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Sri Lakshmi Ashtottara Shatanama Stotram 2 – श्री लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् २

Sri Lakshmi Ashtottara Shatanama Stotram 2 – श्री लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् २
श्रीर्लक्ष्मी कमला देवी मा पद्मा कमलालया । पद्मेस्थिता पद्मवर्णा पद्मिनी मणिपङ्कजा ॥ १ पद्मप्रिया नित्यपुष्टा ह्युदारा पद्ममालिनी । हिरण्यवर्णा हरिणी ह्यर्घ्या चन्द्रा हिरण्मयी ॥ २ आदित्यवर्णाऽश्वपूर्वा हस्तिनादप्रबोधिनी । रथमध्या देवजुष्टा सुवर्णरजतस्रजा ॥ ३ गन्धध्वारा दुराधर्षा तर्पयन्ती करीषिणी । पिङ्गला सर्वभूतानां ईश्वरी हेममालिनी ॥ ४ कांसोस्मिता पुष्करिणी ज्वलन्त्यनपगामिनी । सूर्या सुपर्णा माता च विष्णुपत्नी हरिप्रिया ॥ ५ आर्द्रा यः करिणी गङ्गा वैष्णवी हरिवल्लभा । श्रयणीया च हैरण्यप्राकारा नलिनालया ॥ ६ विश्वप्रिया महादेवी महालक्ष्मी वरा रमा । पद्मालया पद्महस्ता पद्मा गन्धर्वसेविता ॥ ७ आयासहारिणी दिव्या श्रीदेवी चन्द्रसोदरी । वरारोहा भृगुसुता लोकमाताऽमृतोद्भवा ॥ ८ सिन्धुजा शार्‍ङ्गिणी सीता मुकुन्दमहिषीन्दिरा । विरिञ्चिजननी धात्री शाश्वता देवपूजिता ॥ ९ दुग्धा वैरोचनी गौरी माधव्यच्युतवल्लभा । नारायणी राज्यलक्ष्मीः मोहिनी सुरसुन्दरी ॥ १० सुरेशसेव्या सावित्री सम्पूर्णायुष्करी सती । सर्वदुःखहरारोग्यकारिणी सत्कलत्रिका ॥ ११ सम्पत्करी जयित्री च सत्सन्तानप्रदेष्टदा । विष्णुवक्षःस्थलावासा वाराही वारणार्चिता ॥ १२ धर्मज्ञा सत्यसङ्कल्पा सच्चिदानन्दविग्रहा । धर्मदा धनदा सर्वकामदा मोक्षदायिनी ॥ १३ सर्वशत्रुक्षयकरी सर्वाभीष्टफलप्रदा ॥ १४ ॥ इति श्रीलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् २ सम्पूर्णम् ॥

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र २: परिचय और महत्व

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र २ माँ लक्ष्मी के 108 दिव्य नामों का एक विशिष्ट संग्रह है। 108 की संख्या हिंदू धर्म में ब्रह्मांडीय पूर्णता का प्रतीक है। यह स्तोत्र माँ लक्ष्मी के विभिन्न पहलुओं - करुणा, ऐश्वर्य, सौंदर्य और शक्ति - का वर्णन करता है।

यह पाठ विशेष रूप से उन साधकों के लिए लाभकारी है जो जीवन में स्थिरता और शांति की तलाश में हैं। जहाँ अन्य स्तोत्र उग्र साधना के लिए होते हैं, वहीं यह स्तोत्र अपनी सरलता और सौम्यता के लिए प्रसिद्ध है। इसे प्रतिदिन पढ़ने से मन को शांति और घर को समृद्धि प्राप्त होती है।

स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व

इस स्तोत्र में माँ लक्ष्मी को 'धर्मदा', 'धनदा' और 'मोक्षदायिनी' (श्लोक 13) कहा गया है। इसका अर्थ है कि वह न केवल भौतिक धन देती हैं, बल्कि धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और अंत में मोक्ष भी प्रदान करती हैं।

श्लोक 12 में उन्हें 'वाराही' (शक्ति स्वरूप) कहा गया है, जो यह दर्शाता है कि लक्ष्मी केवल धन ही नहीं, बल्कि बुरी शक्तियों से रक्षा करने वाली भी हैं। यह पाठ शत्रुओं का नाश करने वाला (सर्वशत्रुक्षयकरी) और सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला (सर्वाभीष्टफलप्रदा) है।

स्तोत्र पाठ के लाभ (फलश्रुति)

  • आर्थिक उन्नति: नियमित पाठ से आय के नए स्रोत खुलते हैं और रुका हुआ धन प्राप्त होता है।
  • रोग निवारण: यह 'आरोग्यकारिणी' है, अर्थात यह शारीरिक कष्टों को दूर कर अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है।
  • शत्रु नाश: यह 'सर्वशत्रुक्षयकरी' है, जो ज्ञात और अज्ञात दोनों प्रकार के शत्रुओं से साधक की रक्षा करता है।
  • संतान सुख: 'सत्सन्तानप्रदेष्टदा' होने के कारण यह नि:संतान दंपत्तियों के लिए भी वरदान स्वरूप है।

पाठ करने की विधि

सर्वोत्तम फल प्राप्ति के लिए इन नियमों का पालन करें:
  1. स्नान और शुद्धि: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
  2. दीपक प्रज्वलन: माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
  3. नैवेद्य: माँ को लाल फूल (कमल या गुलाब) और कुछ मिष्ठान (खीर या बताशे) अर्पित करें।
  4. एकाग्रता: पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ स्तोत्र का पाठ करें। उच्चारण स्पष्ट रखें।
  5. आरती: पाठ के अंत में लक्ष्मी जी की आरती अवश्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र 2 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस स्तोत्र का मुख्य उद्देश्य माँ लक्ष्मी के 108 नामों के माध्यम से उनकी स्तुति करना है, ताकि जीवन में धन, स्वास्थ्य, संतान सुख और शत्रु बाधा से मुक्ति प्राप्त हो सके।

  1. इस पाठ को करने में कितना समय लगता है?

यह स्तोत्र मध्यम आकार का है। इसे पढ़ने में सामान्यतः 5 से 7 मिनट का समय लगता है। इसे नित्य पूजा में आसानी से शामिल किया जा सकता है।

  1. क्या इसे शाम के समय पढ़ा जा सकता है?

जी हाँ, गोधूलि बेला (सूर्यास्त का समय) लक्ष्मी पूजा और पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आप इसे सुबह या शाम, दोनों समय अपनी सुविधानुसार पढ़ सकते हैं।

  1. कितने दिनों तक पाठ करने से फल मिलता है?

श्रद्धा और विश्वास सर्वोपरि है। फिर भी, शास्त्रों में 41 दिनों (एक मंडल) या 11 शुक्रवार तक संकल्प लेकर नियमित पाठ करने का विधान है।

  1. क्या संस्कृत न जानने वाला व्यक्ति हिंदी अनुवाद ही पढ़ सकता है?

स्तोत्र का मूल प्रभाव संस्कृत श्लोकों की ध्वनि तरंगों में होता है। यदि संस्कृत पढ़ने में कठिनाई हो, तो आप सुन सकते हैं (श्रवण) या धीरे-धीरे सीखने का प्रयास करें। तब तक हिंदी भावार्थ पढ़कर मानसिक आराधना कर सकते हैं।