Sri Chandramoulishwara Varnamala Stotram – श्री चन्द्रमौलीश्वर वर्णमाला स्तोत्रम्

श्रीशात्मभूमुख्यसुरार्चिताङ्घ्रिं
श्रीकण्ठशर्वादिपदाभिधेयम् ।
श्रीशङ्कराचार्यहृदब्जवासं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ १
चण्डांशुशीतांशुकृशानुनेत्रं
चण्डीशमुख्यप्रमथेड्यपादम् ।
षडास्यनागास्यसुशोभिपार्श्वं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ २
द्रव्यादिसृष्टिस्थितिनाशहेतुं
रव्यादितेजांस्यपि भासयन्तम् ।
पव्यायुधादिस्तुतवैभवं तं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ३
मौलिस्फुरज्जह्नुसुतासितांशुं
व्यालेशसंवेष्टितपाणिपादम् ।
शूलादिनानायुधशोभमानं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ४
लीलाविनिर्धूतकृतान्तदर्पं
शैलात्मजासंश्रितवामभागम् ।
शूलाग्रनिर्भिन्नसुरारिसङ्घं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ५
शतैः श्रुतीनां परिगीयमानं
यतैर्मुनीन्द्रैः परिसेव्यमानम् ।
नतैः सुरेन्द्रैरभिपूज्यमानं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ६
मत्तेभकृत्या परिशोभिताङ्गं
चित्ते यतीनां सततं वसन्तम् ।
वित्तेशमुख्यैः परिवेष्टितं तं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ७
हंसोत्तमैश्चेतसि चिन्त्यमानं
संसारपाथोनिधिकर्णधारम् ।
तं सामगानप्रियमष्टमूर्तिं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ८
नताघहं नित्यचिदेकरूपं
सतां गतिं सत्यसुखस्वरूपम् ।
हतान्धकं हृद्यपराक्रमं तं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ९
मायातिगं वीतभयं विनिद्रं
मोहान्तकं मृत्युहरं महेशम् ।
फालानलं नीलगलं कृपालुं
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ १०
मित्रं हि यस्याखिलशेवधीशः
पुत्रश्च विघ्नौघविभेददक्षः ।
पात्रं कृपायाश्च समस्तलोकः
श्रीचन्द्रमौलीशमहं नमामि ॥ ११
इति श्री चन्द्रमौलीश्वर वर्णमाला स्तोत्रम् ॥
इतर पश्यतु ।
श्री चन्द्रमौलीश्वर वर्णमाला स्तोत्रम् - परिचय
श्री चन्द्रमौलीश्वर वर्णमाला स्तोत्रम् भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री चन्द्रमौलीश्वर वर्णमाला स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. श्री चन्द्रमौलीश्वर वर्णमाला स्तोत्रम् के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।