Sri Jwalamukhi Ashtakam – श्री ज्वालामुखि अष्टकम्

ज्वालामुखी देवी - परिचय (Introduction)
श्री ज्वालामुखी अष्टकम् उस दिव्य शक्ति की आराधना है जो निराकार अग्नि रूप में प्रकट हैं। हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला (प्राचीन जालंधर पीठ) वह पावन स्थल है जहाँ माता सती की जिह्वा (Tongue) गिरी थी।
यहाँ कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निरंतर निकलने वाली 9 प्राकृतिक ज्वालाएं (Natural Eternal Flames) ही देवी का स्वरूप हैं। ये ज्वालाएं सदियों से बिना किसी तेल या बाती के जल रही हैं, जो विज्ञान के लिए भी एक चमत्कार है।
पौराणिक कथा:
जब भगवान शिव सती का पार्थिव शरीर लेकर ब्रह्मांड में विचरण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से उनके शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। जहाँ-जहाँ ये अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। कांगड़ा में 'जिह्वा' गिरने के कारण इसे 'ज्वालामुखी' कहा गया, और यहाँ देवी 'सिद्धिदा' (अंबिका) और भैरव 'उन्मत्त' के रूप में पूजे जाते हैं।
श्लोकों का भाव (Significance of Verses)
श्लोक 1: "जालन्धरावनिवनी..." - यह श्लोक जालंधर क्षेत्र (कांगड़ा घाटी) और वहां के पर्वतों की सुंदरता का वर्णन करता है, जहाँ देवी कल्पलता (Kalpalata - Wish-fulfilling creeper) की तरह विराजमान हैं।
श्लोक 3: "मातर्ज्वलज्ज्वलन..." - यहाँ देवी को साक्षात 'ज्वलंत अग्नि' (Blazing Fire) कहा गया है। उनकी छवि अग्नि की लपटों जैसी तेजस्वी और पवित्र है।
श्लोक 5: यहाँ यह पुष्टि की गई है कि भक्त केवल एक भौतिक अग्नि की पूजा नहीं कर रहे, बल्कि उस 'परम चेतना' की पूजा कर रहे हैं जो हमारे पापों (दुरित) को जलाने के लिए 'ज्वाला' के रूप में प्रकट हुई है।
पाठ विधि और लाभ (Ritual & Benefits)
प्रत्यक्ष फल (Instant Results): ज्वालामुखी देवी को 'जागृत देवी' माना जाता है। इस अष्टकम का पाठ तुरंत फलदायी होता है, विशेषकर मुकदमों में विजय, शत्रु बाधा निवारण और आत्म-बल की प्राप्ति के लिए।
भोग और प्रसाद: माँ को नारियल (Coconut), हलवा, और विशेष रूप से रबड़ी-मलाई का भोग बहुत प्रिय है। यहाँ भक्त चाँदी का छत्र भी चढ़ाते हैं।
हवन (Fire Ritual): चूँकि देवी अग्नि स्वरूपा हैं, इसलिए उनके मंत्रों के साथ छोटा हवन करना या केवल घी का दीपक जलाकर त्राटक (Trataka) करना भी एक शक्तिशाली साधना है।
पाप नाश: जैसे अग्नि सब कुछ जलाकर भस्म कर देती है, वैसे ही यह स्तोत्र साधक के संचित पापों और नकारात्मक कर्मों को जला देता है (दुरितानि दग्धुं)।