श्रीहनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् (रुद्रयामल) - भय और रोग नाशक
Shri Hanumat Sahasranama Stotram (Rudrayamala)

श्री हनुमत् सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रयामल तन्त्र): सर्व-सिद्धि का महामंत्र
रुद्रयामल तन्त्र के अन्तर्गत माता पार्वती और भगवान शिव के संवाद में वर्णित श्री हनुमत् सहस्रनाम स्तोत्र एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली साधना है। इसमें भगवान हनुमान के १००० दिव्य नामों का वर्णन है, जो साधक को भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करते हैं।
स्तोत्र की महिमा और लाभ
भगवान शिव स्वयं कहते हैं कि इस स्तोत्र के समान लोकों में कुछ भी नहीं है ("नित्यं परतरं लोके")। इसके पाठ से मिलने वाले लाभ अद्भुत हैं:
सर्व-सिद्धि प्रदायक: "सर्वा सिद्धिर्भवेत्प्रिये" - इसके नित्य पाठ से जीवन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, चाहे वह पुत्र, धन, विद्या या मोक्ष हो।
असाध्य रोग निवारण: यह ज्वर (Fever), अपस्मार (Epilepsy), यक्ष्मा (TB), और प्लीहा (Spleen) जैसे कठिन रोगों को भी नष्ट करता है।
शत्रु और भय नाश: "वैरिविद्रावणं परम्" - युद्ध, विवाद या शत्रु बाधा में यह अचूक है। डाकिनी, भूत, प्रेत और ग्रह पीड़ा का भी यह नाश करता है।
सिद्धि और प्रयोग विधि
स्तोत्र की फलश्रुति में विशेष कामनाओं के लिए विशेष विधियां बताई गई हैं:
- शत्रु भय मुक्ति: अश्वत्थ (पीपल) के पेड़ के नीचे जप करने से शत्रु का भय समाप्त होता है।
- चक्रवर्ती साम्राज्य: "भौमे निशान्ते" (मंगलवार को ब्रह्ममुहूर्त में) वट वृक्ष (न्यग्रोध) के नीचे १० बार पाठ करने से व्यक्ति राजा के समान प्रभावशाली होता है।
- तत्काल विजय: "अर्कमूलेऽर्कवारे" (रविवार को मदार की जड़ के पास) मध्याह्न (दोपहर) में पवित्र होकर जप करने से तुरंत विजय मिलती है।
सामान्य नियम: नित्य प्रातः स्नान करके "एककालं द्विकालं वा त्रिकालं" (१, २ या ३ बार) पाठ करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)