Goda Stuti – गोदा स्तुतिः | Sri Goda Devi Stotram by Vedanta Desika
Goda Stuti (Hymn in Praise of Andal)

गोदा स्तुतिः (Goda Stuti) - परिचय एवं महत्व
गोदा स्तुतिः (Goda Stuti) श्री वैष्णव संप्रदाय के प्रसिद्ध आचार्य वेदांत देशिक द्वारा रचित 29 श्लोकों का एक दिव्य स्तोत्र है। यह स्तोत्र आण्डाल (जिन्हें गोदा देवी भी कहा जाता है) को समर्पित है। आण्डाल 12 आलवार संतों में एकमात्र महिला संत थीं, जिन्हें भू-देवी का अवतार माना जाता है।
इस स्तुति में आचार्य देशिक ने गोदा देवी के सौंदर्य, उनकी भक्ति और भगवान रंगनाथ के प्रति उनके प्रेम का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। मान्यता है कि जो माला गोदा देवी धारण करती थीं (चूड़िकुडुत्त नाच्चियार), उसी को भगवान विष्णु बड़े प्रेम से स्वीकार करते थे। यह स्तोत्र उसी दिव्य प्रेम की महिमा गाता है।
गोदा स्तुति के प्रमुख भाव
शरणागति का भाव
प्रथम श्लोक में ही वेदांत देशिक जी कहते हैं - "मैं उस गोदा देवी की शरण लेता हूँ, जो साक्षात् क्षमा (पृथ्वी) का अवतार हैं और विष्णुचित्त (पेरियाळ्वार) के कुल की कल्पलता हैं।"
भगवान पर आधिपत्य (Divine Sway over Lord)
स्तोत्र में कहा गया है कि भगवान रंगनाथ, जो वेदों (श्रुतियों) से भी पूर्णतः जाने नहीं जाते, वे गोदा देवी की माला की सुगंध और प्रेम के वश में हो जाते हैं। गोदा का प्रेम भगवान को भक्तों पर दया करने के लिए विवश कर देता है।
वात्सल्य (Motherly Love)
जिस प्रकार एक माँ अपने शिशु को स्तनपान कराती है चाहे वह उसे काट ही क्यों न ले, उसी प्रकार गोदा देवी हमारे अपराधों को अनदेखा कर हम पर कृपा करती हैं और भगवान से हमारी रक्षा करती हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- विवाह बाधा निवारण: कुंवारी कन्याओं के लिए गोदा स्तुति और तिरुप्पావै का पाठ सुयोग्य वर की प्राप्ति में अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
- दाम्पत्य सुख: यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ाता है।
- भगवद् प्राप्ति: यह स्तोत्र भगवान विष्णु (रंगनाथ) की अनन्य भक्ति और मोक्ष (शाश्वत कैंकर्य) प्रदान करता है।
- वाणी की मधुरता: इसके पाठ से वाणी में मधुरता और कवित्व शक्ति का विकास होता है।