Goda Chathusloki – गोदा चतुश्श्लोकी

॥ गोदा चतुश्श्लोकी - परिचय (Introduction) ॥
॥ स्तोत्र भावार्थ (Meaning) ॥
श्लोक १ जो वेदों (उपनिषदों) के शीश का नित्य आभूषण हैं, जिनकी चर्चा अतुलनीय और उच्च है। जिनके केशों से उलझी हुई रत्न-माला से उनके प्रियतम (भगवान) सुशोभित होते हैं। जिनकी सुंदर वाणी (तिरुप्पावै) से पृथ्वी सुप्रभातमय (मंगलमय) हो गई है; वे 'गोदा' देवी, जो सबकी माता हैं, अपनी कृपामयी कटाक्षों से मेरा अभिषेक करें।
श्लोक २ हे गोदा देवी! यदि तुलसी आपकी माता हैं, यदि महान विष्णुचित्त (पेरियालवार) आपके पिता हैं, यदि यतिशेखर (रामानुजाचार्य) आपके भाई हैं, यदि श्रीरंगधाम के स्वामी (रंगनाथ) आपके प्रियतम हैं, और यदि ज्ञानीजन आपकी वाणी रूपी दूध से पले हुए आपके पुत्र हैं; तो आप (लक्ष्मी के समान) साधारण जनों के लिए इतनी सुलभ कैसे हो गईं? (अर्थात आप अत्यंत दयालु हैं)।
श्लोक ३ कल्प के आरम्भ में भगवान हरि ने सभी जीवों के कल्याण के लिए, अपने संकीर्तन, प्रपत्ति (शरणागति) और पुष्प-समर्पण को स्वयं ही (मोक्ष का) साधन बताया था। उसी को सभी के लिए प्रकट करने हेतु, श्रीविल्लीपुत्तुर में वैदिक विष्णुचित्त की पुत्री के रूप में जन्मीं उदार 'गोदा' की हम स्तुति करते हैं।
श्लोक ४ हम उदार गोदा की स्तुति करते हैं, जो भगवान के संकल्प का अनुपम श्रृंगार हैं, जो नेत्रों को आनंदित करने वाली हैं, और जो भगवान (रंगनाथ/वेंकटेश) के लिए आनंद की निरंतर धारा हैं। जिनका वैभव उस माला की सुगंध से और बढ़ गया है जिसे उन्होंने स्वयं पहनकर (उच्छिष्ट करके) भगवान के मुकुट/भुजाओं पर अर्पित किया।
श्लोक ५ (मंगलम्) जिन्होंने अपनी पहनी हुई माला (के प्रेम) से भगवान को जीत लिया है। विष्णुचित्त की उस पुत्री, गोदा देवी के लिए नित्य मंगल हो।
श्लोक ६ (मंगलम्) जिन्होंने मुझ जैसे दीन-हीन (अकिंचन) लोगों की रक्षा के लिए कंकण बांध रखा है (संकल्प लिया है)। विष्णुचित्त की उस पुत्री, गोदा देवी के लिए नित्य मंगल हो।
॥ पाठ के लाभ (Benefits) ॥
- सर्व मनोकामना पूर्ति: देवी की कृपा से भक्तों की सभी सात्विक इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
- संकट नाश: जीवन के सभी कष्टों और संकटों का निवारण होता है।
- आरोग्य प्राप्ति: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
- सुख-समृद्धि: परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
॥ पाठ विधि (Recitation Method) ॥
- समय: नवरात्रि, शुक्रवार और मंगलवार का दिन देवी उपासना के लिए श्रेष्ठ है।
- आसन: लाल आसन पर बैठकर पाठ करें।
- दीप: घी का दीपक जलाएं और देवी को कुमकुम अर्पित करें।
- भाव: पूर्ण श्रद्धा और मातृ-भाव से पाठ करें।