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श्री वाराही खड्गमाला स्तोत्रम्

Sri Varahi Khadgamala Stotram

श्री वाराही खड्गमाला स्तोत्रम्
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीकिरातवाराही खड्गमाला स्तोत्रम् ॥ ॥ विनियोगः ॥ अस्य श्री वाराही खड्गमाला-महामन्त्रस्य, भगवान् महा-काल-भैरव ऋषिः, बृहती छन्दः, श्री किरात्-वाराही देवता। ह्रीं बीजं, स्वाहा शक्तिः, क्रौं कीलकम्। मम सर्वारिष्ट-निवृत्यर्थे, सर्व-शत्रु-पीड़ा-निवारणार्थे, श्री-किरात-वाराही-देवता-प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥ ॥ ऋष्यादि न्यासः ॥ ॐ महाकाल भैरव ऋषये नमः (शिरसि) बृहती छन्दसे नमः (मुखे) श्री किरात वाराही देवतायै नमः (हृदि) ह्रीं बीजाय नमः (गुह्ये) स्वाहा शक्तये नमः (पादयोः) क्रौं कीलकाय नमः (नाभौ) विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) ॥ करन्यासः ॥ ॐ ॐ अङ्गुष्ठाभ्यां नमः। ॐ नमो तर्जनीभ्यां नमः। ॐ भगवति मध्यमाभ्यां नमः। ॐ वार्तालि अनामिकाभ्यां नमः। ॐ वाराहि कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ॐ वाराह-मुखि करतल-करपृष्ठाभ्यां नमः। ॥ ध्यानम् ॥ कृष्णवर्णां तु वाराहीं, महिष-वाहन-संस्थिताम्। वरदाऽभय-हस्तां च, दंष्ट्रोद्धृत-वसुन्धराम्॥ चामर-व्यजनोपेतां, देव्या चामर-धारिणीम्। शङ्ख-चक्र-धरां देवीं, भक्तानां भय-नाशिनीम्॥ ॥ प्रारम्भिक प्रार्थना ॥ ॐ ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं क्रौं, नमो भगवति वार्तालि, वाराहि, वाराह-मुखि, ऐं ग्लौं ह्रीं ॐ, नमो भगवति, शुक्लां ब्रह्म-विचार-सार-परमाम् आद्यां जगद्-व्यापिनीं, वीणा-पुस्तक-धारिणीम् अभयदां जाड्यान्धकारापहाम्। हस्ते स्फाटिक-मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां, वन्दे त्वां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि-प्रदां शारदाम्॥ ॥ माला मन्त्र ॥ ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः । ॐ नमो भगवति, वार्तालि, वाराहि, वाराह-मुखि, अन्धे-अन्धिनि नमः । रुन्धे-रुन्धिनि नमः । जम्भे-जम्भिनि नमः । मोहे-मोहिनी नमः । स्तम्भे-स्तम्भिनि नमः । ॥ आवरण पूजन ॥ ॐ सर्व-दुष्ट-प्रदुष्टानां सर्वेषां, सर्व-वाक्-चित्त-चक्षु-मुख-गति-जिह्वा-स्तम्भनं कुरु कुरु, शीघ्रं वश्यं कुरु कुरु, ऐं ग्लौं ठः ठः ठः हुं फट् स्वाहा॥ ॥ देवता आवाहन ॥ ॐ वार्तालि, वार्तालि, वाराहि, वाराहि, वाराह-मुखि, वाराह-मुखि, अन्धे, अन्धिनि, रुन्धे, रुन्धिनि, जम्भे, जम्भिनि, मोहे, मोहिनि, स्तम्भे, स्तम्भिनि॥ ॥ शक्ति आवाहन ॥ ॐ इन्द्रादि-अष्ट-दिक्पाल-सहिते, ॐ यक्ष-राक्षस-पिशाच-भूत-प्रेत-सर्प-श्वापद-वृश्चिक- चोर-अग्नि-वायु-विष-शस्त्रादि-भय-निवारिणी॥ ॥ शत्रु मर्दन ॥ ॐ ह्रीं वाराहि, मम शत्रून् हन हन, दह दह, पच पच, मथ मथ, विध्वंसय विध्वंसय, विद्रावय विद्रावय, शोषय शोषय, उच्चाटय उच्चाटय, मम सर्व-सिद्धिं देहि देहि, मम मनोरथं पूरय पूरय फट् स्वाहा॥ ॥ समापन ॥ ऐं ग्लौं ह्रीं ॐ नमो भगवति वार्तालि, मम सकल-कार्य-सिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा॥

परिचय (Introduction)

श्री वाराही खड्गमाला स्तोत्रम् (Sri Varahi Khadgamala Stotram) श्री विद्या संप्रदाय का एक अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली स्तोत्र है। 'खड्ग' का अर्थ है तलवार और 'माला' का अर्थ है हार। यह स्तोत्र देवी वाराही (जो ललिता त्रिपुरसुंदरी की प्रधान सेनापति और दण्डनाथा हैं) की समस्त शक्तियों, आयुधों और परिवार देवताओं का आह्वान करता है।

इसे किरात वाराही खड्गमाला भी कहा जाता है। जिस प्रकार श्री ललिता खड्गमाला का पाठ श्री चक्र के सभी आवरणों की पूजा है, उसी प्रकार वाराही खड्गमाला का पाठ करने से देवी वाराही के सुरक्षा चक्र का निर्माण होता है। यह स्तोत्र शत्रुओं के मन, बुद्धि और कर्मों को 'कीलों' की तरह जड़ (स्तम्भित) कर देता है।

विशेषता: यह एक "माला मंत्र" है, जिसका अर्थ है कि यह केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित ऊर्जा संरचना है। इसके पाठ मात्र से ऐसा माना जाता है कि साधक के चारों ओर तलवारों की एक अभेद्य दीवार बन जाती है।

महत्व एवं लाभ (Significance & Benefits)

इस स्तोत्र की फलश्रुति में कहा गया है कि इसका पाठ करने वाला सभी प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है:

  • शत्रु स्तम्भन: मंत्र में स्पष्ट कहा गया है—"सर्व-वाक्-चित्त-चक्षु-मुख-गति-जिह्वा-स्तम्भनं कुरु कुरु"। यह विरोधियों की वाणी, सोच और गतिविधि को तत्काल रोक देता है।
  • अभेद्य सुरक्षा: यह स्तोत्र साधक को चोर, अग्नि, विष, शस्त्र और हिंसक पशुओं के भय से मुक्ति दिलाता है।
  • तंत्र बाधा निवारण: यक्ष, राक्षस, भूत, प्रेत या किसी भी प्रकार की ऊपरी बाधा (Black Magic) को यह स्तोत्र जड़ से नष्ट कर देता है।
  • कार्य सिद्धि: "मम सकल-कार्य-सिद्धिं कुरु कुरु" — यह अटके हुए कार्यों को निर्विघ्न पूरा करने में सहायक है।

साधना विधि (Method of Chanting)

चूँकि यह एक तांत्रिक माला मंत्र है, इसका पाठ पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ करना चाहिए।

समय: इसका पाठ रात्रि काल (विशेषकर 10 बजे के बाद) या ब्रह्म मुहूर्त में अत्यंत फलदायी होता है। अष्टमी, नवमी, या अमावस्या की तिथियाँ श्रेष्ठ हैं।

न्यास: पाठ से पूर्व दिए गए 'ऋष्यादि न्यास' और 'करन्यास' अवश्य करें। इससे शरीर मंत्रमय हो जाता है और सुरक्षा मिलती है।

दिशा और आसन: दक्षिण दिशा (शत्रु नाश हेतु) की ओर मुख करें। लाल या काले ऊनी आसन का प्रयोग करें।

सावधानी: यह उग्र पाठ है। इसका प्रयोग किसी का अहित करने के लिए न करें, अन्यथा इसका दुष्प्रभाव साधक पर ही हो सकता है। केवल आत्म-रक्षा के लिए ही इसका प्रयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. खड्गमाला स्तोत्र क्या है?

खड्गमाला का अर्थ है 'तलवारों की माला'। यह एक शक्तिशाली तांत्रिक स्तोत्र है जो देवी के श्री चक्र के सभी आवरणों और शक्तियों का पूजन करता है। वाराही खड्गमाला शत्रुओं पर विजय और रक्षा के लिए प्रसिद्ध है।

2. वाराही खड्गमाला के लाभ क्या हैं?

इसके पाठ से शत्रुओं का स्तम्भन होता है, सभी प्रकार के भय (चोर, अग्नि, राज-भय) दूर होते हैं, और साधक को अभेद्य सुरक्षा कवच प्राप्त होता है।

3. इसे कब पढ़ना चाहिए?

इसे नित्य पूजा में या विशेष रूप से नवरात्रि, अष्टमी, या रात्रि काल (निशीथ काल) में पढ़ना अत्यंत फलदायी है।

4. क्या इसे बिना दीक्षा के पढ़ सकते हैं?

भक्ति भाव से रक्षा हेतु इसे पढ़ा जा सकता है। परन्तु काम्य प्रयोग या विशेष सिद्धि के लिए श्री विद्या दीक्षा और गुरु मार्गदर्शन अनिवार्य है।

5. 'वार्ताली' का क्या अर्थ है?

वार्ताली देवी वाराही का ही एक नाम है। 'वार्ता' का अर्थ है वृत्ति या जीवन। जो जीवों की वृत्ति का संचालन और नियंत्रण करती हैं, वे वार्ताली हैं।