Sri Padmavathi Stotram – श्री पद्मावती स्तोत्रम् (Tiruchanur Devi Stuti)

श्री पद्मावती स्तोत्रम् — परिचय और पौराणिक महत्व (Introduction & Mythology)
श्री पद्मावती देवी (Sri Padmavathi Devi), जिन्हें दक्षिण भारत में प्रेम से 'अलमेलु मंगा' (Alamelu Manga) कहा जाता है, भगवान वेंकटेश्वर (श्रीनिवास) की दिव्य अर्धांगिनी हैं। उनका मुख्य मंदिर तिरुपति के पास तिरुचानूर (Tiruchanur) में स्थित है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, तिरुमला के दर्शन का फल तभी पूर्ण होता है जब भक्त पहले नीचे तिरुचानूर में माँ पद्मावती का आशीर्वाद प्राप्त करें।
प्राकट्य कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर लात मारी, तो वहां निवास करने वाली माँ लक्ष्मी रुष्ट होकर पृथ्वी पर आ गईं (कोल्हापुर)। उनके विरह में भगवान विष्णु भी 'श्रीनिवास' बनकर पृथ्वी पर आए। बाद में, माँ लक्ष्मी ने आकाश राजा (Akasha Raja) के यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लिया।
वे एक स्वर्ण कमल (Golden Lotus) में, 'पद्म सरोवर' नामक तालाब में राजा को मिलीं। कमल (पद्म) में मिलने के कारण उनका नाम 'पद्मावती' रखा गया। यह स्तोत्र उसी दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है जो कमल में वास करती हैं (पद्मासने) और जिनके हाथ में कमल है (पद्महस्ते)।
नक्र-श्रवण नक्षत्र: स्तोत्र के 8वें श्लोक में एक विशेष संदर्भ है — "नक्रश्रवणनक्षत्रे कृतोद्वाहमहोत्सवे"। इसका अर्थ है कि देवी का विवाह भगवान श्रीनिवास के साथ 'उत्तराषाढ़ा' (नक्र) और 'श्रवण' नक्षत्र के संयोग में अत्यंत धूमधाम से संपन्न हुआ था। यह विवाह सृष्टि का सबसे भव्य आयोजन माना जाता है, जिसके लिए कुबेर ने भगवान को ऋण दिया था।
स्तोत्र के लाभ — फलश्रुति (Benefits from Phala Shruti)
माँ पद्मावती को 'दया' (Mercy) की देवी माना जाता है। भगवान वेंकटेश्वर न्याय करते हैं, लेकिन माँ पद्मावती क्षमा करती हैं। इस स्तोत्र के पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- ✦विवाह बाधा निवारण: माँ पद्मावती का विवाह स्वयं भगवान से हुआ था। इसलिए, कुंवारी कन्याएं या युवक यदि इस स्तोत्र का पाठ करें, तो शीघ्र और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है (श्लोक 3 - कल्याणपुरनायिके)।
- ✦अष्ट-ऐश्वर्य प्राप्ति: "अष्टैश्वर्यप्रदे लक्ष्मि" (श्लोक 6) — माँ भक्तों को आठ प्रकार के ऐश्वर्य (धन, धान्य, धैर्य, संतान, विजय, विद्या आदि) प्रदान करती हैं।
- ✦ऋण मुक्ति: चूँकि भगवान वेंकटेश्वर पर कुबेर का ऋण है, इसलिए माँ पद्मावती की आराधना से भक्तों का कर्ज उतरता है और धन के नए स्रोत खुलते हैं।
- ✦पाप नाश: "सर्वपापभयापहे" (श्लोक 6) — यह स्तोत्र समस्त पापों और अज्ञात भय (Anxiety) को नष्ट करके मन को शांति प्रदान करता है।
- ✦मोक्ष और भक्ति: "देहि मे मोक्षसाम्राज्यं" (श्लोक 7) — माँ केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के चरणों की भक्ति और अंत में मोक्ष भी देती हैं।
पूजा विधि और विशेष साधना (Ritual Method)
माँ पद्मावती की साधना के लिए शुक्रवार (Friday) का दिन सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि तिरुचानूर में शुक्रवार को ही देवी का विशेष अभिषेक होता है।
दैनिक और शुक्रवार की विधि
- स्नान और वस्त्र: प्रातः स्नान करके पीले या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
- दीपक: पूजा स्थान पर गाय के घी का दीपक जलाएं।
- पुष्प: माँ को कमल का फूल (Lotus) अति प्रिय है। यदि कमल न मिले तो सुगंधित पीले फूल अर्पित करें।
- नैवेद्य (भोग): माँ को पोंगल (गुड़ और चावल की खीर) या दही-भात का भोग लगाएं। तिरुचानूर में 'दद्धोजनम' (Curd Rice) प्रिय प्रसाद है।
- कुमकुम अर्चना: विवाहित स्त्रियाँ माँ के चित्र या विग्रह पर 'कुमकुम' से अर्चना करें। इससे सौभाग्य (सुहाग) की वृद्धि होती है।
विवाह प्राप्ति प्रयोग
जिनके विवाह में देरी हो रही हो, वे लगातार 11 शुक्रवार तक माँ पद्मावती को 2 कमल के फूल अर्पित करें और इस स्तोत्र का 11 बार पाठ करें। अंतिम शुक्रवार को कन्याओं को भोजन कराएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)