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Bagalamukhi Mata 108 Names – श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः

Bagalamukhi Mata 108 Names – श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः
॥ श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः ॥ (श्रीविष्णुयामले) ॥ अथ नामावलिः ॥ ॐ बगलायै नमः। ॐ विष्णुवनितायै नमः। ॐ विष्णुशङ्करभामिन्यै नमः। ॐ बहुलायै नमः। ॐ वेदमात्रे नमः। ॐ महाविष्णुप्रस्वै नमः। ॐ महामत्स्यायै नमः। ॐ महाकूर्मायै नमः। ॐ महावाराहरूपिण्यै नमः। ॐ नरसिंहप्रियायै नमः। ॐ रम्यायै नमः। ॐ वामनायै नमः। ॐ बटुरूपिण्यै नमः। ॐ जामदग्न्यस्वरूपायै नमः। ॐ रामायै नमः। ॐ रामप्रपूजितायै नमः। ॐ कृष्णायै नमः। ॐ कपर्दिन्यै नमः। ॐ कृत्यायै नमः। ॐ कलहायै नमः। ॐ कलकारिण्यै नमः। ॐ बुद्धिरूपायै नमः। ॐ बुद्धभार्यायै नमः। ॐ बौद्धपाखण्डखण्डिन्यै नमः। ॐ कल्किरूपायै नमः। ॐ कलिहरायै नमः। ॐ कलिदुर्गतिनाशिन्यै नमः। ॐ कोटिसूर्यप्रतीकाशायै नमः। ॐ कोटिकन्दर्पमोहिन्यै नमः। ॐ केवलायै नमः। ॐ कठिनायै नमः। ॐ काल्यै नमः। ॐ कलायै नमः। ॐ कैवल्यदायिन्यै नमः। ॐ केशव्यै नमः। ॐ केशवाराध्यायै नमः। ॐ किशोर्यै नमः। ॐ केशवस्तुतायै नमः। ॐ रुद्ररूपायै नमः। ॐ रुद्रमूर्त्यै नमः। ॐ रुद्राण्यै नमः। ॐ रुद्रदेवतायै नमः। ॐ नक्षत्ररूपायै नमः। ॐ नक्षत्रायै नमः। ॐ नक्षत्रेशप्रपूजितायै नमः। ॐ नक्षत्रेशप्रियायै नमः। ॐ नित्यायै नमः। ॐ नक्षत्रपतिवन्दितायै नमः। ॐ नागिन्यै नमः। ॐ नागजनन्यै नमः। ॐ नागराजप्रवन्दितायै नमः। ॐ नागेश्वर्यै नमः। ॐ नागकन्यायै नमः। ॐ नागर्यै नमः। ॐ नगात्मजायै नमः। ॐ नगाधिराजतनयायै नमः। ॐ नगराजप्रपूजितायै नमः। ॐ नवीननीरदायै नमः। ॐ पीतायै नमः। ॐ श्यामायै नमः। ॐ सौन्दर्यकारिण्यै नमः। ॐ रक्तायै नमः। ॐ नीलायै नमः। ॐ घनायै नमः। ॐ शुभ्रायै नमः। ॐ श्वेतायै नमः। ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः। ॐ सुन्दर्यै नमः। ॐ सौभगायै नमः। ॐ सौम्यायै नमः। ॐ स्वर्णभायै नमः। ॐ स्वर्गतिप्रदायै नमः। ॐ रिपुत्रासकर्यै नमः। ॐ रेखायै नमः। ॐ शत्रुसंहारकारिण्यै नमः। ॐ भामिन्यै नमः। ॐ मायायै नमः। ॐ स्तम्भिन्यै नमः। ॐ मोहिन्यै नमः। ॐ शुभायै नमः। ॐ रागद्वेषकर्यै नमः। ॐ रात्र्यै नमः। ॐ रौरवध्वंसकारिण्यै नमः। ॐ यक्षिण्यै नमः। ॐ सिद्धनिवहायै नमः। ॐ सिद्धेशायै नमः। ॐ सिद्धिरूपिण्यै नमः। ॐ लङ्कापतिध्वंसकर्यै नमः। ॐ लङ्केशरिपुवन्दितायै नमः। ॐ लङ्कानाथकुलहरायै नमः। ॐ महारावणहारिण्यै नमः। ॐ देवदानवसिद्धौघपूजितायै नमः। ॐ परमेश्वर्यै नमः। ॐ पराणुरूपायै नमः। ॐ परमायै नमः। ॐ परतन्त्रविनाशिन्यै नमः। ॐ वरदायै नमः। ॐ वरदाराध्यायै नमः। ॐ वरदानपरायणायै नमः। ॐ वरदेशप्रियायै नमः। ॐ वीरायै नमः। ॐ वीरभूषणभूषितायै नमः। ॐ वसुदायै नमः। ॐ बहुदायै नमः। ॐ वाण्यै नमः। ॐ ब्रह्मरूपायै नमः। ॐ वराननायै नमः। ॐ बलदायै नमः। ॐ पीतवसनायै नमः। ॐ पीतभूषणभूषितायै नमः। ॐ पीतपुष्पप्रियायै नमः। ॐ पीतहारायै नमः। ॐ पीतस्वरूपिण्यै नमः। ॥ इति श्रीविष्णुयामले नारदविष्णुसंवादे श्रीबगला-अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥

माँ बगलामुखी 108 नाम (Bagalamukhi Mata 108 Names) — परिचय (Introduction)

श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः (Sri Bagalamukhi Ashtottara Shatanamavali) माँ पीताम्बरा के १०८ कल्याणकारी नामों का संग्रह है। ये नाम 'श्री विष्णु यामल तंत्र' (Vishnu Yamala Tantra) से लिए गए हैं।

'नामावलिः' का अर्थ है नामों की श्रृंखला। इसमें प्रत्येक नाम के साथ 'ॐ' और अंत में 'नमः' लगाया जाता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से देवी के अर्चन (Archana - Offering flowers/kumkum) के लिए किया जाता है। भक्तजन एक-एक नाम का उच्चारण करते हुए माँ को पुष्प या हल्दी अर्पित करते हैं।

यह पाठ विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, अदालती मामलों (Court Cases) में सफलता पाने, और जीवन की बाधाओं को 'स्तम्भित' (रोकने) के लिए किया जाता है।

पाठ के लाभ (Benefits)

माँ बगलामुखी के इन 108 नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • शत्रु बाधा निवारण: यह पाठ शत्रुओं की बुरी नजर, षड्यंत्र और तांत्रिक प्रयोगों को नष्ट करता है। ("रिपुत्रासकर्यै नमः")
  • वाद-विवाद में विजय: कोर्ट-कचहरी, मुकदमे या किसी भी विवाद में साधक की जीत सुनिश्चित होती है।
  • स्तम्भन शक्ति: यह पाठ विरोधियों की वाणी और बुद्धि को स्तम्भित कर देता है, जिससे वे साधक का अहित नहीं कर पाते। ("स्तम्भिन्यै नमः")
  • सुख-समृद्धि: यह केवल उग्र साधना नहीं है, बल्कि 'सौभाग्यदायिन्यै नमः' के रूप में यह धन, यश और पारिवारिक सुख भी प्रदान करती है।

पाठ विधि एवं अर्चन (Recitation & Archana Method)

नामावलि का पाठ करते समय माँ का अर्चन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

सरल विधि

  • समय: नवरात्रि, गुरुवार, अष्टमी या चतुर्दशी तिथि विशेष फलदायी है। रात्रि काल (9 बजे के बाद) उत्तम है।
  • वस्त्र: पूजा के समय पीले वस्त्र (Yellow Clothes) धारण करें।
  • आसन: पीला आसन प्रयोग करें।
  • अर्चन सामग्री: पीले फूल (कनेर या गेंदा) या हल्दी की गांठे (Turmeric pieces) अर्पित करें।
  • प्रक्रिया: "ॐ [नाम] नमः" बोलते हुए एक फूल या हल्दी का टुकड़ा माँ के चरणों या यंत्र पर अर्पित करें।
  • माला: यदि केवल पाठ कर रहे हैं (बिना अर्चन), तो हल्दी की माला (Haldi Mala) का प्रयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. स्तोत्र और नामावलि में क्या अंतर है?

'स्तोत्र' (Stotra) श्लोकबद्ध काव्य रचना होती है जिसमें देवता के गुणगान होते हैं। 'नामावलि' (Namavali) में केवल नामों की सूची होती है (जैसे "ॐ ... नमः"), जिसे मुख्य रूप से पूजा या अर्चन के लिए प्रयोग किया जाता है।

2. माँ बगलामुखी के अर्चन में कौन से फूल प्रिय हैं?

माँ पीताम्बरा पीत (पीले) रंग की प्रिय हैं। इसलिए पीले कनेर (Yellow Oleander) या गेंदा (Marigold) के फूल अर्चन के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।

3. क्या महिलाएं यह पाठ कर सकती हैं?

जी हाँ, भक्ति भाव से गृहस्थ महिलाएं भी यह पाठ कर सकती हैं। वे इसे सामान्य पूजा की तरह दिन में भी कर सकती हैं।

4. 'स्तम्भन' का क्या अर्थ है?

'स्तम्भन' (Stambhana) का अर्थ है 'रोकना' या 'जड़ कर देना'। जब कोई शत्रु अकारण परेशान कर रहा हो, तो माँ बगलामुखी की कृपा से उसकी बुरी बुद्धि और कृत्यों का स्तम्भन हो जाता है।

5. क्या 108 नाम पाठ के लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य है?

सामान्य भक्ति और नित्य पूजा के लिए नामावलि पाठ बिना दीक्षा के भी किया जा सकता है। अत्यंत जटिल कामनाओं या तांत्रिक प्रयोगों के लिए गुरु मार्गदर्शन लेना चाहिए।