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Sri Mahalakshmi Ashtottara Stuti – श्रीमहालक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तुतिः

Sri Mahalakshmi Ashtottara Stuti – श्रीमहालक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तुतिः

श्रीरामजयम् ।
ॐ सद्गुरुश्रीत्यागराजस्वामिने नमो नमः ।
॥ लक्ष्मी गायत्री ॥ ॐ श्रीरूपायै च विद्महे । शुभदायै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥ ॥ स्तुतिः ॥ ॐ विघ्नेश्वरमहाभाग सर्वलोकनमस्कृत । मयाऽऽरब्धमिदं कर्म निर्विघ्नं कुरु सर्वदा ॥ शुद्धलक्ष्म्यै बुद्धिलक्ष्म्यै वरलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते सौभाग्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १॥ वचोलक्ष्म्यै काव्यलक्ष्म्यै गानलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते श‍ृङ्गारलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २॥ धनलक्ष्म्यै धान्यलक्ष्म्यै धरालक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्तेऽष्टैश्वर्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ३॥ गृहलक्ष्म्यै ग्रामलक्ष्म्यै राज्यलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते साम्राज्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ४॥ शान्तलक्ष्म्यै दान्तलक्ष्म्यै क्षान्तलक्ष्म्यै नमो नमः । नमोऽस्त्वात्मानन्दलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ५॥ सत्यलक्ष्म्यै दयालक्ष्म्यै सौख्यलक्ष्म्यै नमो नमः । नमः पातिव्रत्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ६॥ गजलक्ष्म्यै राजलक्ष्म्यै तेजोलक्ष्म्यै नमो नमः । नमः सर्वोत्कर्षलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ७॥ सत्त्वलक्ष्म्यै तत्त्वलक्ष्म्यै बोधलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते विज्ञानलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ८॥ स्थैर्यलक्ष्म्यै वीर्यलक्ष्म्यै धैर्यलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्तेऽस्त्वौदार्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ९॥ सिद्धिलक्ष्म्यै ऋद्धिलक्ष्म्यै विद्यालक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते कल्याणलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १०॥ कीर्तिलक्ष्म्यै मूर्तिलक्ष्म्यै वर्चोलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते त्वनन्तलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ ११॥ जपलक्ष्म्यै तपोलक्ष्म्यै व्रतलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते वैराग्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १२॥ मन्त्रलक्ष्म्यै तन्त्रलक्ष्म्यै यन्त्रलक्ष्म्यै नमो नमः । नमो गुरुकृपालक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १३॥ सभालक्ष्म्यै प्रभालक्ष्म्यै कलालक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते लावण्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १४॥ वेदलक्ष्म्यै नादलक्ष्म्यै शास्त्रलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते वेदान्तलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १५॥ क्षेत्रलक्ष्म्यै तीर्थलक्ष्म्यै वेदिलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते सन्तानलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १६॥ योगलक्ष्म्यै भोगलक्ष्म्यै यज्ञलक्ष्म्यै नमो नमः । क्षीरार्णवपुण्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १७॥ अन्नलक्ष्म्यै मनोलक्ष्म्यै प्रज्ञालक्ष्म्यै नमो नमः । विष्णुवक्षोभूषलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १८॥ धर्मलक्ष्म्यै अर्थलक्ष्म्यै कामलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते निर्वाणलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १९॥ पुण्यलक्ष्म्यै क्षेमलक्ष्म्यै श्रद्धालक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते चैतन्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २०॥ भूलक्ष्म्यै ते भुवर्लक्ष्म्यै सुवर्लक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते त्रैलोक्यलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २१॥ महालक्ष्म्यै जनलक्ष्म्यै तपोलक्ष्म्यै नमो नमः । नमः सत्यलोकलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २२॥ भावलक्ष्म्यै वृद्धिलक्ष्म्यै भव्यलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते वैकुण्ठलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २३॥ नित्यलक्ष्म्यै सत्यलक्ष्म्यै वंशलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते कैलासलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २४॥ प्रकृतिलक्ष्म्यै श्रीलक्ष्म्यै स्वस्तलक्ष्मै नमो नमः । नमस्ते गोलोकलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २५॥ शक्तिलक्ष्म्यै भक्तिलक्ष्म्यै मुक्तिलक्ष्म्यै नमो नमः । नमस्ते त्रिमूर्तिलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २६॥ नमश्चक्रराजलक्ष्म्यै आदिलक्ष्म्यै नमो नमः । नमो ब्रह्मानन्दलक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ २७॥ ॥ नामार्पणम् ॥ ॐ कनकलक्ष्म्यै नमः । उद्योगलक्ष्म्यै नमः । सर्वाभीष्टफलप्रदायै नमः । ॥ इति श्रीमहालक्ष्मीस्तुतिः समाप्ता ॥

महालक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तुति: परिचय एवं महत्व

श्रीमहालक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तुति उन साधकों के लिए एक दिव्य वरदान है जो माँ लक्ष्मी को केवल एक ऐश्वर्य दायिनी देवी के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने जीवन के प्रत्येक आयाम — विद्या, तंत्र, राज्य, और मोक्ष — के अधिष्ठात्री के रूप में देखते हैं। यह स्तुति 108 ऐसे स्वरूपों का वर्णन करती है जो हमारे दैनिक जीवन में घटित होने वाली हर महत्वपूर्ण परिस्थिति को नियंत्रित करते हैं।

यह स्तुति इस सत्य को स्थापित करती है कि लक्ष्मी तत्व सर्वव्यापी है। श्लोक 4 में 'साम्राज्यलक्ष्मी' का वर्णन और श्लोक 19 में 'निर्वाणलक्ष्मी' का उल्लेख यह स्पष्ट करता है कि माँ का कृपा क्षेत्र भौतिक सफलता से लेकर आध्यात्मिक मुक्ति तक फैला हुआ है। जो साधक इस स्तुति का नित्य पाठ करते हैं, उनके जीवन में 'अष्ट लक्ष्मी' की कृपा का वास होता है, जिससे वे भौतिक और आध्यात्मिक रूप से पूर्ण बनते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. यह 'अष्टोत्तर शतनाम स्तुति' सामान्य 108 नामों से कैसे भिन्न है?

सामान्य नामावली में केवल नाम होते हैं, जबकि इस स्तुति में प्रत्येक नाम के साथ लयात्मक श्लोक हैं, जो इसे अत्यंत प्रभावशाली और गेय बनाते हैं।

2. क्या इस स्तोत्र में तंत्र और यंत्र का उल्लेख है?

हाँ, श्लोक 13 में माँ को 'मन्त्रलक्ष्म्यै', 'तन्त्रलक्ष्म्यै' और 'यन्त्रलक्ष्म्यै' कहा गया है, जो उनकी तांत्रिक शक्तियों की पूर्णता को दर्शाता है।

3. क्या यह स्तोत्र नौकरी और पदोन्नति के लिए सहायक है?

हाँ, श्लोक 4 में 'राज्यलक्ष्म्यै' और 'साम्राज्यलक्ष्म्यै' का स्मरण किया गया है, जो प्रशासनिक पद, सत्ता और उच्च सफलता के लिए अत्यंत शक्तिशाली है।

4. श्लोक 19 में 'निर्वाणलक्ष्म्यै' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है 'मोक्ष देने वाली लक्ष्मी'। यह स्तोत्र स्पष्ट करता है कि माँ केवल धन ही नहीं, बल्कि साधक को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति भी प्रदान करती हैं।