Devadaru Vanastha Muni Krita Parameshwara Stuti – श्री परमेश्वर स्तुतिः (देवदारुवनस्थ मुनि कृतम्)

ऋषय ऊचुः ।
नमो दिग्वाससे नित्यं कृतान्ताय त्रिशूलिने ।
विकटाय करालाय करालवदनाय च ॥ १ ॥
अरूपाय सुरूपाय विश्वरूपाय ते नमः ।
कटङ्कटाय रुद्राय स्वाहाकाराय वै नमः ॥ २ ॥
सर्वप्रणतदेहाय स्वयं च प्रणतात्मने ।
नित्यं नीलशिखण्डाय श्रीकण्ठाय नमो नमः ॥ ३ ॥
नीलकण्ठाय देवाय चिताभस्माङ्गधारिणे ।
त्वं ब्रह्मा सर्वदेवानां रुद्राणां नीललोहितः ॥ ४ ॥
आत्मा च सर्वभूतानां साङ्ख्यैः पुरुष उच्यते ।
पर्वतानां महामेरुर्नक्षत्राणां च चन्द्रमाः ॥ ५ ॥
ऋषीणां च वसिष्ठस्त्वं देवानां वासवस्तथा ।
ओङ्कारः सर्ववेदानां श्रेष्ठं साम च सामसु ॥ ६ ॥
आरण्यानां पशूनां च सिंहस्त्वं परमेश्वरः ।
ग्राम्याणामृषभश्चासि भगवान् लोकपूजितः ॥ ७ ॥
सर्वथा वर्तमानोऽपि यो यो भावो भविष्यति ।
त्वामेव तत्र पश्यामो ब्रह्मणा कथितं यथा ॥ ८ ॥
कामः क्रोधश्च लोभश्च विषादो मद एव च ।
एतदिच्छामहे बोद्धुं प्रसीद परमेश्वर ॥ ९ ॥
महासंहरणे प्राप्ते त्वया देव कृतात्मना ।
करं ललाटे संविध्य वह्निरुत्पादितस्त्वया ॥ १० ॥
तेनाग्निना तदा लोका अर्चिर्भिः सर्वतो वृताः ।
तस्मादग्निसमा ह्येते बहवो विकृताग्नयः ॥ ११ ॥
कामः क्रोधश्च लोभश्च मोहो दम्भ उपद्रवः ।
यानि चान्यानि भूतानि स्थावराणि चराणि च ॥ १२ ॥
दह्यं ते प्राणिनस्ते तु त्वत्समुत्थेन वह्निना ।
अस्माकं दह्यमानानां त्राता भव सुरेश्वर ॥ १३ ॥
त्वं च लोकहितार्थाय भूतानि परिषिञ्चसि ।
महेश्वर महाभाग प्रभो शुभनिरीक्षक ॥ १४ ॥
आज्ञापय वयं नाथ कर्तारो वचनं तव ।
भूतकोटिसहस्रेषु रूपकोटिशतेषु च ॥ १५ ॥
अन्तं गन्तुं न शक्ताः स्म देवदेव नमोऽस्तु ते ॥ १६ ॥
इति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे द्वात्रिंशोऽध्याये देवदारुवनस्थ मुनिकृत परमेश्वर स्तुतिः ।
इतर पश्यतु ।
श्री परमेश्वर स्तुतिः (देवदारुवनस्थ मुनि कृतम्) - परिचय
श्री परमेश्वर स्तुतिः (देवदारुवनस्थ मुनि कृतम्) भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री परमेश्वर स्तुतिः (देवदारुवनस्थ मुनि कृतम्) का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. श्री परमेश्वर स्तुतिः (देवदारुवनस्थ मुनि कृतम्) के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।