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Rati Devi Krita Shiva Stotram – श्री शिव स्तोत्रम् (रतिदेवि कृतम्)

Rati Devi Krita Shiva Stotram – श्री शिव स्तोत्रम् (रतिदेवि कृतम्)
नमश्शिवायास्तु निरामयाय नमश्शिवायास्तु मनोमयाय । नमश्शिवायास्तु सुरार्चिताय तुभ्यं सदा भक्तकृपावराय ॥ १ ॥ नमो भवायास्तु भवोद्भवाय नमोऽस्तु ते ध्वस्तमनोभवाय । नमोऽस्तु ते गूढमहाव्रताय नमस्स्वमायागहनाश्रयाय ॥ २ ॥ नमोऽस्तु शर्वाय नमश्शिवाय नमोऽस्तु सिद्धाय पुरान्तकाय । नमोऽस्तु कालाय नमः कलाय नमोऽस्तु ते ज्ञानवरप्रदाय ॥ ३ ॥ नमोऽस्तु ते कालकलातिगाय नमो निसर्गामलभूषणाय । नमोऽस्त्वमेयान्धकमर्दनाय नमश्शरण्याय नमोऽगुणाय ॥ ४ ॥ नमोऽस्तु ते भीमगुणानुगाय नमोऽस्तु नानाभुवनादिकर्त्रे । नमोऽस्तु नानाजगतां विधात्रे नमोऽस्तु ते चित्रफलप्रयोक्त्रे ॥ ५ ॥ सर्वावसाने ह्यविनाशनेत्रे नमोऽस्तु चित्राध्वरभागभोक्त्रे । नमोऽस्तु कर्मप्रभवस्य धात्रे नमस्स धात्रे भवसङ्गहर्त्रे ॥ ६ ॥ अनन्तरूपाय सदैव तुभ्य- मसह्यकोपाय नमोऽस्तु तुभ्यम् । शशाङ्कचिह्नाय नमोऽस्तु तुभ्य- ममेयमानाय नमोऽस्तु तुभ्यम् ॥ ७ ॥ वृषेन्द्रयानाय पुरान्तकाय नमः प्रसिद्धाय महौषधाय । नमोऽस्तु भक्ताभिमतप्रदाय नमोऽस्तु सर्वार्तिहराय तुभ्यम् ॥ ८ ॥ चराचराचारविचारवर्य- माचार्यमुत्प्रेक्षितभूतसर्गम् । त्वामिन्दुमौलिं शरणं प्रपन्ना प्रियाप्रमेयं महतां महेशम् ॥ ९ ॥ प्रयच्छ मे कामयशस्समृद्धिं पुनः प्रभो जीवतु कामदेवः ॥ वैधव्यहर्त्रे भगवन्नमस्ते प्रियं विना त्वां प्रियजीवितेषु ॥ १० ॥ त्वत्तो परः को भुवनेष्विहास्ति प्रभुः प्रियायाः प्रभवः प्रियाणाम् । त्वमेव चैको भुवनस्य नाथो दयालुरुन्मीलितभक्तभीतिः ॥ ११ ॥ इति श्रीमत्स्यपुराणे रतिदेवीकृत शिवस्तोत्रम् । इतर पश्यतु ।

श्री शिव स्तोत्रम् (रतिदेवि कृतम्) - परिचय

श्री शिव स्तोत्रम् (रतिदेवि कृतम्) भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
  • विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
  • समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
  • भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री शिव स्तोत्रम् (रतिदेवि कृतम्) का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।

2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?

हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।

3. श्री शिव स्तोत्रम् (रतिदेवि कृतम्) के पाठ से क्या फल मिलता है?

इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।