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मरकत श्री लक्ष्मीगणपति सुप्रभातम् (Emerald Ganesha Suprabhatam) - कानाजीगूड

Marakatha Sri Lakshmi Ganapathi Suprabhatam

मरकत श्री लक्ष्मीगणपति सुप्रभातम् (Emerald Ganesha Suprabhatam) - कानाजीगूड
अथ मरकत श्री लक्ष्मीगणपति सुप्रभातम् प्रार्थना श्रीमन्मरकतं लक्ष्मीगणेशं सत्यपूजितम् । कानाजीगूड निलयं वन्दे सङ्कष्टहारकम् ॥ श्रीमन्मनोज्ञ निगमागमवाक्यगीत श्रीपार्वतीपरमशंभुवरात्मजात । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मपूत लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १ ॥ श्रीवत्सदुग्धमयसागरपूर्णचन्द्र व्याख्येयभक्तसुमनोर्चितपादपद्म । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभूष लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २ ॥ सृष्टिस्थितिप्रलयकारणकर्मशील अष्टोत्तराक्षरमनूद्भवमन्त्रलोल । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मखेल लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ३ ॥ कष्टप्रनष्ट परिबाधित भक्त रक्ष इष्टार्थदान निरतोद्यमकार्यदक्ष । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मपूत लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ४ ॥ श्रीव्यासभारतविलेखनकार्यदीक्षा दक्षाभिरक्षण विचक्षणदीप्तिहस्त । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ५ ॥ ध्यानात्मभक्तजनताहृदयाभिराम श्रीनामपूरितसहस्रसुनामधाम । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मसीम लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ६ ॥ वैधातृवर्धितचराचरलोकपाल आवाहनात्मकसुकृत्यकलापतोष । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ७ ॥ विश्वंभरातलसुखासनसन्निविष्ट विश्वप्रशान्तिपरिरक्षणकर्मतुष्ट । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्महृष्ट लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ८ ॥ गङ्गादिपुण्यमयवारितरङ्गसिक्त स्वीयाङ्घ्रिसारसयुगप्रविलासदेह । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ९ ॥ हस्तद्वयाम्बुरुहलोलनवार्घ्यनीर स्वच्छप्रभाप्रविलसन्मुखचन्द्रबिम्ब । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १० ॥ बिम्बाधरस्पृगमलामृतपूरिताम्बु स्वीकार राजित वराचमनीयशोभ । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ ११ ॥ पञ्चामृतामलफलोदक सम्प्रपूर्ण स्नानोपचारपरितोषितमानसाब्ज । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १२ ॥ दिग्वस्त्रराजपरिधानितदिव्यदेह दृग्वासिताखिलफलप्रविभासमान । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १३ ॥ सौगन्ध्यजाल हरिचन्दनदिग्धदिव्य प्रोद्भासितामलतनूविभवैकरम्य । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १४ ॥ स्वच्छप्रभासित वराक्षतराजवर्षि व्याकर्षणीय रुचिराङ्गविलोकनीय । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १५ ॥ नानासुगन्ध वरधूपित धूपराज द्विख्यातमौलिलसदार्षसुतत्त्वदेह । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १६ ॥ गाढान्धकारपरिमार्जनदिव्यतेजो लास्यत्प्रदीपरुचिमद्वरतत्त्वभास । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १७ ॥ सर्वर्तुसंफलितकोटिफलप्रवृष्टि भ्राजन्निवेदन विनोदन कर्ममोद । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १८ ॥ पूगीफलादिक सुगन्धविलासहास द्रव्यात्मताम्बुलिकसेवनकर्मतोष । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ १९ ॥ श्रेष्ठप्रदक्षिण सुकर्मकलापमग्न संसेवकावलि सुरक्षणकार्यलीन । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २० ॥ नीराजिताखिलसुगन्धसुवस्तुजाल प्रोद्भासदीपवरकान्तिविलासदीप्त । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २१ ॥ दूर्वाशमीमरुवकार्जुनजाजिबिल्व दत्तूरचूततुलसीवरपत्रसेव्य । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २२ ॥ माचीसुदाडिमवरार्कसगण्डकीय प्रख्यातविष्णुमयकान्तसुपत्रसेव्य । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २३ ॥ श्रीसिन्धुवारसुमनोर्चितदेवदारु संवासभासकरवीरदलैकसेव्य । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २४ ॥ अश्वत्थदिव्यबदरीबृहतीसमञ्चत् दिव्यापमार्गिक वनस्पति पत्रपूज्य । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २५ ॥ ओङ्कारपूर्णभगवन्नुतिपाठगम्य श्रीकारभावितमनोहरदिव्यरूप । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २६ ॥ दैनन्दिनोन्नयनचन्द्रकलात्मरूप प्राञ्चत्सुवर्णमणिरत्नरुचिप्रभास । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभूष लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २७ ॥ श्रीमोतुकूरुवरवम्शजसत्यशास्त्रि स्वान्ताम्बुजातवरपूजनकर्ममोद । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्मभास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २८ ॥ श्रीमन्नटेश्वरकवीश्वर सम्प्रणीत श्रीसुप्रभातकविताभरणप्रबोध । श्रीसत्यवाङ्मरकतोल्लसदात्महास लक्ष्मीगणेश भगवन् तव सुप्रभातम् ॥ २९ ॥ इति श्री मरकत लक्ष्मीगणपति सुप्रभातम् सम्पूर्णम् ।

स्तोत्र परिचय (Introduction)

मरकत श्री लक्ष्मीगणपति सुप्रभातम् एक अत्यंत दिव्य प्रार्थना है, जो हैदराबाद के कानाजीगूड (Kanajiguda) स्थित प्रसिद्ध मंदिर के देवता का सवेरे-सवेरे अभिनंदन करने के लिए रची गई है।

यहाँ गणेश जी 'मरकत' (पन्ने/Emerald) के रूप में विराजमान हैं। मरकत बुध ग्रह (Mercury) का रत्न है, जो बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक है। प्रतिदिन इस सुप्रभात का पाठ करने से जीवन में नई ऊर्जा और शुभता का संचार होता है।

लाभ (Benefits)

  • मंगलमय प्रभात: इसका प्रातःकालीन पाठ दिन की शुरुआत को सकारात्मक (Positive) बनाता है और आने वाले सभी विघ्नों को दूर रखता है।

  • बुध ग्रह दोष निवारण: पन्ना गणेश (Emerald Ganesha) की स्तुति होने के कारण, यह कुंडली में कमजोर बुध को बलवान करता है और वाणी दोष (Speech defects) को सुधारता है।

  • समृद्धि और ऐश्वर्य: यह 'लक्ष्मी-गणपति' स्वरुप है। इसका पाठ दरिद्रता को नष्ट कर घर में धन-धान्य और वैभव (Ishtartha Dana) को आकर्षित करता है।

पाठ विधि (Vidhi)

• समय: सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त) या सोकर उठते ही इसका पाठ करना सर्वोत्तम है।
• दिशा: पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर मुख करें।
• ध्यान: आँखें बंद करके हरे रंग के प्रकाशमान (Radiant Green) मरकत गणेश का अपने हृदय में ध्यान करें।
• निवेदन: पाठ के बाद गणेश जी को मानसिक रूप से दूध, दूर्वा और मोदक अर्पित करें।

प्रश्नोत्तरी (FAQ)

मरकत लक्ष्मी गणपति सुप्रभातम् किस मंदिर से संबंधित है?

यह सुप्रभातम् हैदराबाद के कानाजीगूड (Kanajiguda) स्थित प्रसिद्ध मरकत श्री लक्ष्मी गणपति मंदिर (Marakatha Sri Lakshmi Ganapati Temple) के देवता को जगाने के लिए गाया जाता है।

'मरकत' (Marakatha) का क्या महत्व है?

'मरकत' का अर्थ है पन्ना (Emerald)। यह हरे रंग का कीमती रत्न है जो बुध ग्रह (Mercury) का प्रतीक है। पन्ने से बनी गणेश मूर्ति की पूजा मेधा (बुद्धि) और व्यापार में सफलता देती है।

इसके रचयिता कौन हैं?

इस सुंदर सुप्रभातम् की रचना श्री नटेश्वर कवीश्वर (Sri Nateshwara Kavishwara) ने की थी। यह मंदिर के प्रधान अर्चक ब्रह्मश्री मोतुकूरु सत्यनारायण शास्त्री की प्रेरणा से रचा गया।

इस स्तोत्र के पाठ से कौन से ग्रह दोष दूर होते हैं?

चूँकि मरकत बुध ग्रह का रत्न है, इसलिए इसका पाठ बुध दोष (Mercury Afflictions) को दूर करता है। यह वाणी दोष, हकलाना, और त्वचा रोगों में भी लाभकारी है।

क्या इसे घर पर पढ़ा जा सकता है?

जी हाँ। यद्यपि यह मंदिर का सुप्रभात है, लेकिन घर पर इसका पाठ करने से घर में 'लक्ष्मी-गणपति' की ऊर्जा और सकारात्मकता (Positivity) का संचार होता है।

श्लोक 22 में किन पत्रों (Leaves) का उल्लेख है?

इसमें गणेश जी को प्रिय 21 पत्रों का उल्लेख है, जैसे - दूर्वा, शमी, मरुवक, अर्जुन, बिल्व, धतूरा, तुलसी आदि। सुप्रभात में इन सभी पवित्र पत्रों से प्रभु की सेवा का वर्णन है।

पाठ करने का सही समय क्या है?

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है - सुप्रभातम्। इसे सूर्योदय से पहले (Brahma Muhurta) या सूर्योदय के तुरंत बाद पढ़ना चाहिए जब आप अपने दिन की शुरुआत कर रहे हों।

लक्ष्मी गणपति का क्या अर्थ है?

यह गणेश जी का वह स्वरूप है जहाँ वे अपनी शक्ति 'लक्ष्मी' (रिद्धि-सिद्धि) के साथ विराजमान हैं। यह भोग (Wealth) और मोक्ष (Wisdom) दोनों का संतुलन है।