नवग्रह ध्यानम् (तन्त्रोक्त नवग्रह स्वरूप)
Tantrokta Navagraha Dhyanam — Tantric Visualization of the 9 Planets

नवग्रह ध्यानम् — तन्त्र शास्त्र का मनश्चित्रण विज्ञान
हिंदू धर्मशास्त्रों, विशेषकर आगम और तन्त्र शास्त्र में, 'ध्यान' (Dhyana) केवल आँखें बंद करके बैठने की प्रक्रिया नहीं है। यह एक मनश्चित्रण विज्ञान (Science of Visualization) है। जब हम किसी मन्त्र का जाप करते हैं, तो उस मन्त्र से उत्पन्न होने वाली ब्रह्मांडीय ऊर्जा को एक भौतिक या सूक्ष्म आकार (Form) देना आवश्यक होता है; अन्यथा मन भटक जाता है।
यहाँ प्रस्तुत नवग्रह ध्यानम् एक अत्यंत दुर्लभ और प्रामाणिक संकलन है। इसमें प्रत्येक ग्रह का ध्यान किसी एक पुराण से नहीं, बल्कि भारत के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली तांत्रिक ग्रंथों से चुना गया है। जैसे: त्रिपुरा सर्वस्व, भैरव तन्त्र, वामकेश्वर तन्त्र, और कुब्जिका सर्वस्व। इन ग्रंथों में वर्णित ग्रहों के स्वरूप पौराणिक स्वरूपों (जैसे व्यास कृत नवग्रह स्तोत्र) से कुछ भिन्न और अत्यंत गूढ़ (Secretive) हैं।
हृदब्जे और मानसपङ्कजे का रहस्य: प्रत्येक श्लोक के अंत में "हृदब्जे" (हृदय कमल में) या "मानसपङ्कजे" (मन रूपी कमल में) शब्द आता है। तन्त्र यह मानता है कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड और नवग्रह आपके शरीर के भीतर ही विद्यमान हैं (यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे)। अतः ग्रहों को आकाश में नहीं, बल्कि अपने अनाहत चक्र (Heart Chakra) में स्थापित कर उनका ध्यान करना चाहिए।
नवग्रहों का तान्त्रिक स्वरूप — श्लोक विश्लेषण
आइये विभिन्न तन्त्र शास्त्रों के अनुसार ग्रहों के विशिष्ट तांत्रिक स्वरूपों को गहराई से समझें:
ध्यान: वे प्रत्यक्ष देवता हैं। उनके पास ध्वजा (Flag) है और वे सात घोड़ों के रथ पर विराजमान हैं। उन्हें 'मिहिर' (Mihira) कहा गया है, जो अन्धकार को चीरने वाले हैं।
ध्यान: शंख जैसी चमक वाले, भगवान शिव (ईशान) के मस्तक पर सुशोभित। उनके हाथों में दो कमल (नीरज-युग्म) हैं और उन्हें मृग (हिरण) प्रिय है।
ध्यान: तपाए हुए सोने (गाङ्गेय) जैसी आभा वाले। वे सिंहासन पर बैठे हैं और उनके हाथों में कमल और तलवार (असि) है, जो शांति और शक्ति दोनों का प्रतीक है।
ध्यान: हंस पर सवार (हंसगतं)। सामान्यतः बुध का वाहन सिंह होता है, लेकिन तन्त्र में उन्हें विद्या का कारक मानकर हंसारूढ़ बताया गया है। उनके हाथों में तलवार और पाश है।
ध्यान: हाथी पर सवार (हस्तिगतं)। देवताओं के गुरु होने के नाते वे 'मेधानिधि' (बुद्धि के खजाने) हैं और उनके हाथों में 'शक्ति' अस्त्र और 'त्रिशूल' है।
ध्यान: क्रौञ्च पक्षी पर आसीन (क्रौञ्चासनं)। पीले वस्त्र धारण किए हुए शुक्र देव के हाथों में दो कमल और त्रिशूल है। क्रौञ्च पक्षी प्रेम का प्रतीक है।
ध्यान: नीले काजल जैसी आभा। सबसे विशिष्ट बात यह है कि उनके हाथ में पाश और सर्प (पाशभुजङ्गपाणिम्) है। सर्प कुण्डलिनी और काल का प्रतीक है।
ध्यान: वैडुर्य (लहसुनिया) मणि जैसी चमक वाले। उनके हाथ नहीं हैं (विबाहुम्), फिर भी वे त्रैलोक्य की रक्षा और इष्ट फल देने वाले (इष्टदं) बताए गए हैं।
ध्यान: पूंछ वाले (लाङ्गुलयुक्तं) और काले बादलों (कृष्णाम्बुभृत्) के समान भयानक। वे काले वस्त्र पहनते हैं और हाथ में शक्ति व त्रिशूल रखते हैं।
ध्यान और पाठ विधि (Ritual Method)
यह पाठ सामान्य स्तोत्रों की तरह तेज़ी से पढ़ने के लिए नहीं है। इसे 'मानसिक पूजा' (Manasa Puja) की विधि से किया जाता है:
- आसन: पूजा स्थान पर सिद्धासन या सुखासन में बैठें। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
- नेत्र: आँखें बंद कर लें या आधी खुली (शांभवी मुद्रा) रखें। अपना सारा ध्यान छाती के मध्य (अनाहत चक्र) पर केंद्रित करें।
- उच्चारण: एक श्लोक को अत्यंत धीमी गति से पढ़ें (या मानसिक रूप से स्मरण करें)। जैसे ही आप श्लोक पढ़ते हैं, उस ग्रह का वर्णन (जैसे बुध को हंस पर बैठे हुए) अपने हृदय में उभरता हुआ महसूस करें।
- मन्त्र जाप: इस ध्यान के तुरंत बाद, उस विशिष्ट ग्रह के तांत्रिक बीज मन्त्र का जाप रुद्राक्ष या स्फटिक की माला पर करें। ध्यान से मन्त्र की शक्ति सौ गुना बढ़ जाती है।