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Goda Chathusloki – गोदा चतुश्श्लोकी

Goda Chathusloki – गोदा चतुश्श्लोकी
॥ गोदा चतुश्श्लोकी ॥ नित्याभूषा निगमशिरसां निस्समोत्तुङ्गवार्ता कान्तोयस्याः कचविलुलितैः कामुको माल्यरत्नैः । सूक्त्या यस्याः श्रुतिसुभगया सुप्रभाता धरित्री सैषा देवी सकलजननी सिञ्चितान्मामपाङ्गैः ॥ १ ॥ माता चेत्तुलसी पिता यदि तव श्रीविष्णुचित्तो महान् भ्राता चेद्यतिशेखरः प्रियतमः श्रीरङ्गधामा यदि । ज्ञातारस्तनयास्त्वदुक्ति सरसस्तन्येन संवर्धिताः गोदादेवि! कथं त्वमन्य सुलभा साधारणा श्रीरसि ॥ २ ॥ कल्पदौ हरिणा स्वयं जनहितं दृष्टेन सर्वात्मनां प्रोक्तं स्वस्यच कीर्तनं प्रपदनं स्वस्मै प्रसूनार्पणम् । सर्वेषां प्रकटं विधातुमनिशं श्रीधन्विनव्ये पुरे जातां वैदिकविष्णुचित्त तनयां गोदामुदारां स्तुमः ॥ ३ ॥ आकूतस्य परिष्क्रियामनुपमामासेचनं चक्षुषोः आनन्दस्य परम्परामनुगुणामारामशैलेशितुः । तद्दोर्मध्यकिरीट कोटिघटितस्वोच्छिष्टकस्तूरिका माल्यामोदसमेधितात्म विभवां गोदा मुदारां स्तुमः ॥ ४ ॥ ॥ मंगलम् ॥ स्वोच्छिष्टमालिकाबन्धरजिष्णवे । विष्णु चित्त तनूजायै गोदायै नित्यमङ्गलं ॥ ५ ॥ मादृशाकिञ्चनत्राणबद्धकङ्कणपाणये । विष्णुचित्त तनूजायै गोदायै नित्यमङ्गलम् ॥ ६ ॥ ॥ इति श्री गोदा चतुश्श्लोकी सम्पूर्णम् ॥

॥ गोदा चतुश्श्लोकी - परिचय (Introduction) ॥

गोदा चतुश्श्लोकी (Goda Chathusloki) माँ आदिशक्ति के दिव्य स्वरूपों (श्री आण्डाल/गोदा देवी) की स्तुति है। यह स्तोत्र विशेष रूप से भगवान रंगनाथ और उनकी प्रिय गोदा देवी के प्रति शरणागति का भाव जगाता है। शक्ति साधना में देवी के विभिन्न रूपों जैसे अन्नपूर्णा, शाकम्भरी, रेणुका आदि का विशेष महत्व है, और गोदा देवी 'भू-देवी' का अवतार मानी जाती हैं।

॥ स्तोत्र भावार्थ (Meaning) ॥

श्लोक १ जो वेदों (उपनिषदों) के शीश का नित्य आभूषण हैं, जिनकी चर्चा अतुलनीय और उच्च है। जिनके केशों से उलझी हुई रत्न-माला से उनके प्रियतम (भगवान) सुशोभित होते हैं। जिनकी सुंदर वाणी (तिरुप्पावै) से पृथ्वी सुप्रभातमय (मंगलमय) हो गई है; वे 'गोदा' देवी, जो सबकी माता हैं, अपनी कृपामयी कटाक्षों से मेरा अभिषेक करें।

श्लोक २ हे गोदा देवी! यदि तुलसी आपकी माता हैं, यदि महान विष्णुचित्त (पेरियालवार) आपके पिता हैं, यदि यतिशेखर (रामानुजाचार्य) आपके भाई हैं, यदि श्रीरंगधाम के स्वामी (रंगनाथ) आपके प्रियतम हैं, और यदि ज्ञानीजन आपकी वाणी रूपी दूध से पले हुए आपके पुत्र हैं; तो आप (लक्ष्मी के समान) साधारण जनों के लिए इतनी सुलभ कैसे हो गईं? (अर्थात आप अत्यंत दयालु हैं)।

श्लोक ३ कल्प के आरम्भ में भगवान हरि ने सभी जीवों के कल्याण के लिए, अपने संकीर्तन, प्रपत्ति (शरणागति) और पुष्प-समर्पण को स्वयं ही (मोक्ष का) साधन बताया था। उसी को सभी के लिए प्रकट करने हेतु, श्रीविल्लीपुत्तुर में वैदिक विष्णुचित्त की पुत्री के रूप में जन्मीं उदार 'गोदा' की हम स्तुति करते हैं।

श्लोक ४ हम उदार गोदा की स्तुति करते हैं, जो भगवान के संकल्प का अनुपम श्रृंगार हैं, जो नेत्रों को आनंदित करने वाली हैं, और जो भगवान (रंगनाथ/वेंकटेश) के लिए आनंद की निरंतर धारा हैं। जिनका वैभव उस माला की सुगंध से और बढ़ गया है जिसे उन्होंने स्वयं पहनकर (उच्छिष्ट करके) भगवान के मुकुट/भुजाओं पर अर्पित किया।

श्लोक ५ (मंगलम्) जिन्होंने अपनी पहनी हुई माला (के प्रेम) से भगवान को जीत लिया है। विष्णुचित्त की उस पुत्री, गोदा देवी के लिए नित्य मंगल हो।

श्लोक ६ (मंगलम्) जिन्होंने मुझ जैसे दीन-हीन (अकिंचन) लोगों की रक्षा के लिए कंकण बांध रखा है (संकल्प लिया है)। विष्णुचित्त की उस पुत्री, गोदा देवी के लिए नित्य मंगल हो।

॥ पाठ के लाभ (Benefits) ॥

  • सर्व मनोकामना पूर्ति: देवी की कृपा से भक्तों की सभी सात्विक इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
  • संकट नाश: जीवन के सभी कष्टों और संकटों का निवारण होता है।
  • आरोग्य प्राप्ति: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
  • सुख-समृद्धि: परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

॥ पाठ विधि (Recitation Method) ॥

  • समय: नवरात्रि, शुक्रवार और मंगलवार का दिन देवी उपासना के लिए श्रेष्ठ है।
  • आसन: लाल आसन पर बैठकर पाठ करें।
  • दीप: घी का दीपक जलाएं और देवी को कुमकुम अर्पित करें।
  • भाव: पूर्ण श्रद्धा और मातृ-भाव से पाठ करें।

॥ FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ॥

1. गोदा चतुश्श्लोकी क्या है?

गोदा चतुश्श्लोकी चार श्लोकों का एक दिव्य स्तोत्र है जो माँ गोदा देवी (आण्डाल) की महिमा और भगवान विष्णु (रंगनाथ) के प्रति उनके प्रेम का वर्णन करता है। यह शरणागति और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।

2. गोदा देवी (आण्डाल) कौन हैं?

गोदा देवी, जिन्हें आण्डाल के नाम से भी जाना जाता है, भू-देवी (पृथ्वी माता) का अवतार मानी जाती हैं। वे १२ आलवार संतों में एकमात्र महिला संत थीं, जिन्होंने अपनी भक्ति और प्रेम से भगवान रंगनाथ को विवाह सूत्र में बांध लिया।

3. इस स्तोत्र के पाठ का क्या लाभ है?

इसका पाठ करने से भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह अविवाहित कन्याओं के लिए सुयोग्य वर, विवाहितों के लिए सुखमय दांपत्य जीवन, और भक्तों के लिए मोक्ष प्राप्ति का साधन माना जाता है।

4. क्या पुरुष भी इसका पाठ कर सकते हैं?

जी हाँ, भक्ति मार्ग में लिंग भेद नहीं है। पुरुष भी भगवान की कृपा और जीवन में मंगल प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।

5. इसका पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ नित्य किया जा सकता है, परन्तु शुक्रवार, एकादशी, और विशेष रूप से धनुर्मास (मार्गशीर्ष/दिसंबर-जनवरी) के महीने में इसका पाठ अत्यंत फलदायी होता है।

6. गोदा देवी को क्या अर्पित करना प्रिय है?

गोदा देवी को तुलसी और सुगंधित पुष्पों की माला अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि वे भगवान को अर्पित करने से पहले स्वयं माला धारण कर लेती थीं, जिससे वह 'उच्छिष्ट माला' भगवान को और भी प्रिय हो जाती थी।

7. चतुश्श्लोकी में कितने श्लोक हैं?

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, 'चतुश्श्लोकी' में मुख्य चार श्लोक हैं। इसके अलावा, पाठ के अंत में मंगलम् के श्लोक भी गाए जाते हैं जो स्तोत्र को पूर्णता प्रदान करते हैं।

8. क्या बिना दीक्षा के पाठ कर सकते हैं?

हाँ, यह एक भक्ति प्रधान स्तोत्र है। इसे किसी भी विशेष तांत्रिक दीक्षा के बिना, शुद्ध भाव और प्रेम से कोई भी भक्त पढ़ सकता है।

9. क्या मासिक धर्म में इसका पाठ कर सकते हैं?

शारीरिक शुद्धि के नियमों का पालन करते हुए पूजा स्थल को स्पर्श न करें, परन्तु मानसिक जाप या श्रवण (सुनना) वर्जित नहीं है।

10. पाठ में कितना समय लगता है?

यह एक अत्यंत संक्षिप्त स्तोत्र है। इसे पढ़ने में केवल 2-3 मिनट का समय लगता है, इसलिए इसे नित्य पूजा में आसानी से शामिल किया जा सकता है।