय नमः । ॐ मेधाविने नमः । ॐ मितभाषणाय नमः । ॐ सुखप्रदाय नमः । ॐ सुरूपाक्षाय नमः । ॐ सर्वाभीष्टफलप्रदाय नमः । ॥ इति श्री अङ्गारकाष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णम् ॥

॥ श्री अंगारक अष्टोत्तरशतनामावली: परिचय ॥

श्री अंगारक अष्टोत्तरशतनामावली (Sri Angaraka Ashtottara Shatanamavali) भगवान मंगल (Mars) के 108 दिव्य नामों का एक अत्यंत शक्तिशाली संग्रह है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को 'अंगारक' (अग्नि के समान आभा वाला) और 'भूमि पुत्र' कहा गया है। यह साहस, पराक्रम, और नेतृत्व क्षमता का ग्रह है।
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर या पाप ग्रहों से पीड़ित होता है, तो उसे 'मंगल दोष' (Mangal Dosh) या 'कुज दोष' का सामना करना पड़ता है। इसके कारण विवाह में देरी, दांपत्य जीवन में कलह, रक्त विकार, और भूमि-संपत्ति से जुड़े विवाद उत्पन्न होते हैं। इन 108 नामों का जाप मंगल की उग्रता को शांत कर उसे शुभ फलदायी बनाता है।
अतः यह नामावली केवल नामों की सूची नहीं, बल्कि संकट मोचन और दरिद्रता नाश का एक सिद्ध मन्त्र समूह है। जहाँ 'स्तोत्र' का पाठ श्लोक रूप में किया जाता है, वहीं 'नामावली' का प्रयोग अर्चन (Archana) के लिए होता है, जहाँ प्रत्येक नाम के साथ 'ॐ' और 'नमः' लगाकर देवता को पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

॥ विशिष्ट महत्व (Significance) ॥

मंगल देव को 'ऋणहर्ता' और 'शक्तिदाता' माना जाता है। यह 108 नामावली मंगल के विभिन्न आयामों को उजागर करती है:
  • मंगल दोष निवारण (Mangal Dosh Remedy): विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह नामावली रामबाण उपाय है।
  • ऋण मुक्ति (Debt Removal): यदि आप भारी कर्ज (Loan) से दबे हैं, तो इसका नियमित अर्चन चमत्कारिक परिणाम देता है।
  • भूमि और संपत्ति लाभ: चूंकि मंगल 'भूमि पुत्र' हैं, इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने में आ रही बाधाएं इनके पाठ से दूर होती हैं।
  • शत्रु और भय नाश: यह पाठ व्यक्ति को निडर बनाता है और शत्रुओं तथा दुर्घटनाओं (Accidents) से रक्षा करता है।

॥ अर्चन और पाठ विधि (Ritual Method) ॥

इस नामावली का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए इसे सही विधि और निष्ठा से करना आवश्यक है:
  1. समय: वैसे तो नित्य करना चाहिए, लेकिन मंगलवार (Tuesday) इसका विशेष दिन है। मंगल की होरा में पाठ करना अति उत्तम होता है।
  2. दिशा: दक्षिण दिशा (South) मंगल की दिशा मानी जाती है, इसलिए दक्षिण या पूर्व की ओर मुख करके बैठें।
  3. सामग्री: एक तांबे के लोटे में जल, रोली, अक्षत (रंगे हुए), और लाल फूल (गुड़हल/कनेर) तैयार रखें। एक थाली में मंगल यंत्र या मूर्ति स्थापित करें।
  4. अर्चन विधि: 'ओम' से शुरू होकर 'नमः' पर समाप्त होने वाले प्रत्येक नाम के साथ लाल फूल या लाल चंदन में रंगे हुए चावल (अक्षत) अर्पित करें।
  5. नैवेद्य: गुड़, लाल मसूर की दाल, या लाल फल (जैसे अनार, सेब) का भोग लगाएं।
(नोट: यदि आपके पास फूल नहीं हैं, तो आप केवल मानसिक रूप से भी नामों का उच्‍चारण कर सकते हैं। भाव ही प्रधान है।)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. श्री अंगारक अष्टोत्तरशतनामावली के पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य कुंडली में मंगल दोष के दुष्प्रभावों को कम करना, शीघ्र विवाह योग बनाना, और पुराण व ज्योतिष के अनुसार कर्ज (Loan) से मुक्ति प्राप्त करना है।

2. क्या इस नामावली का पाठ रोज करना आवश्यक है?

जी हाँ, यदि आप भारी संकट में हैं तो नित्य पाठ करें। सामान्य फल और शांति के लिए इसे प्रत्येक मंगलवार (Tuesday) को करना पर्याप्त है।

3. 'नामावली' और 'स्तोत्र' में क्या अंतर है?

स्तोत्र एक लयात्मक प्रार्थना या श्लोक संग्रह है, जबकि 'नामावली' में देवता के नामों (जैसे 108 नाम) का अलग-अलग जाप किया जाता है, जिसका प्रयोग अक्सर अर्चन (फूल अर्पित करने) के लिए होता है।

4. क्या महिलाएं पीरियड (मासिक धर्म) के दौरान इसका पाठ कर सकती हैं?

नहीं, शास्त्रों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान पूजा और जप से बचना चाहिए। शुद्धि के बाद पुनः पाठ आरंभ करें।

5. मंगल के 108 नाम बोलते समय क्या अर्पित करना चाहिए?

प्रत्येक नाम मंत्र (जैसे "ॐ मंगलाय नमः") बोलते समय मंगल यंत्र या मूर्ति पर लाल पुष्प, कुमकुम, या रंगे हुए अक्षत अर्पित करें।

6. क्या यह नामावली कर्ज उतारने में मदद करती है?

हाँ, मंगल देव को 'ऋणहर्ता' (Reanharta) भी कहा जाता है। 'ऋण मोचक मंगल स्तोत्र' के साथ इस नामावली का पाठ कर्ज मुक्ति के लिए अचूक माना गया है।

7. पाठ पूर्ण होने के बाद क्या करना चाहिए?

पाठ के बाद मंगल देव की आरती करें और गुड़ या मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद बांटें। हो सके तो लाल मसूर की दाल का दान करें।

8. किस समय पाठ करना सबसे फलदायी है?

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) सबसे उत्तम है। यदि यह संभव न हो, तो शाम को सूर्यास्त के बाद भी पाठ किया जा सकता है।

9. क्या अविवाहित लोग इसका पाठ कर सकते हैं?

बिल्कुल! जिन युवक-युवतियों के विवाह में मंगल दोष के कारण देरी हो रही है, उनके लिए यह पाठ विशेष रूप से लाभकारी है।

10. 'अंगारक' का क्या अर्थ है?

'अंगारक' का शाब्दिक अर्थ है 'दहकता हुआ कोयला'। यह नाम मंगल ग्रह की लाल चमक और तेज स्वभाव को दर्शाता है।

11. कितने दिनों तक पाठ करने से लाभ मिलता है?

ज्योतिषीय उपायों के अनुसार, लगातार 21 या 41 मंगलवार तक निष्ठापूर्वक पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

12. क्या हनुमान चालीसा के साथ इसका पाठ कर सकते हैं?

जी हाँ, हनुमान जी और मंगल देव का गहरा संबंध है। हनुमान चालीसा के बाद इस नामावली का पाठ करने से शक्ति और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।