श्री मार्ताण्ड स्तोत्रम् – Sri Martanda Stotram | Surya 5 Verse Prayer

इस स्तोत्र का विशिष्ट महत्व
श्री मार्ताण्ड स्तोत्रम् भगवान सूर्य के मार्ताण्ड रूप की स्तुति में रचित 5 श्लोकों का अद्भुत स्तोत्र है। 'मार्ताण्ड' शब्द 'मृत' (निर्जीव/अविकसित) और 'अण्ड' (अंडा) से मिलकर बना है।
वैदिक कथा के अनुसार, अदिति माता के आठवें पुत्र निर्जीव अंडे के रूप में जन्मे थे। अन्य सात आदित्यों (देवताओं) ने उन्हें आकार और तेज प्रदान किया। इस प्रकार वे मार्ताण्ड (मृत अंडे से जन्मे) कहलाए और आठवें आदित्य बने।
इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि प्रत्येक श्लोक 'सूर्याय तीव्रकिरणाय नमो नमस्ते' (तीव्र किरणों वाले सूर्य को बारंबार नमन) से समाप्त होता है। इसमें सूर्य के विविध नामों और गुणों का वर्णन है — विकर्तन (अंधकार काटने वाले), दिनेश्वर (दिन के स्वामी), ग्रहाधिप (ग्रहों के राजा), और नारायण (विष्णु स्वरूप)।
श्लोकों का भाव और लाभ
श्लोक 1 (अंधकार नाश): गाढ़ अंधकार को हरने वाले, जगत के हितकारी, ज्योतिर्मय, परमेश्वर (शिव) के नेत्र, मन्देह दैत्यों के भुजबल गर्व को तोड़ने वाले, तीव्र किरणों वाले सूर्य को नमस्कार। लाभ: अंधकार (अज्ञान, रोग, शत्रु) का नाश।
श्लोक 2 (विकर्तन): छाया के प्रिय (पत्नी छाया), मणि कुण्डलों से सुशोभित, देवताओं में श्रेष्ठ, कमलों के मित्र (सरसीरुहबान्धव), स्वर्ण-रत्न मुकुट धारी, विकर्तन (अंधकार काटने वाले) सूर्य को नमस्कार। लाभ: सौंदर्य और तेज वृद्धि।
श्लोक 3 (त्रिमूर्ति स्वरूप): संज्ञा पत्नी के हृदय कमल में भ्रमर समान, गौरीश (शिव), पंकजभव (ब्रह्मा), अच्युत (विष्णु) स्वरूप, लोकों के नेत्र, तपन, दिवाकर (दिन बनाने वाले) को नमस्कार। लाभ: त्रिदेवों की कृपा।
श्लोक 4 (ग्रहाधिप): सात अश्वों से जुड़े रथ वाले, ग्रहों के स्वामी, रक्त वस्त्र धारी, शरणागत वत्सल, जाम्बूनद (स्वर्ण) जैसे कमल हाथों वाले, दिनों के ईश्वर को नमस्कार। लाभ: शरण और सुरक्षा।
श्लोक 5 (नारायण स्वरूप): वेदों (आम्नाय) का भार वहन करने वाले, जल देने वाले और जल सोखने वाले, करुणा रूपी अमृत के सागर, नारायण (विष्णु), समस्त देवताओं द्वारा वंदित सूर्य को नमस्कार। लाभ: करुणा और मोक्ष प्राप्ति।
पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
समय: प्रातःकाल सूर्योदय के समय पाठ करना सर्वोत्तम है। यह छोटा स्तोत्र है, केवल 2-3 मिनट में पूर्ण होता है।
दिशा: पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े होकर या बैठकर पाठ करें।
आसन: लाल, पीला या केसरिया रंग का आसन उत्तम है।
जल अर्पण: पाठ के पश्चात् तांबे के पात्र में जल लेकर सूर्य को अर्घ्य दें।
विशेष दिवस: रविवार, रथ सप्तमी, और अधिक मास (मल मास/पुरुषोत्तम मास) में विशेष पुण्य। मार्ताण्ड अधिक मास के देवता हैं।
आवृत्ति: नित्य 1, 3, 5, 7 या 11 बार पाठ करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)