जय देव जय देव श्रीमंगेशा।
पंचारति ओवाळू सदया सर्वेशा॥
सदया सगुणा शंभो अजिनांबरधारी।
गौरीरमणा आद्या मदनांतकारी॥
त्रिपुरारी अधहारी शिवमस्तकधारी।
विश्वंभर विरुदे हें नम संकट धारीं॥१॥
भयकृत भयनाशन ही नामें तुज देवा।
विबुधादिक कमळासन वांछिती तव सेवा॥
तुझे गुण वर्णाया वाटतसे हेवा।
अभिनव कृपाकटाक्षें मतिउत्सव द्यावा॥२॥
शिव शिव जपता शिव तू करिसी निजदासा।
संकट वारी मम तूं करी शत्रुविनाशा॥
कुळवृद्धीते पाववी हीच असे आशा।
अनंतसुत वांछितसे चरणांबुजलेशा॥३॥
पंचारति ओवाळू सदया सर्वेशा॥
सदया सगुणा शंभो अजिनांबरधारी।
गौरीरमणा आद्या मदनांतकारी॥
त्रिपुरारी अधहारी शिवमस्तकधारी।
विश्वंभर विरुदे हें नम संकट धारीं॥१॥
भयकृत भयनाशन ही नामें तुज देवा।
विबुधादिक कमळासन वांछिती तव सेवा॥
तुझे गुण वर्णाया वाटतसे हेवा।
अभिनव कृपाकटाक्षें मतिउत्सव द्यावा॥२॥
शिव शिव जपता शिव तू करिसी निजदासा।
संकट वारी मम तूं करी शत्रुविनाशा॥
कुळवृद्धीते पाववी हीच असे आशा।
अनंतसुत वांछितसे चरणांबुजलेशा॥३॥
Jay Dev Jay Dev Shrimangesha,
Pancharati Ovalun Sadaya Sarvesha. ||
Sadaya Saguna Shambho Ajinambaradhari,
Gauriramana Aadhya Madanantakari. ||
Tripurari Adhahari Shivmastakadhari,
Vishvambhar Virude Hen Nam Sankat Dharin. ||1||
Bhayakrut Bhayanashan Hi Namen Tuj Deva,
Vibudhadik Kamalasan Vanchhiti Tav Seva. ||
Tujhe Gun Varnaya Vatatase Heva,
Abhinav Kripakatakshen Mati-utsav Dyava. ||2||
Shiv Shiv Japata Shiv Tu Karisi Nijadasa,
Sankat Vari Mam Tu Kari Shatruvinasha. ||
Kulvriddhite Paavavi Hich Ase Aasha,
Anantasut Vanchhitase Charanambujalesha. ||3||
Pancharati Ovalun Sadaya Sarvesha. ||
Sadaya Saguna Shambho Ajinambaradhari,
Gauriramana Aadhya Madanantakari. ||
Tripurari Adhahari Shivmastakadhari,
Vishvambhar Virude Hen Nam Sankat Dharin. ||1||
Bhayakrut Bhayanashan Hi Namen Tuj Deva,
Vibudhadik Kamalasan Vanchhiti Tav Seva. ||
Tujhe Gun Varnaya Vatatase Heva,
Abhinav Kripakatakshen Mati-utsav Dyava. ||2||
Shiv Shiv Japata Shiv Tu Karisi Nijadasa,
Sankat Vari Mam Tu Kari Shatruvinasha. ||
Kulvriddhite Paavavi Hich Ase Aasha,
Anantasut Vanchhitase Charanambujalesha. ||3||
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"जय देव जय देव श्रीमंगेशा" भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध मराठी आरती है, जो विशेष रूप से गोवा और महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में लोकप्रिय है। यह आरती भगवान मंगेश (Lord Mangesh) को संबोधित है, जो भगवान शिव का ही एक स्वरूप हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी पार्वती ने भगवान शिव को डराने के लिए एक बाघ का रूप धारण किया, तो भयभीत होकर शिव "त्राहि माम् गिरीशे" (मेरी रक्षा करो, पर्वत के स्वामी) कहते हुए भागे। बाद में, वे मंगेश (माम् गिरीश) के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह आरती भगवान शिव के सगुण (with attributes) और दयालु स्वरूप की वंदना करती है और भक्तों के संकटों को हरने के लिए उनकी स्तुति करती है।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
यह आरती भगवान शिव के विभिन्न शक्तिशाली और करुणामय रूपों का स्मरण कराती है:
- विविध स्वरूपों का वर्णन (Description of Various Forms): आरती में उन्हें 'अजिनांबरधारी' (चर्म धारण करने वाले), 'गौरीरमणा' (गौरी के पति), 'मदनांतकारी' (कामदेव का अंत करने वाले), और 'त्रिपुरारी' (Tripurari - त्रिपुरासुर का वध करने वाले) जैसे विभिन्न नामों से संबोधित किया गया है।
- भय का नाश करने वाले (Destroyer of Fear): "भयकृत भयनाशन ही नामें तुज देवा" - यह पंक्ति उनके विरोधाभासी स्वरूप को दर्शाती है। वे दुष्टों के लिए भय उत्पन्न करते हैं, लेकिन अपने भक्तों के भय का नाश करते हैं।
- बुद्धि और उत्सव के दाता (Bestower of Intellect and Joy): भक्त प्रार्थना करता है, "अभिनव कृपाकटाक्षें मतिउत्सव द्यावा" - अर्थात, अपनी कृपा दृष्टि से मेरी बुद्धि को एक उत्सव (आनंद और प्रकाश) प्रदान करें। यह ज्ञान और विवेक (knowledge and wisdom) की प्रार्थना है।
- संकट और शत्रु का विनाश (Destruction of Troubles and Enemies): अंतिम पद में, भक्त "संकट वारी मम तूं करी शत्रुविनाशा" कहकर भगवान से अपने संकटों को दूर करने और शत्रुओं का विनाश (destruction of enemies) करने की प्रार्थना करता है।
आरती करने की विधि और विशेष अवसर
- यह आरती विशेष रूप से गोवा के प्रसिद्ध मंगेशी मंदिर (Mangeshi Temple) में दैनिक पूजा का एक अभिन्न अंग है।
- महाशिवरात्रि (Mahashivratri), श्रावण सोमवार और प्रदोष के दिन इस आरती का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
- आरती करते समय भगवान शिव के 'सदया सर्वेशा' (सभी पर दया करने वाले स्वामी) स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।
- इस आरती का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शांति (mental peace), संकटों से मुक्ति, और कुल की वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
