श्री गणेश मूलमन्त्रपदमाला स्तोत्रम् (Sri Ganesha Moola Mantra Pada Mala Stotram)
Sri Ganesha Moola Mantra Pada Mala Stotram

प्रस्तावना (Introduction)
श्री गणेश मूलमंत्र पदमाला स्तोत्रम् (Sri Ganesha Moola Mantra Pada Mala Stotram) की रचना श्रीविद्या के महान आचार्य श्री अनन्तानन्दनाथ (Sri Anantanandanatha) द्वारा की गई है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह स्तोत्र भगवान गणेश के "मूल मंत्र" (Moola Mantra) के "पदों" (शब्दों) की एक "माला" (Garland) है।
इस अनूठे स्तोत्र में 15 श्लोक हैं। प्रत्येक श्लोक गणेश जी के 28-अक्षरों वाले मूल मंत्र के एक विशिष्ट भाग की व्याख्या और स्तुति करता है। यह मंत्र-साधना और भक्ति का एक सुंदर समन्वय है।
मूल मंत्र का रहस्य (The Secret of Moola Mantra)
यह स्तोत्र जिस मूल मंत्र पर आधारित है, वह है:
"ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा"
कवि ने इसके बीजाक्षरों (Seed Syllables) का अत्यंत सुंदर वर्णन किया है:
- 1. श्रीं (Shrim):लक्ष्मी बीज। यह श्रम, दुःख, जन्म-मरण और व्याधियों का नाश करने वाला है (श्लोक 2)।
- 2. ह्रीं (Hrim):माया/शक्ति बीज। हृदय त्रिकोण में स्थित, जगत प्रकाशक और उमा (शक्ति) का रूप है (श्लोक 3)।
- 3. क्लीं (Klim):काम बीज। यह सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला (सर्वेष्टदं) और श्री कृष्ण का प्रिय बीज है (श्लोक 4)।
- 4. ग्लौं (Glaum):पृथ्वी/स्तम्भन बीज। यह विघ्नों को रोकने वाला और सर्व-आकर्षण की शक्ति रखता है (श्लोक 5)।
पाठ के लाभ (Benefits)
सर्वजन वशीकरण: "सर्वजनं मे वशमानय" के मंत्र-पद के जप से साधक में जबरदस्त आकर्षण शक्ति (Charisma) उत्पन्न होती है और सब उसके अनुकूल हो जाते हैं।
समस्त क्लेश निवारण: यह स्तोत्र जन्म, मृत्यु, रोग और दरिद्रता के भय का नाश करता है (श्लोक 2)।
चिदानन्द प्राप्ति: यह केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि "अजर-स्वात्मा-अवबोध" (Self-realization) और परम आनंद (Chidananda) प्रदान करता है (श्लोक 15)।
प्रश्नोत्तरी (FAQ)