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Sri Shiva Ashtakam 2 – श्री शिवाष्टकम् – २

Sri Shiva Ashtakam 2 – श्री शिवाष्टकम् – २
आशावशादष्टदिगन्तराले देशान्तरभ्रान्तमशान्तबुद्धिम् । आकारमात्रादवनीसुरं मां अकृत्यकृत्यं शिव पाहि शम्भो ॥ १ ॥ मांसास्थिमज्जामलमूत्रपात्र- -गात्राभिमानोज्झितकृत्यजालम् । मद्भावनं मन्मथपीडिताङ्गं मायामयं मां शिव पाहि शम्भो ॥ २ ॥ संसारमायाजलधिप्रवाह- -संमग्नमुद्भ्रान्तमशान्तचित्तम् । त्वत्पादसेवाविमुखं सकामं सुदुर्जनं मां शिव पाहि शम्भो ॥ ३ ॥ इष्टानृतं भ्रष्टमनिष्टधर्मं नष्टात्मबोधं नयलेशहीनम् । कष्टारिषड्वर्गनिपीडिताङ्गं दुष्टोत्तमं मां शिव पाहि शम्भो ॥ ४ ॥ वेदागमाभ्यासरसानभिज्ञं पादारविन्दं तव नार्चयन्तम् । वेदोक्तकर्माणि विलोपयन्तं वेदाकृते मां शिव पाहि शम्भो ॥ ५ ॥ अन्यायवित्तार्जनसक्तचित्तं अन्यासु नारीष्वनुरागवन्तम् । अन्यान्नभोक्तारमशुद्धदेहं आचारहीनं शिव पाहि शम्भो ॥ ६ ॥ पुरात्ततापत्रयतप्तदेहं परां गतिं गन्तुमुपायवर्ज्यम् । परावमानैकपरात्मभावं नराधमं मां शिव पाहि शम्भो ॥ ७ ॥ पिता यथा रक्षति पुत्रमीश जगत्पिता त्वं जगतः सहायः । कृतापराधं तव सर्वकार्ये कृपानिधे मां शिव पाहि शम्भो ॥ ८ ॥ इति श्रीवृद्धनृसिंहभारती स्वामी विरचितं श्री शिवाष्टकम् । इतर पश्यतु ।

श्री शिवाष्टकम् - परिचय

श्री शिवाष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत अष्टकम है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
  • विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
  • समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
  • भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री शिवाष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।

2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?

हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।

3. श्री शिवाष्टकम् के पाठ से क्या फल मिलता है?

इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।