Sri Surya Stotram (Shiva Proktam) – श्री सूर्य स्तोत्रम् | Cure for TB, Epilepsy & Diseases
Sri Surya Stotram (Shiva Proktam)

शिव प्रोक्त सूर्य स्तोत्र: महिमा और परिचय
श्री सूर्य स्तोत्रम् (शिव प्रोक्तम्) एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली स्तुति है, जिसकी रचना स्वयं देवाधिदेव महादेव (शिव) ने की है। यह स्तोत्र 'रोग-नाशक' श्रेणी में आता है। जब औषधियाँ काम करना बंद कर दें, तब इस स्तोत्र का आश्रय लिया जाता है।
इसमें भगवान सूर्य को केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि साक्षात 'त्रयीमूर्ति' (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) और 'कालात्मा' (Time Personified) मानकर नमन किया गया है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों का एक 'अष्टक' है, जिसके अंत में इसकी 'फलश्रुति' (Benefits) दी गई है।
सूर्य स्तोत्र पाठ के चमत्कारी लाभ (Benefits)
असाध्य रोगों का नाश: शिव जी स्वयं कहते हैं- "क्षयापस्मारगुल्मादि..."। यह स्तोत्र टीबी (Tuberculosis), मिर्गी (Epilepsy) और पेट की गाँठों (Tumors) को गलाने में सक्षम है।
तीव्र ज्वर (Fever) से मुक्ति: पुराने से पुराने बुखार (Chronic Fever) या बार-बार आने वाले बुखार में इसका पाठ 'संजीवन बूटी' समान कार्य करता है ("सर्वज्वरहरं चैव")।
पाचन और उदर विकार: "कुक्षिरोगनिवारणम्" - यह स्तोत्र अपच, गैस, एसिडिटी और लिवर-किडनी के गंभीर रोगों (Diseases of the belly/abdomen) को ठीक करता है।
त्रिदेवों का आशीर्वाद: चूंकि सूर्य ही प्रातः ब्रह्मा, दोपहर में शिव और शाम को विष्णु हैं, अतः इस एक पाठ से तीनों महाशक्तियों की कृपा प्राप्त होती है।
सर्व सिद्धि और संपत्ति: यह केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि "सर्वसम्पत्करं" (धन देने वाला) और "सर्वसिद्धिकरं" (सफलता देने वाला) भी है।
पाठ विधि (Chanting Method for Cure)
विशेष नोट: यदि किसी गंभीर रोग (जैसे मिर्गी या टीबी) के निवारण हेतु पाठ कर रहे हैं, तो इसे 'अनुष्ठान' के रूप में करें।
- समय: प्रतिदिन सूर्योदय (Sunrise) के समय जब सूर्य लालिमा लिए हो।
- दिशा: पूर्व (East) की ओर मुख करके खड़े हों या बैठें।
- जल अर्पण: तांबे के पात्र में जल, रोली और अक्षत लेकर सूर्य को अर्घ्य दें। जल की धार में से सूर्य को देखते हुए यह स्तोत्र पढ़ें।
- आवृति (Repetition): सामान्य लाभ के लिए 1 बार, विशेष रोग निवारण के लिए प्रतिदिन 11 या 21 बार पाठ करें।
- अवधि: लगातार 41 दिनों (एक मंडल) तक पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. इस स्तोत्र के रचयिता कौन हैं?
2. 'अपस्मार' (Apasmara) रोग क्या है?
3. क्या टीबी (TB) के मरीज इसे कर सकते हैं?
4. सूर्य को 'त्रयीमूर्ति' क्यों कहा गया है?
क्योंकि सूर्य दिन भर में तीनों देवों का रूप लेते हैं:
- उदय (Dawn): ब्रह्मा (सृष्टि कारक)
- मध्याह्न (Noon): महेश्वर/शिव (संहार/तेज कारक)
- अस्त (Dusk): विष्णु (पालन/विश्राम कारक)