Sri Kamala Ashtottara Shatanama Stotram – श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् — परिचय (Introduction)
श्री कमला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् (Sri Kamala Ashtottara Shatanama Stotram) दश महाविद्याओं की दसवीं शक्ति, माँ कमला की साधना का एक 'मुकुट-मणि' (Crown Jewel) है। यह स्तोत्र भगवान शिव और पार्वती के संवाद (आगम तंत्र) से उद्धृत है। इसमें देवी के १०८ सिद्ध नामों का वर्णन है जो साधक की चेतना को भौतिक दरिद्रता से ऊपर उठाकर 'राज-सुख' (Royal Comfort) की ओर ले जाते हैं।
तांत्रिक लक्ष्मी बनाम पौराणिक लक्ष्मी: प्रायः लोग कमला और लक्ष्मी को एक ही मानते हैं। तत्वतः वे एक हैं, किन्तु स्वरूप में भिन्न हैं:
- पौराणिक लक्ष्मी: भगवान विष्णु के चरण दबाती हुई, शांत, पालनकर्ता, और सात्विक हैं।
- तांत्रिक कमला: गजारूढ़ा, स्वतंत्र ईश्वरी, 'साम्राज्य-दायिनी' और सृष्टि-संहार कारिणी (श्लोक १७ — सृष्टिसंहारकारिणी) हैं। वे केवल धन नहीं देतीं, वे 'सत्ता' (Power) और 'प्रभुत्व' (Authority) देती हैं।
यह स्तोत्र 'चंचला' लक्ष्मी को 'स्थिर' करता है। जो धन आकर चला जाता है, वह इस पाठ से टिकने लगता है। इसे 'दारिद्र्य-भंजन-स्तोत्र' भी कहा जा सकता है क्योंकि इसके नाम-मंत्र (जैसे दरिद्र-ध्वंसिनी, धनदा आदि) सीधे गरीबी के प्रारब्ध को काटते हैं।
स्तोत्र का विशिष्ट महत्व (Significance)
इस स्तोत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'त्रिगुणात्मक' स्वरूप है। इसमें देवी को महाकाली ( महारात्रि, कालरात्रि - श्लोक २-३), महालक्ष्मी (कमला, इन्दिरा) और महासरस्वती (महावाणी, वेदपूजिता) तीनों रूपों में नमन किया गया है।
गोलोक और पृथ्वी का सेतु: श्लोक ७ में देवी को "गोलोकनाथरमणी" कहा गया है। यह अद्भुत है क्योंकि 'गोलोक' वैष्णव धर्म का सर्वोच्च धाम है और 'कमला' शाक्त तंत्र की देवी हैं। यह स्तोत्र सिद्ध करता है कि कृष्ण की राधा ही तंत्र की कमला हैं। यह साधना प्रेम और धन का दुर्लभ संयोग बनाती है।
पंच-तत्व शुद्धि: स्तोत्र में गंगा, यमुना, रेवा आदि नदियों का आह्वान (श्लोक ८-९) शरीर के पंच-तत्वों को शुद्ध करने के लिए है। बिना शरीर शुद्धि के लक्ष्मी नहीं ठहरतीं। यह स्तोत्र पाठ मात्र से आंतरिक स्नान (Internal Absolution) करा देता है।
पाठ के लाभ — फलश्रुति (Benefits)
भगवान शिव ने स्वयं अंतिम श्लोकों (१८-१९) में इसकी फलश्रुति बताई है:
- ✦सर्व-मनोकामना पूर्ति: "यं यं कामयते कामं" — साधक जिस भी कामना (धन, पुत्र, यश) का संकल्प लेकर पाठ करता है, वह निश्चित ही पूर्ण होती है। इसमें 'संशय' (Doubt) के लिए कोई स्थान नहीं है।
- ✦कुबेर तुल्य धन: "धनाधिपाद्यैः परिवन्दितः स्यात्" — साधक केवल धनवान नहीं बनता, बल्कि धन के देवता (कुबेर आदि) भी उसका सम्मान करते हैं। अर्थात, उसे 'अखंड ऐश्वर्य' प्राप्त होता है।
- ✦वैकुण्ठ प्राप्ति: यह भोग और मोक्ष दोनों देती है। अंत समय में साधक 'श्रीपद' (विष्णु लोक/मोक्ष) को प्राप्त करता है।
- ✦शत्रु और ऋण नाश: 'महिषासुरमर्दिनी' और 'शुम्भासुरविनाशिनी' (श्लोक २, १३) नाम शत्रुओं और कर्ज रूपी राक्षसों का संहार करते हैं।
पाठ विधि और विशेष अवसर (Ritual Method)
सामान्य विधि
- स्नान और वस्त्र: शुद्ध होकर गुलाबी या लाल वस्त्र धारण करें।
- आसन: ऊनी कम्बल या लाल मखमली आसन सर्वश्रेष्ठ है।
- दीपक: गाय के घी का दीपक (बाएं हाथ की ओर) जलाएं। यदि संभव हो, तो कमल गट्टे की माला से 108 बार "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जाप करें, फिर स्तोत्र पढ़ें।
विशेष सिद्धि विधि (शुक्रवार/दीपावली)
शुक्रवार की रात (9 बजे के बाद) माँ कमला या श्रीयंत्र के सामने 108 कमल के फूल (या लाल गुलाब) रखें। स्तोत्र के एक-एक नाम का उच्चारण करते हुए (जैसे "ॐ महामायायै नमः", "ॐ महालक्ष्म्यै नमः") एक-एक फूल अर्पित करें। इसे 'पुष्पांजलि' कहते हैं। यह दरिद्रता नाश का 'अमोघ अस्त्र' है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)