Sri Sharva Stuti (Krishna Arjuna Krutam) – श्री शर्व स्तुतिः (कृष्णार्जुन कृतम्)

कृष्णार्जुनावूचतुः ।
नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च ।
पशूनां पतये नित्यमुग्राय च कपर्दिने ।
महादेवाय भीमाय त्र्यम्बकाय च शान्तये ॥ १ ॥
ईशानाय भगघ्नाय नमोऽस्त्वन्धकघातिने ।
कुमारगुरवे तुभ्यं नीलग्रीवाय वेधसे ॥ २ ॥
पिनाकिने हविष्याय सत्याय विभवे सदा ।
विलोहिताय धूम्राय व्याधाय नपराजिते ॥ ३ ॥
नित्यं नीलशिखण्डाय शूलिने दिव्यचक्षुषे ।
होत्रे पोत्रे त्रिनेत्राय व्याधये वसुरेतसे ॥ ४ ॥
अचिन्त्यायाम्बिकाभर्त्रे सर्वदेवस्तुताय च ।
वृषध्वजाय मुण्डाय जटिने ब्रह्मचारिणे ॥ ५ ॥
तप्यमानाय सलिले ब्रह्मण्यायाजिताय च ।
विश्वात्मने विश्वसृजे विश्वमावृत्य तिष्ठते ॥ ६ ॥
नमो नमस्ते सेव्याय भूतानां प्रभवे सदा ।
ब्रह्मवक्त्राय सर्वाय शङ्कराय शिवाय च ॥ ७ ॥
नमोऽस्तु वाचस्पतये प्रजानां पतये नमः ।
नमो विश्वस्य पतये महतां पतये नमः ॥ ८ ॥
नमः सहस्रशिरसे सहस्रभुजमन्यवे ।
सहस्रनेत्रपादाय नमोऽसङ्ख्येयकर्मणे ॥ ९ ॥
नमो हिरण्यवर्णाय हिरण्यकवचाय च ।
भक्तानुकम्पिने नित्यं सिद्ध्यतां नो वरः प्रभो ॥ १० ॥
इति श्रीमन्महाभारते द्रोणपर्वणि अर्जुनस्वप्नदर्शने अशीतितमोऽध्याये शर्व स्तुतिः ॥
इतर पश्यतु ।
श्री शर्व स्तुतिः (कृष्णार्जुन कृतम्) - परिचय
श्री शर्व स्तुतिः (कृष्णार्जुन कृतम्) भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री शर्व स्तुतिः (कृष्णार्जुन कृतम्) का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. श्री शर्व स्तुतिः (कृष्णार्जुन कृतम्) के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।