Sri Adya Stotram – श्री आद्या स्तोत्रम्

श्री आद्या स्तोत्रम् - परिचय (Introduction)
श्री आद्या स्तोत्रम् (Sri Adya Stotram) माता आदिशक्ति (प्रकृति) की एक बहुत ही शक्तिशाली और प्राचीन प्रार्थना है। यह स्तोत्र ब्रह्मयामले तन्त्र (Brahma Yamala Tantra) से लिया गया है। यह भगवान ब्रह्मा और देवर्षि नारद के बीच एक संवाद के रूप में है, जहाँ ब्रह्मा जी, नारद मुनि को इस स्तोत्र की महिमा और इसके चमत्कारी फलों के बारे में बताते हैं।
यह स्तोत्र बंगाल में अत्यंत लोकप्रिय है, जहाँ इसे आद्या माँ (Adya Ma) की प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। श्री अन्नदा ठाकुर (Annada Thakur), जिन्होंने दक्षिणेश्वर के पास आद्यापीठ की स्थापना की, उन्हें स्वप्न में माँ ने यह स्तोत्र दिया था। यह स्तोत्र माँ के विश्वव्यापी रूप का वर्णन करता है—कि वे ही काशी में अन्नपूर्णा, अयोध्या में महेश्वरी और विदेह में जानकी हैं।
पाठ के लाभ (Phala Shruti & Benefits)
संतान प्राप्ति (Progeny): श्लोक 3 के अनुसार, यदि कोई निस्संतान (अपुत्रा) स्त्री भक्तिपूर्वक तीन पक्षों (लगभग 45 दिन) तक इसका श्रवण करती है, तो उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
मृतवत्सा दोष निवारण: श्लोक 4 के अनुसार, जिन माताओं बच्चों की अकाल मृत्यु हो जाती है, यदि वे 6 महीने तक इसका श्रवण करें, तो उनकी संतान जीवित और दीर्घायु होती है।
रोग और भय नाश: यह कलयुग में मृत्यु, व्याधि (रोग) और भय का नाश करने वाला है।
रक्षा कवच: इसे घर में लिखकर रखने से अग्नि और चोर का भय नहीं रहता (श्लोक 5)। यह जल, थल और नभ—हर जगह रक्षा करता है।