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Sri Kamala Ashtottara Shatanama Stotram – श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

Sri Kamala Ashtottara Shatanama Stotram – श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्
॥ श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् ॥ (श्री शिव उवाच) श्री शिव उवाच । शतमष्टोत्तरं नाम्नां कमलाया वरानने । प्रवक्ष्याम्यतिगुह्यं हि न कदापि प्रकाशयेत् ॥ १ ॥ ओं महामाया महालक्ष्मीर्महावाणी महेश्वरी । महादेवी महारात्रिर्महिषासुरमर्दिनी ॥ २ ॥ कालरात्रिः कुहूः पूर्णानन्दाद्या भद्रिका निशा । जया रिक्ता महाशक्तिर्देवमाता कृशोदरी ॥ ३ ॥ शचीन्द्राणी शक्रनुता शङ्करप्रियवल्लभा । महावराहजननी मदनोन्मथिनी मही ॥ ४ ॥ वैकुण्ठनाथरमणी विष्णुवक्षःस्थलस्थिता । विश्वेश्वरी विश्वमाता वरदाऽभयदा शिवा ॥ ५ ॥ शूलिनी चक्रिणी मा च पाशिनी शङ्खधारिणी । गदिनी मुण्डमाला च कमला करुणालया ॥ ६ ॥ पद्माक्षधारिणी ह्यम्बा महाविष्णुप्रियङ्करी । गोलोकनाथरमणी गोलोकेश्वरपूजिता ॥ ७ ॥ गया गङ्गा च यमुना गोमती गरुडासना । गण्डकी सरयूस्तापी रेवा चैव पयस्विनी ॥ ८ ॥ नर्मदा चैव कावेरी केदारस्थलवासिनी । किशोरी केशवनुता महेन्द्रपरिवन्दिता ॥ ९ ॥ ब्रह्मादिदेवनिर्माणकारिणी वेदपूजिता । कोटिब्रह्माण्डमध्यस्था कोटिब्रह्माण्डकारिणी ॥ १० ॥ श्रुतिरूपा श्रुतिकरी श्रुतिस्मृतिपरायणा । इन्दिरा सिन्धुतनया मातङ्गी लोकमातृका ॥ ११ ॥ त्रिलोकजननी तन्त्रा तन्त्रमन्त्रस्वरूपिणी । तरुणी च तमोहन्त्री मङ्गला मङ्गलायना ॥ १२ ॥ मधुकैटभमथनी शुम्भासुरविनाशिनी । निशुम्भादिहरा माता हरिशङ्करपूजिता ॥ १३ ॥ सर्वदेवमयी सर्वा शरणागतपालिनी । शरण्या शम्भुवनिता सिन्धुतीरनिवासिनी ॥ १४ ॥ गन्धर्वगानरसिका गीता गोविन्दवल्लभा । त्रैलोक्यपालिनी तत्त्वरूपा तारुण्यपूरिता ॥ १५ ॥ चन्द्रावली चन्द्रमुखी चन्द्रिका चन्द्रपूजिता । चन्द्रा शशाङ्कभगिनी गीतवाद्यपरायणा ॥ १६ ॥ सृष्टिरूपा सृष्टिकरी सृष्टिसंहारकारिणी । इति ते कथितं देवि रमानामशताष्टकम् ॥ १७ ॥ ॥ फलश्रुति ॥ त्रिसन्ध्यं प्रयतो भूत्वा पठेदेतत्समाहितः । यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोत्यसंशयम् ॥ १८ ॥ इमं स्तवं यः पठतीह मर्त्यो वैकुण्ठपत्न्याः परमादरेण । धनाधिपाद्यैः परिवन्दितः स्यात् प्रयास्यति श्रीपदमन्तकाले ॥ १९ ॥ ॥ इति श्रीकमला अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् — परिचय (Introduction)

श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् (Sri Kamala Ashtottara Shatanama Stotram) दश महाविद्याओं की दसवीं शक्ति, माँ कमला की साधना का एक 'मुकुट-मणि' (Crown Jewel) है। यह स्तोत्र भगवान शिव और पार्वती के संवाद (आगम तंत्र) से उद्धृत है। इसमें देवी के १०८ सिद्ध नामों का वर्णन है जो साधक की चेतना को भौतिक दरिद्रता से ऊपर उठाकर 'राज-सुख' (Royal Comfort) की ओर ले जाते हैं।

तांत्रिक लक्ष्मी बनाम पौराणिक लक्ष्मी: प्रायः लोग कमला और लक्ष्मी को एक ही मानते हैं। तत्वतः वे एक हैं, किन्तु स्वरूप में भिन्न हैं:

  • पौराणिक लक्ष्मी: भगवान विष्णु के चरण दबाती हुई, शांत, पालनकर्ता, और सात्विक हैं।
  • तांत्रिक कमला: गजारूढ़ा, स्वतंत्र ईश्वरी, 'साम्राज्य-दायिनी' और सृष्टि-संहार कारिणी (श्लोक १७ — सृष्टिसंहारकारिणी) हैं। वे केवल धन नहीं देतीं, वे 'सत्ता' (Power) और 'प्रभुत्व' (Authority) देती हैं।

यह स्तोत्र 'चंचला' लक्ष्मी को 'स्थिर' करता है। जो धन आकर चला जाता है, वह इस पाठ से टिकने लगता है। इसे 'दारिद्र्य-भंजन-स्तोत्र' भी कहा जा सकता है क्योंकि इसके नाम-मंत्र (जैसे दरिद्र-ध्वंसिनी, धनदा आदि) सीधे गरीबी के प्रारब्ध को काटते हैं।

स्तोत्र का विशिष्ट महत्व (Significance)

इस स्तोत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'त्रिगुणात्मक' स्वरूप है। इसमें देवी को महाकाली ( महारात्रि, कालरात्रि - श्लोक २-३), महालक्ष्मी (कमला, इन्दिरा) और महासरस्वती (महावाणी, वेदपूजिता) तीनों रूपों में नमन किया गया है।

गोलोक और पृथ्वी का सेतु: श्लोक ७ में देवी को "गोलोकनाथरमणी" कहा गया है। यह अद्भुत है क्योंकि 'गोलोक' वैष्णव धर्म का सर्वोच्च धाम है और 'कमला' शाक्त तंत्र की देवी हैं। यह स्तोत्र सिद्ध करता है कि कृष्ण की राधा ही तंत्र की कमला हैं। यह साधना प्रेम और धन का दुर्लभ संयोग बनाती है।

पंच-तत्व शुद्धि: स्तोत्र में गंगा, यमुना, रेवा आदि नदियों का आह्वान (श्लोक ८-९) शरीर के पंच-तत्वों को शुद्ध करने के लिए है। बिना शरीर शुद्धि के लक्ष्मी नहीं ठहरतीं। यह स्तोत्र पाठ मात्र से आंतरिक स्नान (Internal Absolution) करा देता है।

पाठ के लाभ — फलश्रुति (Benefits)

भगवान शिव ने स्वयं अंतिम श्लोकों (१८-१९) में इसकी फलश्रुति बताई है:

  • सर्व-मनोकामना पूर्ति: "यं यं कामयते कामं" — साधक जिस भी कामना (धन, पुत्र, यश) का संकल्प लेकर पाठ करता है, वह निश्चित ही पूर्ण होती है। इसमें 'संशय' (Doubt) के लिए कोई स्थान नहीं है।
  • कुबेर तुल्य धन: "धनाधिपाद्यैः परिवन्दितः स्यात्" — साधक केवल धनवान नहीं बनता, बल्कि धन के देवता (कुबेर आदि) भी उसका सम्मान करते हैं। अर्थात, उसे 'अखंड ऐश्वर्य' प्राप्त होता है।
  • वैकुण्ठ प्राप्ति: यह भोग और मोक्ष दोनों देती है। अंत समय में साधक 'श्रीपद' (विष्णु लोक/मोक्ष) को प्राप्त करता है।
  • शत्रु और ऋण नाश: 'महिषासुरमर्दिनी' और 'शुम्भासुरविनाशिनी' (श्लोक २, १३) नाम शत्रुओं और कर्ज रूपी राक्षसों का संहार करते हैं।

पाठ विधि और विशेष अवसर (Ritual Method)

सामान्य विधि

  • स्नान और वस्त्र: शुद्ध होकर गुलाबी या लाल वस्त्र धारण करें।
  • आसन: ऊनी कम्बल या लाल मखमली आसन सर्वश्रेष्ठ है।
  • दीपक: गाय के घी का दीपक (बाएं हाथ की ओर) जलाएं। यदि संभव हो, तो कमल गट्टे की माला से 108 बार "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जाप करें, फिर स्तोत्र पढ़ें।

विशेष सिद्धि विधि (शुक्रवार/दीपावली)

शुक्रवार की रात (9 बजे के बाद) माँ कमला या श्रीयंत्र के सामने 108 कमल के फूल (या लाल गुलाब) रखें। स्तोत्र के एक-एक नाम का उच्चारण करते हुए (जैसे "ॐ महामायायै नमः", "ॐ महालक्ष्म्यै नमः") एक-एक फूल अर्पित करें। इसे 'पुष्पांजलि' कहते हैं। यह दरिद्रता नाश का 'अमोघ अस्त्र' है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. कमला और महालक्ष्मी में तात्विक अंतर क्या है?

यद्यपि दोनों एक ही शक्ति हैं, परन्तु उपासना में अंतर है। 'महालक्ष्मी' (पौराणिक) पालनकर्ता विष्णु की शक्ति हैं जो धर्मानुसार धन देती हैं। 'कमला' (तांत्रिक) दश महाविद्याओं में आती हैं और वे 'मोक्ष' और 'भोग' दोनों की उग्र शक्ति हैं। कमला साधना में 'स्थिरता' (Stability) प्रधान है।

2. इस स्तोत्र को 'सिद्ध-विद्या' क्यों कहते हैं?

क्योंकि यह स्तोत्र भगवान शिव द्वारा रचित है (श्री शिव उवाच) और इसमें 'गोपनीय' (Gupta) रहने का निर्देश है। जो साधक इसे केवल पढ़ता भी है, उसकी वाणी और बुद्धि 'सिद्ध' हो जाती है।

3. क्या कर्ज (Debt) मुक्ति के लिए यह प्रभावी है?

अत्यंत प्रभावी। इसमें देवी को 'दारिद्र्य-दुःख-शमनी' (Poverty destroyer) कहा गया है। शुक्रवार की मध्यरात्रि में कमल पुष्प से अर्चन करने पर पुराने से पुराना कर्ज भी उतरने लगता है।

4. क्या गृहस्थ लोग इसका पाठ कर सकते हैं?

हाँ, दश महाविद्याओं में कमला सबसे 'सौम्य' (Gentle) मानी जाती हैं। गृहस्थों के लिए यह सबसे सुरक्षित और फलदायी साधना है। इसमें किसी विशेष कठोर नियम की आवश्यकता नहीं होती, केवल पवित्रता ज़रूरी है।

5. पाठ का सही समय (Timing) क्या है?

तांत्रिक साधना में 'निशीथ काल' (मध्यरात्रि) उत्तम है। परन्तु गृहस्थ इसे सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या शाम को गोधूलि वेला में (सूर्यास्त के समय) भी पढ़ सकते हैं।

6. इसमें ‘महारात्रि’ और ‘कालरात्रि’ नाम क्यों हैं?

ये नाम देवी के 'प्रलयंकारी' और 'कालातीत' स्वरूप को दर्शाते हैं। कमला केवल धन नहीं, बल्कि 'समय' (Time) और 'मृत्यु' की भी स्वामिनी हैं। वे अकाल मृत्यु का भय दूर करती हैं।

7. क्या विशेष नैवेद्य (Offerings) चढ़ाना चाहिए?

माँ कमला को 'खीर' (Rice Pudding), बताशे, मखाने और कमल का फूल (Pink Lotus) अत्यंत प्रिय है। अनार (Pomegranate) का फल भी चढ़ाया जा सकता है।

8. क्या इसे बिना गुरु दीक्षा के पढ़ सकते हैं?

स्तोत्र और नाम-जप (Namavali) बिना दीक्षा के भी किए जा सकते हैं। कवच और बीज-मंत्र (Seed Mantra) के लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य होती है।

9. फलश्रुति में 'तीर्थ-स्नान' का जिक्र क्यों है?

श्लोक ८ और ९ में गंगा, यमुना, रेवा आदि नदियों का नाम है। यह बताता है कि इस स्तोत्र का पाठ 'मानसिक तीर्थ स्नान' के समान पवित्र है। यह शरीर और मन के पापों को धो देता है।

10. 'गोलोकनाथरमणी' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है 'गोलोक के स्वामी श्री कृष्ण की प्रिया'। यह दर्शाता है कि तंत्र की कमला ही वैष्णव धर्म की राधा/लक्ष्मी हैं। यह शैव और वैष्णव मत का समन्वय है।