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Deepa Lakshmi Stavam – Evening Lamp Prayer for Prosperity

Deepa Lakshmi Stavam – Evening Lamp Prayer for Prosperity
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ श्री दीपलक्ष्मी स्तवम् ॥ १. दीप सज्जा (Preparation) अन्तर्गृहे हेमसुवेदिकायां सम्मार्जनालेपनकर्म कृत्वा । विधानधूपातुल पञ्चवर्णं चूर्णप्रयुक्ताद्भुत रङ्गवल्याम् ॥ १ ॥ २. तेल और बत्ती (Oil & Wick) अगाध सम्पूर्ण सरस्समाने गोसर्पिषापूरित मध्यदेशे । मृणालतन्तुकृत वर्तियुक्ते पुष्पावतंसे तिलकाभिरामे ॥ २ ॥ ३. प्रज्वलन (Lighting the Lamp) परिष्कृत स्थापित रत्नदीपे ज्योतिर्मयीं प्रज्ज्वलयामि देवीम् । नमाम्यहं मत्कुलवृद्धिदात्रीं सौदादि सर्वाङ्गण शोभमानाम् ॥ ३ ॥ ४. प्रार्थना (Prayer for Husband & Virtue) भो दीपलक्ष्मि प्रथितं यशो मे प्रदेहि माङ्गल्यममोघशीले । भर्तृप्रियां धर्मविशिष्ट शीलां कुरुष्व कल्याण्यनुकम्पया माम् ॥ ४ ॥ ५. अज्ञान नाश (Removing Darkness) यान्तर्बहिश्चापि तमोऽपहन्त्री सन्ध्यामुखाराधित पादपद्मा । त्रयीसमुद्घोषित वैभवा सा ह्यनन्यकामे हृदये विभातु ॥ ५ ॥ ६. आरोग्य और संतान (Health & Progeny) भो दीप ब्रह्मरूपस्त्वं ज्योतिषां प्रभुरव्ययः । आरोग्यं देहि पुत्रांश्च अवैधव्यं प्रयच्छ मे ॥ ६ ॥ ७. फलश्रुति (Benefits for Women) सन्ध्यादीपस्तवमिदं नित्यं नारी पठेत्तु या । सर्वसौभाग्ययुक्ता स्याल्लक्ष्म्यनुग्रहतः सदा ॥ ७ ॥ ८. सकल ऐश्वर्य (Overall Prosperity) शरीरारोग्यमैश्वर्यं अरिपक्षक्षयः सुखम् । देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम् ॥ ८ ॥ ॥ इति श्री दीपलक्ष्मी स्तवम् सम्पूर्णम् ॥ ॥ शुभं भवतु ॥
दीप दर्शन: विज्ञान और महत्व (Science of Lamp)
'दीप' (दीपक) को परब्रह्म का स्वरूप माना गया है - 'दीप ज्योति परब्रह्म'। वैज्ञानिक रूप से, दीपक की लौ (Flame) वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करती है और वायु में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करती है।

महत्वपूर्ण नियम: दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें। उसे किसी भी प्लेट, पत्ते या चावल की ढेरी पर (आसन देकर) रखना चाहिए।

दिशा निर्देश (Direction Guide)
दीपक की लौ किस दिशा में होनी चाहिए, इसका विशेष महत्व है:
दिशा (Direction)देवता (Deity)फल (Result)
पूर्व (East)इंद्रआरोग्य, लंबी आयु और मानसिक शांति। (सर्वोत्तम)
उत्तर (North)कुबेरधन वृद्धि, ऐश्वर्य और व्यापार में लाभ।
पश्चिम (West)वरुण/शनिकर्ज से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय। (सायंकाल में शुभ)
दक्षिण (South)यमवर्जित। यह दिशा मृत्यु और हानि लाती है। केवल श्राद्ध में जलाएं।
तेल और बत्ती का रहस्य (Oils & Wicks)
हर तेल और बत्ती का अपना प्रभाव होता है:
तेल के प्रकार
  • गाय का घी: सर्वोत्तम। घर में सकारात्मक ऊर्जा, आरोग्य और मुक्ति प्रदान करता है।
  • तिल का तेल: शनि दोष, दीर्घकालीन कष्ट और बाधाओं को दूर करता है।
  • वर्जित: मूंगफली, सूरजमुखी (Sunflower) या पाम तेल पूजा में प्रयोग न करें।
बत्ती (Wick) की संख्या
  • 1 बत्ती: मध्यम फल।
  • 2 बत्तियां: परिवार में मेल-मिलाप और शांति।
  • 3 बत्तियां: संतान सुख।
  • 5 बत्तियां (पंचमुखी): अत्यंत शुभ। सकल ऐश्वर्य और राजयोग।
पूजा विधि (Ritual Steps)
संध्या वंदन (Sandhya Vandanam) के समय इस विधि का पालन करें:
  1. संध्या (सूर्यास्त) के समय हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं।
  2. मुख्य द्वार और पूजा घर में दीपक साफ करके रखें।
  3. दीपक में घी या तेल डालें और नई रुई की बत्ती लगाएं।
  4. 'शुभम करोति कल्याणम' मंत्र बोलते हुए दीपक जलाएं।
  5. दीपक को अक्षत (चावल) और पुष्प अर्पित करें।
  6. इसके बाद श्री दीपलक्ष्मी स्तवम् का पाठ करें।
  7. अंत में अपने हाथों को दीप की लौ के ऊपर हल्का घुमाकर आँखों से स्पर्श करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. दीपक किस दिशा में जलाना चाहिए?
सामान्य पूजा के लिए पूर्व (East) दिशा सर्वोत्तम है। यदि आप धन चाहते हैं, तो उत्तर (North) दिशा रखें। दक्षिण दिशा की ओर लौ कभी न करें, यह यम (मृत्यु) की दिशा है।
2. कौन सा तेल प्रयोग करना चाहिए?
गाय का घी सबसे श्रेष्ठ है। यदि वह उपलब्ध न हो, तो शुद्ध तिल का तेल (Sesame Oil) प्रयोग करें। ये दोनों देवी-देवताओं को प्रिय हैं। रिफाइंड तेलों से बचें।
3. दीपक बुझ जाए तो क्या करें?
यदि पूजा के दौरान हवा आदि से दीपक बुझ जाए, तो मन में ग्लानि न लाएं। ईश्वर से क्षमा मांगें (अपराध क्षमापन रस्तोत्र पढ़ें) और दीपक पुनः जला दें। इसे अपशकुन मानकर भयभीत न हों।
4. क्या स्टील का दीपक जला सकते हैं?
नहीं। पूजा में स्टील या लोहे के दीपक वर्जित माने जाते हैं (सिवाय शनि पूजा के)। मिट्टी, पीतल, चांदी या तांबे के दीपक ही श्रेष्ठ हैं।
5. शाम को दीपक क्यों जलाते हैं?
संध्या काल (गोधूलि) दिन और रात का मिलन समय है। इस समय वातावरण में 'तमस' (Darkness/Negativity) हावी होने लगता है। दीपक का 'सत्व' (Light) उस तमस को नष्ट कर घर की रक्षा करता है।
6. क्या पुरुष यह पाठ कर सकते हैं?
हाँ। श्लोक 8 में कहा गया है - 'देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्' - अर्थात आपकी (दीपलक्ष्मी की) कृपा प्राप्त पुरुषों के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। अतः पुरुष भी स्वास्थ्य और ऐश्वर्य के लिए इसका पाठ अवश्य करें।
7. दीपक के नीचे क्या रखें?
दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, इससे पृथ्वी माता को भार लगता है। उसे किसी छोटी प्लेट, अष्टदल कमल या चावल/गेहूं की ढेरी पर (आसन देकर) ही स्थापित करें।
8. बत्ती (Wick) कैसी होनी चाहिए?
रुई (Cotton) की बत्ती सबसे शुद्ध मानी जाती है। तांत्रिक प्रयोगों में कभी-कभी लाल धागे (मौली) या कमल गट्टे के रेशे की बत्ती प्रयोग की जाती है, लेकिन गृहस्थ जीवन में रुई ही श्रेष्ठ है।