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Sri Shiva Dvadashanama Stotram – श्री शिव द्वादशनाम स्तोत्रम्

Sri Shiva Dvadashanama Stotram – श्री शिव द्वादशनाम स्तोत्रम्
प्रथमस्तु महादेवो द्वितीयस्तु महेश्वरः । तृतीयः शङ्करो ज्ञेयश्चतुर्थो वृषभध्वजः ॥ १ ॥ पञ्चमः कृत्तिवासाश्च षष्ठः कामाङ्गनाशनः । सप्तमो देवदेवेशः श्रीकण्ठश्चाष्टमः स्मृतः ॥ २ ॥ ईश्वरो नवमो ज्ञेयो दशमः पार्वतीपतिः । रुद्र एकादशश्चैव द्वादशः शिव उच्यते ॥ ३ ॥ द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः । कृतघ्नश्चैव गोघ्नश्च ब्रह्महा गुरुतल्पगः ॥ ४ ॥ स्त्रीबालघातुकश्चैव सुरापो वृषलीपतिः । मुच्यते सर्वपाप्येभ्यो रुद्रलोकं स गच्छति ॥ ५ ॥ इति श्री शिव द्वादशनाम स्तोत्रम् । इतर पश्यतु ।

श्री शिव द्वादशनाम स्तोत्रम् - परिचय

श्री शिव द्वादशनाम स्तोत्रम् भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
  • विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
  • समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
  • भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री शिव द्वादशनाम स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।

2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?

हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।

3. श्री शिव द्वादशनाम स्तोत्रम् के पाठ से क्या फल मिलता है?

इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।