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Sri Bala Khadgamala Stotram – श्री बाला खड्गमाला स्तोत्रम्

Sri Bala Khadgamala Stotram – श्री बाला खड्गमाला स्तोत्रम्
॥ श्री बाला खड्गमाला स्तोत्रम् ॥ ॥ विनियोगः ॥ अस्य श्री बाला खड्गमाला महामन्त्रस्य, श्री मेधा दक्षिणामुर्ति ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्री बाला त्रिपुरसुन्दरी देवता, ऐं बीजं, क्लीं शक्तिः, सौः कीलकं, श्री बाला खड्गमाला महामन्त्र जपे विनियोगः ॥ ॥ करन्यासः ॥ ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । क्लीं तर्जनीभ्यां नमः । सौः मध्यमाभ्यां नमः । ऐं अनामिकाभ्यां नमः । क्लीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः । सौः करतल करपृष्ठाभ्यां नमः । ॥ हृदयादिन्यासः ॥ ऐं हृदयाय नमः । क्लीं शिरसे स्वाहा । सौः शिखायै वषट् । ऐं कवचाय हुम् । क्लीं नेत्रत्रयाय वौषट् । सौः अस्त्राय फट् । ॥ ध्यानम् ॥ बालभानुप्रतीकाशां पलाशकुसुमप्रभां कमलायतनेत्रां तां विधिविष्णुशिवस्तुताम् । बिभ्रतीमिक्षुचापं च पुष्पौघं पाशमङ्कुशं नमामि ललितां बालां त्रिपुरामिष्टसिद्धिदाम् ॥ ॥ पञ्चोपचारः ॥ लमित्यादि पञ्चोपचार पूजां कुर्यात् ॥ ॥ अथ खड्गमाला ॥ ओं ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः नमः बालात्रिपुरसुन्दर्यै हृदयदेवि शिरोदेवि शिखादेवि कवचदेवि नेत्रदेवि अस्त्रदेवि । ॥ दिव्यौघ गुरु मण्डलम् ॥ दिव्यौघाख्यगुरुरूपिणि प्रकाशानन्दमयि परमेशानन्दमयि परशिवानन्दमयि कामेश्वरानन्दमयि मोक्षानन्दमयि कामानन्दमयि अमृतानन्दमयि । ॥ सिद्धौघ गुरु मण्डलम् ॥ सिद्धौघाख्यगुरुरूपिणि ईशानमयि तत्पुरुषमयि अघोरमयि वामदेवमयि सद्योजातमयि । ॥ मानवौघ गुरु मण्डलम् ॥ मानवौघाख्यगुरुरूपिणि गगनानन्दमयि विश्वानन्दमयि विमलानन्दमयि मदनानन्दमयि आत्मानन्दमयि प्रियानन्दमयि । ॥ गुरु चतुष्टयम् ॥ गुरुचतुष्टयरूपिणि गुरुमयि परमगुरुमयि परात्परगुरुमयि परमेष्ठिगुरुमयि । ॥ षडङ्ग देवताः ॥ सर्वज्ञे नित्यतृप्ते अनादिबोधे स्वतन्त्रे नित्यमलुप्ते रतिमयि प्रीतिमयि मनोभवामयि । ॥ पञ्चबाणाः ॥ सर्वसङ्क्षोभणबाणमयि सर्वविद्रावणबाणमयि सर्वाकर्षणबाणमयि वशीकरणबाणमयि उन्मादनबाणमयि । ॥ पञ्चकामदेवाः ॥ काममयि मन्मथमयि कन्दर्पमयि मकरध्वजमयि मनोभवमयि । ॥ भगमालिकाः ॥ सुभगामयि भगामयि भगसर्पिणीमयि भगमालामयि अनङ्गामयि अनङ्गकुसुमामयि अनङ्गमेखलामयि अनङ्गमदनामयि । ॥ अष्टमातृकाः ॥ ब्राह्मीमयि माहेश्वरीमयि कौमारीमयि वैष्णवीमयि वाराहीमयि इन्द्राणीमयि चामुण्डामयि महालक्ष्मीमयि । ॥ अष्टभैरवाः ॥ असिताङ्गमयि रुरुमयि चण्डमयि क्रोधमयि उन्मत्तमयि कपालमयि भीषणमयि संहारमयि । ॥ नवपीठाः ॥ कामरूपपीठमयि मलयपीठमयि कुलनागगिरिपीठमयि कुलान्तकपीठमयि चौहारपीठमयि जालन्धरपीठमयि उड्यानपीठमयि देवीकोटपीठमयि । ॥ दशक्षेत्रपालाः ॥ हेतुकमयि त्रिपुरान्तकमयि वेतालमयि अग्निजिह्वमयि कालान्तकमयि कपालमयि एकपादमयि भीमरूपमयि मलयमयि हाटकेश्वरमयि । ॥ दशदिक्पालाः ॥ इन्द्रमयि अग्निमयि यममयि निरृतमयि वरुणमयि वायुमयि कुबेरमयि ईशानमयि ब्रह्ममयि अनन्तमयि । ॥ दशायुधाः ॥ वज्रमयि शक्तिमयि दण्डमयि खड्गमयि पाशमयि अङ्कुशमयि गदामयि त्रिशूलमयि पद्ममयि चक्रमयि । ॥ मूलमन्त्रः ॥ श्री श्री बालात्रिपुरसुन्दरि सर्वानन्दमयि नमस्ते नमस्ते नमस्ते स्वाहा सौः क्लीं ऐम् । ॥ इति श्री बाला खड्गमाला स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

बाला खड्गमाला क्या है?

जैसे माँ ललिता की प्रसिद्ध खड्गमाला है, वैसे ही बाला त्रिपुरसुन्दरी की अपनी बाला खड्गमाला है। 'खड्ग' का अर्थ है तलवार और 'माला' का अर्थ है हार। यानी देवी के यन्त्र की सभी शक्तियों के नामों की माला — जो पढ़ने मात्र से तलवार की तरह सारी बाधाओं को काट देती है।
"नमामि ललितां बालां त्रिपुरामिष्टसिद्धिदाम्" — ध्यान श्लोक: मैं उस बाला ललिता त्रिपुरा को नमन करता हूँ जो इष्ट सिद्धि देने वाली हैं।
श्री विद्या उपासना में यन्त्र पूजा का बहुत महत्व है। लेकिन विस्तृत यन्त्र पूजा में समय लगता है — हर आवरण, हर देवता को अलग-अलग पूजना पड़ता है। खड्गमाला इसका शॉर्टकट है। एक पाठ में पूरे यन्त्र की सभी देवताओं की पूजा हो जाती है।

इसमें क्या-क्या है?

बाला खड्गमाला में ये सब शामिल हैं:
  • विनियोग: ऋषि हैं मेधा दक्षिणामूर्ति — ज्ञान के मूल स्रोत। गायत्री छन्द। बाला त्रिपुरसुन्दरी देवता। ऐं-क्लीं-सौः बीज-शक्ति-कीलक।
  • न्यास: करन्यास और हृदयादि न्यास — दोनों में बाला के तीन बीज (ऐं क्लीं सौः) का प्रयोग।
  • ध्यान: बालभानु (उगते सूर्य) जैसी कान्ति, पलाश पुष्प जैसी आभा, कमल नयन, इक्षुधनु-पाश-अंकुश-पुष्प धारिणी।
  • तीन गुरु मण्डल: दिव्यौघ (परमशिव से आनन्दभैरवी तक), सिद्धौघ (पंचवक्त्र शिव — ईशान, तत्पुरुष, अघोर, वामदेव, सद्योजात), मानवौघ (मानव गुरु परम्परा)।
  • गुरु चतुष्टय: गुरु, परमगुरु, परात्परगुरु, परमेष्ठिगुरु — अपने गुरु से लेकर चार पीढ़ी।
  • पञ्च बाण: संक्षोभण, विद्रावण, आकर्षण, वशीकरण, उन्मादन — कामदेव के पाँच बाण।
  • अष्ट मातृका: ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इन्द्राणी, चामुण्डा, महालक्ष्मी।
  • अष्ट भैरव: असिताङ्ग, रुरु, चण्ड, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण, संहार।
  • नव पीठ: कामरूप से देवीकोट तक नौ शक्तिपीठ।
  • दश दिक्पाल: इन्द्र से अनन्त तक दसों दिशाओं के स्वामी।
  • दश आयुध: वज्र, शक्ति, दण्ड, खड्ग, पाश, अंकुश, गदा, त्रिशूल, पद्म, चक्र।

पाठ कैसे करें?

  • सबसे पहले: विनियोग पढ़ें, करन्यास करें, हृदयादि न्यास करें।
  • फिर: ध्यान श्लोक पढ़ते हुए देवी का ध्यान करें।
  • पञ्चोपचार: "लं पृथिव्यात्मकं गन्धं... आत्मनः प्राणान्..." — मानसिक पूजा।
  • खड्गमाला: पूरी खड्गमाला एक साँस में या आराम से पढ़ें। हर नाम के साथ उस देवता का भाव करें।
  • अंत में: "सर्वानन्दमयि नमस्ते नमस्ते नमस्ते" — तीन बार नमस्कार।

टिप: रोज़ सुबह या शाम एक बार पढ़ना पर्याप्त है। शुक्रवार या पूर्णिमा को विशेष फल।

क्या फायदा होता है?

  • पूरे बाला यन्त्र की पूजा का फल मिलता है — बिना यन्त्र के भी।
  • वाक् सिद्धि — जो बोलो वो हो।
  • बुद्धि तेज होती है — खासकर विद्यार्थियों के लिए।
  • गुप्त शत्रुओं से रक्षा।
  • मनोकामना पूर्ति — "इष्टसिद्धिदाम्"।

आम सवाल

1. खड्गमाला का मतलब क्या है?

खड्ग = तलवार, माला = हार। देवी की शक्तियों के नामों की वो माला जो तलवार की तरह बाधाएं काटती है।

2. ललिता खड्गमाला से क्या फर्क है?

ललिता खड्गमाला में श्री चक्र की देवियाँ हैं। बाला खड्गमाला में बाला यन्त्र की देवियाँ हैं। दोनों अलग हैं।

3. दिव्यौघ-सिद्धौघ-मानवौघ क्या हैं?

तीन गुरु परम्पराएं: दिव्यौघ = दिव्य गुरु (परमशिव आदि), सिद्धौघ = सिद्ध गुरु (पंचवक्त्र शिव), मानवौघ = मानव गुरु।

4. मेधा दक्षिणामूर्ति कौन हैं?

शिव का वो रूप जो दक्षिण मुख करके बैठे हैं और मौन से ज्ञान देते हैं। इस खड्गमाला के ऋषि।

5. अष्ट मातृका कौन हैं?

आठ माताएं: ब्राह्मी (ब्रह्मा की शक्ति), माहेश्वरी (शिव की), कौमारी (कार्तिकेय की), वैष्णवी (विष्णु की), वाराही (वराह की), इन्द्राणी (इन्द्र की), चामुण्डा, महालक्ष्मी।

6. नव पीठ कौन से हैं?

कामरूप, मलय, कुलनागगिरि, कुलान्तक, चौहार, जालन्धर, उड्यान, देवीकोट — ये शक्तिपीठ हैं।

7. बिना दीक्षा के पढ़ सकते हैं?

हाँ, खड्गमाला स्तोत्र है — मंत्र नहीं। श्रद्धा से कोई भी पढ़ सकता है। दीक्षा से फल बढ़ता है, लेकिन बिना दीक्षा भी पढ़ सकते हैं।

8. कब पढ़ना चाहिए?

कभी भी। सुबह या शाम अच्छा है। शुक्रवार और पूर्णिमा को विशेष।

9. "सर्वानन्दमयि" का मतलब?

सर्व = सब, आनन्द = खुशी, मयि = से भरी। सब प्रकार के आनन्द से भरी हुई।

10. ये इतनी लम्बी क्यों है?

क्योंकि इसमें पूरे यन्त्र की सभी देवताओं के नाम हैं। एक बार पढ़ने में 3-4 मिनट लगते हैं। रोज़ इतना समय तो निकाल सकते हैं!