ऋण मोचक मंगल स्तोत्र (Rin Mochana Mangal Stotram) - अर्थ, लाभ और विधि
Rin Mochana Angaraka Mangal Stotram

परिचय: ऋण मोचक मंगल स्तोत्र
ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का वर्णन स्कन्द पुराण में मिलता है। जब मनुष्य अत्यधिक ऋण (कर्ज) और दरिद्रता से घिर जाता है और उसे कोई रास्ता नहीं सूझता, तब इस स्तोत्र का पाठ आशा की किरण बनकर आता है। यह स्तोत्र मंगल ग्रह (जिन्हें अंगारक भी कहा जाता है) को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को 'भूमिपुत्र' और 'धन का कारक' माना गया है, विशेषकर अचल संपत्ति (Real Estate) और ऋण मुक्ति के लिए।
स्तोत्र के लाभ (Benefits)
शीघ्र कर्ज मुक्ति: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह स्तोत्र कर्ज उतारने में अत्यंत प्रभावशाली है। 'ऋणहर्ता' नाम का जाप साधक को ऋण मुक्त बनाता है।
धन और संपत्ति: पाठ करने से धन की आवक बढ़ती है और भूमि/भवन (Property) से जुड़े लाभ होते हैं।
मंगल दोष निवारण: कुंडली में मांगलिक दोष या मंगल की अशुभता के कारण विवाह या जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
रोग और शत्रु नाश: 'सर्वरोगापहारकः' और 'शत्रवश्च हता' - यह स्वास्थ्य प्रदान करता है और शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
सरल पाठ विधि
मंगलवार को स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें।
हनुमान जी और मंगल देव का ध्यान करें।
शुद्ध घी का दीपक जलाएं और लाल फूल (जैसे गुड़हल) अर्पित करें।
ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। यदि संभव हो तो 108 दिन तक नित्य पाठ करें, या कम से कम हर मंगलवार को।
विशेष उपाय: बहुत अधिक कर्ज होने पर, मंगलवार को पाठ करते समय काले कोयले से जमीन पर लकीरें खींचें और पाठ के बाद उन्हें बाएं पैर से मिटा दें। यह कर्ज के मिटने का प्रतीक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का पाठ क्यों किया जाता है?
इसका मुख्य उद्देश्य 'ऋण' (कर्ज) से मुक्ति पाना है। यह स्तोत्र मंगल देव (जिन्हें भूमिपुत्र और धनप्रद भी कहा जाता है) को प्रसन्न कर आर्थिक समस्याओं को दूर करने और धन समृद्धि प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
2. इस स्तोत्र की रचना किसने की है?
यह स्तोत्र 'स्कन्द पुराण' में वर्णित है। यह भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) द्वारा पूछे जाने पर स्वयं जगतपिता ब्रह्मा जी द्वारा बताया गया है।
3. ऋण मोचक मंगल स्तोत्र पाठ करने की विशेष विधि क्या है?
श्लोक 6-8 के अनुसार, मंगलवार को पूजा के बाद जले हुए कोयले (अंगारे) से जमीन पर लकीरें (ऋण रेखाएं) खींचकर, पाठ करते हुए उन्हें बाएं पैर से मिटाने की विधि बताई गई है, जो कर्ज मिटाने का प्रतीक है।
4. मंगल देव के अन्य नाम क्या हैं जो इस स्तोत्र में आए हैं?
इस स्तोत्र में मंगल देव को अङ्गारक, भूमिपुत्र, ऋणहर्ता, धनप्रद, लोहित, लोहितांग, सामगायी, कृपाकर, धर्मराज, कुज, भौम, और भूमिनन्दन आदि नामों से पुकारा गया है।
5. इसका पाठ कब करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से 'मंगलवार' (Tuesday) को करना चाहिए। प्रतिदिन पाठ करना भी बहुत शुभ है।