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Kakaradi Kali Ashtottara Shatanamavali – ककारादि श्री काली अष्टोत्तरशतनामावली

Kakaradi Kali Ashtottara Shatanamavali – ककारादि श्री काली अष्टोत्तरशतनामावली
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ ककारादि श्री काली अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ काल्यै नमः । ॐ कपालिन्यै नमः । ॐ कान्तायै नमः । ॐ कामदायै नमः । ॐ कामसुन्दर्यै नमः । ॐ कालरात्र्यै नमः । ॐ कालिकायै नमः । ॐ कालभैरवपूजितायै नमः । ॐ कुरुकुल्लायै नमः । ॐ कामिन्यै नमः । ॐ कमनीयस्वभाविन्यै नमः । ॐ कुलीनायै नमः । ॐ कुलकर्त्र्यै नमः । ॐ कुलवर्त्मप्रकाशिन्यै नमः । ॐ कस्तूरीरसनीलायै नमः । ॐ काम्यायै नमः । ॐ कामस्वरूपिण्यै नमः । ॐ ककारवर्णनिलयायै नमः । १८ ॐ कामधेनवे नमः । ॐ करालिकायै नमः । ॐ कुलकान्तायै नमः । ॐ करालास्यायै नमः । ॐ कामार्तायै नमः । ॐ कलावत्यै नमः । ॐ कृशोदर्यै नमः । ॐ कामाख्यायै नमः । ॐ कौमार्यै नमः । २७ ॐ कुलपालिन्यै नमः । ॐ कुलजायै नमः । ॐ कुलकन्यायै नमः । ॐ कुलहायै नमः । ॐ कुलपूजितायै नमः । ॐ कामेश्वर्यै नमः । ॐ कामकान्तायै नमः । ॐ कुञ्जरेश्वरगामिन्यै नमः । ॐ कामदात्र्यै नमः । ३६ ॐ कामहर्त्र्यै नमः । ॐ कृष्णायै नमः । ॐ कपर्दिन्यै नमः । ॐ कुमुदायै नमः । ॐ कृष्णदेहायै नमः । ॐ कालिन्द्यै नमः । ॐ कुलपूजितायै नमः । ॐ काश्यप्यै नमः । ॐ कृष्णमात्रे नमः । ४५ ॐ कुलिशाङ्ग्यै नमः । ॐ कलायै नमः । ॐ क्रीं रूपायै नमः । ॐ कुलगम्यायै नमः । ॐ कमलायै नमः । ॐ कृष्णपूजितायै नमः । ॐ कृशाङ्ग्यै नमः । ॐ किन्नर्यै नमः । ॐ कर्त्र्यै नमः । ५४ ॐ कलकण्ठ्यै नमः । ॐ कार्तिक्यै नमः । ॐ कम्बुकण्ठ्यै नमः । ॐ कौलिन्यै नमः । ॐ कुमुदायै नमः । ॐ कामजीविन्यै नमः । ॐ कुलस्त्रियै नमः । ॐ कीर्तिकायै नमः । ॐ कृत्यायै नमः । ६३ ॐ कीर्त्यै नमः । ॐ कुलपालिकायै नमः । ॐ कामदेवकलायै नमः । ॐ कल्पलतायै नमः । ॐ कामाङ्गवर्धिन्यै नमः । ॐ कुन्तायै नमः । ॐ कुमुदप्रीतायै नमः । ॐ कदम्बकुसुमोत्सुकायै नमः । ॐ कादम्बिन्यै नमः । ७२ ॐ कमलिन्यै नमः । ॐ कृष्णानन्दप्रदायिन्यै नमः । ॐ कुमारीपूजनरतायै नमः । ॐ कुमारीगणशोभितायै नमः । ॐ कुमारीरञ्जनरतायै नमः । ॐ कुमारीव्रतधारिण्यै नमः । ॐ कङ्काल्यै नमः । ॐ कमनीयायै नमः । ॐ कामशास्त्रविशारदायै नमः । ८१ ॐ कपालखट्वाङ्गधरायै नमः । ॐ कालभैरवरूपिण्यै नमः । ॐ कोटर्यै नमः । ॐ कोटराक्ष्यै नमः । ॐ काशीवासिन्यै नमः । ॐ कैलासवासिन्यै नमः । ॐ कात्यायन्यै नमः । ॐ कार्यकर्यै नमः । ॐ काव्यशास्त्रप्रमोदिन्यै नमः । ९० ॐ कामाकर्षणरूपायै नमः । ॐ कामपीठनिवासिन्यै नमः । ॐ कङ्किन्यै नमः । ॐ काकिन्यै नमः । ॐ क्रीडायै नमः । ॐ कुत्सितायै नमः । ॐ कलहप्रियायै नमः । ॐ कुण्डगोलोद्भवप्राणायै नमः । ॐ कौशिक्यै नमः । ९९ ॐ कीर्तिवर्धिन्यै नमः । ॐ कुम्भस्तन्यै नमः । ॐ कटाक्षायै नमः । ॐ काव्यायै नमः । ॐ कोकनदप्रियायै नमः । ॐ कान्तारवासिन्यै नमः । ॐ कान्त्यै नमः । ॐ कठिनायै नमः । ॐ कृष्णवल्लभायै नमः । १०८ ॥ इति ककारादि श्री काली अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णम् ॥

नामावली का परिचय - ककारादि की विशेषता

ककारादि श्री काली अष्टोत्तरशतनामावली में माँ काली के 108 पवित्र नाम हैं। इस नामावली की विशेषता यह है कि सभी 108 नाम "क" अक्षर से प्रारंभ होते हैं।
यह नामावली भगवान भैरव द्वारा कथित ककारादि अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् का अर्चना format है। प्रत्येक नाम के साथ "ॐ ... नमः" लगाकर पूजा में प्रयुक्त होती है।
"क" अक्षर का महत्व: "क" तांत्रिक परंपरा में अत्यंत पवित्र है। यह "क्रीं" बीज मंत्र का प्रथम अक्षर है, काल का प्रतीक है, और कुण्डलिनी शक्ति का वाचक है।

प्रमुख नामों के अर्थ

नामअर्थमहत्व
काल्यैकाली देवी कोप्रथम नाम, मूल स्वरूप
कपालिन्यैकपाल धारिणीमृत्यु पर विजय
कालरात्र्यैकाल की रात्रिनवदुर्गा स्वरूप
कुरुकुल्लायैवशीकरण देवीआकर्षण शक्ति
कामाख्यायैकामाख्या पीठ की देवीशक्तिपीठ निवासिनी
क्रीं रूपायैक्रीं बीज स्वरूपामंत्र स्वरूप
कात्यायन्यैकात्यायन ऋषि की पुत्रीनवदुर्गा षष्ठी

स्तोत्रम् और नामावली में अंतर

विषयस्तोत्रम्नामावली
प्रारूपश्लोक रूप में"ॐ...नमः" format
उपयोगपाठ, स्तुतिपूजा, अर्चना, होम
अर्पणकेवल पाठप्रत्येक नाम पर पुष्प/अक्षत
विधिसामग्री रहित भीपूजा सामग्री आवश्यक

अर्चना विधि - सम्पूर्ण प्रक्रिया

आवश्यक सामग्री:
  • 108 लाल पुष्प (गुड़हल उत्तम) या बिल्वपत्र
  • माँ काली की प्रतिमा/चित्र
  • धूप, दीप, चंदन
  • लाल वस्त्र आसन
विधि:
  1. पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठें
  2. माँ काली का ध्यान करें
  3. 108 पुष्प/अक्षत तैयार रखें
  4. प्रत्येक नाम बोलते हुए एक पुष्प अर्पित करें
  5. "ॐ काल्यै नमः" - एक पुष्प अर्पित
  6. "ॐ कपालिन्यै नमः" - एक पुष्प अर्पित
  7. इस प्रकार 108 नामों पर 108 पुष्प अर्पित करें
  8. अंत में प्रणाम और क्षमा याचना करें
विशेष: यदि 108 पुष्प न हों तो अक्षत (चावल) या कुमकुम से भी अर्चना की जा सकती है। एक माला (108) मंत्र जप के बाद नामावली पाठ अधिक फलदायी है।

पाठ का शुभ समय

विशेष तिथियाँ

  • अमावस्या - सर्वोत्तम
  • काली चतुर्दशी
  • नवरात्रि
  • दीपावली रात्रि

साप्ताहिक दिन

  • मंगलवार
  • शनिवार
  • रात्रि का समय उत्तम

नामावली पाठ के लाभ

शत्रु नाश और विजय
भय और चिंता मुक्ति
वाक्-सिद्धि प्राप्ति
गृह में माँ काली का वास
तांत्रिक सिद्धि
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. यह नामावली किस ग्रंथ से है?

यह ककारादि काली अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् की नामावली format है जो भगवान भैरव द्वारा देवी को कथित है। दोनों में समान 108 नाम हैं।

2. अर्चना में क्या अर्पित करना चाहिए?

लाल पुष्प (गुड़हल सर्वोत्तम), बिल्वपत्र, हिबिस्कस, या अक्षत अर्पित कर सकते हैं। प्रत्येक नाम पर एक अर्पण करें।

3. क्या महिलाएं इस नामावली का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, माँ काली की उपासना में कोई लिंग भेद नहीं है। महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा से पाठ और अर्चना कर सकती हैं।

4. क्या घर में इस नामावली का पाठ हो सकता है?

हाँ, घर में भी पाठ किया जा सकता है। स्वच्छ स्थान में माँ काली का चित्र रखकर पाठ करें। श्मशान या मंदिर अनिवार्य नहीं है।

5. नामावली और स्तोत्र में से क्या पढ़ें?

दैनिक पाठ और ध्यान के लिए स्तोत्रम्, विशेष पूजा और अर्चना में नामावली उपयुक्त है। दोनों का फल समान है।

6. "ॐ" का उच्चारण कैसे करें?

"ॐ" को "ओम्" के रूप में उच्चारित करें। यह प्रणव मंत्र है और सभी मंत्रों का मूल है। गहरी श्वास लेकर दीर्घ उच्चारण करें।