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Sankata Nashana Ganesha Stotram (Deva Krutam) - The Divine Prayer for Relief

Sankata Nashana Ganesha Stotram (Deva Krutam)

Sankata Nashana Ganesha Stotram (Deva Krutam) - The Divine Prayer for Relief
॥ सङ्कटनाशन गणेश स्तोत्रम् (देव कृतम्) ॥ नमो नमस्ते परमार्थरूप नमो नमस्तेऽखिलकारणाय । नमो नमस्तेऽखिलकारकाय सर्वेन्द्रियाणामधिवासिनेऽपि ॥ १ ॥ नमो नमो भूतमयाय तेऽस्तु नमो नमो भूतकृते सुरेश । नमो नमः सर्वधियां प्रबोध नमो नमो विश्वलयोद्भवाय ॥ २ ॥ नमो नमो विश्वभृतेऽखिलेश नमो नमः कारण कारणाय । नमो नमो वेदविदामदृश्य नमो नमः सर्ववरप्रदाय ॥ ३ ॥ नमो नमो वागविचारभूत नमो नमो विघ्ननिवारणाय । नमो नमोऽभक्त मनोरथघ्ने नमो नमो भक्त मनोरथज्ञ ॥ ४ ॥ नमो नमो भक्तमनोरथेश नमो नमो विश्वविधानदक्ष । नमो नमो दैत्यविनाशहेतो नमो नमः सङ्कटनाशकाय ॥ ५ ॥ नमो नमः कारुणिकोत्तमाय नमो नमो ज्ञानमयाय तेऽस्तु । नमो नमोऽज्ञानविनाशनाय नमो नमो भक्त विभूतिदाय ॥ ६ ॥ नमो नमोऽभक्त विभूतिहन्त्रे नमो नमो भक्त विमोचनाय । नमो नमोऽभक्त विबन्धनाय नमो नमस्ते प्रविभक्तमूर्ते ॥ ७ ॥ नमो नमस्तत्त्वविबोधकाय नमो नमस्तत्त्वविदुत्तमाय । नमो नमस्तेऽखिल कर्मसाक्षिणे नमो नमस्ते गुणनायकाय ॥ ८ ॥ इति श्रीगणेशपुराणे उपासनाखण्डे चत्वारिंशोऽध्याये देवकृत सङ्कष्टनाशन गणेश सोत्रं सम्पूर्णम् ॥

स्तोत्र परिचय (Introduction)

सङ्कटनाशन गणेश स्तोत्रम् (देव कृतम्) एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली स्तुति है।
यह प्रसिद्ध 'नारद कृत' स्तोत्र (प्रणम्य शिरसा देवं) से भिन्न है। यह गणेश पुराण (उपासना खण्ड, अध्याय 40) में वर्णित है, जहाँ स्वयं देवताओं (इन्द्र आदि) ने भीषण संकट के समय इस स्तोत्र द्वारा गणेश जी की आराधना की थी।

महत्व एवं अर्थ (Significance)

  • परमार्थ-रूप (Paramartha-Rupa): श्लोक 1 में उन्हें 'परमार्थ' कहा गया है, अर्थात वे केवल एक देवता नहीं, बल्कि 'परम सत्य' (Ultimate Reality) हैं।
  • अखिल-कारक (Akhila-Karaka): वे ही समस्त जगत के कर्ताहर्ता और सभी कारणों के कारण (Cause of all causes) हैं।
  • कारुणिकोत्तम (Karunikottama): श्लोक 6 में उन्हें 'दयालुओ में श्रेष्ठ' कहा गया है। उनकी करुणा का कोई ओर-छोर नहीं है।

लाभ (Benefits)

इस स्तोत्र का पाठ विशेषतः 'संकट' के समय किया जाता है:
  • संकट नाश: "नमो नमः सङ्कटनाशकाय" - यह स्तोत्र जीवन के गहरे से गहरे संकटों (Deep Crisis) को जड़ से समाप्त कर देता है।
  • शत्रु दमन: श्लोक 7 के अनुसार, यह अभक्तों (शत्रुओं/दुष्टों) की विभूति (शक्ति) का नाश करता है और भक्तों को बंधन मुक्त करता है।
  • मनोरथ सिद्धि: "भक्त मनोरथज्ञ" - वे अपने भक्तों की इच्छाओं को बिना कहे ही जान लेते हैं और पूर्ण करते हैं।

प्रश्नोत्तरी (FAQ)

यह स्तोत्र 'नारद कृत' से कैसे अलग है?

प्रचलित "प्रणम्य शिरसा देवं" नारद जी द्वारा रचित है। यह स्तोत्र ("नमो नमस्ते परमार्थरूप") देवताओं द्वारा रचित है और गणेश पुराण में आता है। यह अधिक दार्शनिक और उग्र संकटों के लिए है।

इसका मूल स्रोत क्या है?

यह गणेश पुराण के उपासना खण्ड के 40वें अध्याय से लिया गया है।

"परमार्थ-रूप" का क्या अर्थ है?

श्लोक 1 में उन्हें 'परमार्थ-रूप' कहा गया है। इसका अर्थ है वही एकमात्र 'परम सत्य' और 'अंतिम वास्तविकता' (Supreme Brahman) हैं।

"अखिल-कारण" क्यों कहा गया है?

क्योंकि संसार में जो भी घटित हो रहा है, उसका मूल कारण वही हैं। वे उत्पत्ति, पालन और लय के उद्भव स्थान हैं।

"संकट नाशक" किसे कहा गया है?

श्लोक 5 में स्पष्ट रूप से "सङ्कटनाशकाय" कहा गया है। वे केवल विघ्नहर्ता नहीं, बल्कि भीषण संकटों का नाश करने वाले हैं।

"कारुणिकोत्तम" का महत्व क्या है?

श्लोक 6 में उन्हें 'दयालुओ में उत्तम' कहा गया है। उनकी क्षमाशीलता और दया देवताओं में सर्वश्रेष्ठ है।

क्या यह शत्रुओं से रक्षा करता है?

हाँ। श्लोक 7 में कहा गया है "अभक्त विभूति हन्त्रे" - अर्थात वे दुष्टों (अभक्तों) के ऐश्वर्य और शक्ति को नष्ट कर देते हैं।

"विश्वविधान-दक्ष" का अर्थ क्या है?

श्लोक 5 के अनुसार, वे 'विश्व के विधान' (Cosmic Laws) को चलाने में 'दक्ष' (कुशल) हैं।

इसका पाठ कब करना चाहिए?

संकष्टी चतुर्थी के दिन या जब जीवन में कोई ऐसा संकट आ जाए जिसका समाधान न मिल रहा हो, तब इसका पाठ अचूक है।

"गुणनायक" का अर्थ क्या है?

श्लोक 8 में उन्हें 'गुणनायक' कहा गया है, जिसका अर्थ है वे तीनों गुणों (सत्व, रज, तम) के स्वामी और संचालक हैं।