Sri Shyamala Ashtottara Shatanamavali 2 – श्री श्यामलाष्टोत्तरशतनामावली २

श्री श्यामलाष्टोत्तरशतनामावली २ — विस्तृत परिचय
इस नामावली की विशेषताएं (प्रथम से भिन्नता)
नामावली पाठ के लाभ
- सर्व वशीकरण: सात वशीकरण नामों के पाठ से व्यक्तित्व में अद्भुत आकर्षण उत्पन्न होता है। राजनेताओं, प्रशासकों और जनसम्पर्क कार्यों में विशेष लाभ।
- सर्व काम-सिद्धि-सम्पत्ति: 'सर्वकामप्रदा, सर्वसिद्धिप्रदा, सर्वसम्पत्प्रदा' — तीनों सर्वोत्कृष्ट वरदान एक ही नामावली में।
- महादारिद्र्य नाश: 'महादारिद्र्यसंहर्त्र्यै' — महा दारिद्र्य (घोर निर्धनता) को भी नष्ट करने वाली। गंभीर आर्थिक संकट में अत्यंत प्रभावी।
- सर्व पाप नाश: 'सर्वपापघ्न्यै' और 'महापातकदाहिन्यै' — सभी पापों और महापातकों को दग्ध (जला) करने वाली। प्रायश्चित्त हेतु अत्यंत प्रभावशाली।
- वाक् शक्ति: 'वाग्देव्यै' (वाणी की देवी) और 'वाण्यै' (सरस्वती स्वरूपा) — वाणी और अभिव्यक्ति में प्रभुत्व।
- अलक्ष्मी विनाश: 'अलक्ष्मीविनाशिन्यै' — अभाग्य, दुर्भाग्य और अशुभता का नाश। घर-परिवार में शुभत्व लाने वाली।
- भक्त रक्षा: 'भक्ताऽभयप्रदायै' (भक्तों को अभय देने वाली), 'भक्तानां मङ्गलप्रदायै' (भक्तों को मंगल देने वाली), 'भक्ताष्टैश्वर्यदायै' (भक्तों को अष्ट ऐश्वर्य देने वाली)।
- महामुक्ति: 'महामुक्तिप्रदायै' और 'चिदानन्दात्मिकायै' — भोग और मोक्ष दोनों एक साथ प्रदान करने वाली।
पाठ विधि और विशेष अनुष्ठान
- पुष्पार्चना: माँ श्यामला की प्रतिमा या चित्र के समक्ष 108 पुष्प रखें। प्रत्येक नाम बोलते हुए एक-एक पुष्प अर्पित करें।
- उत्तम पुष्प: नील कमल ('नीलोत्पलप्रख्यायै'), कदम्ब ('कदम्बवनसंस्थितायै') या हरे-नीले रंग के पुष्प विशेष उपयुक्त हैं। लाल पुष्प भी चढ़ाए जा सकते हैं।
- समय: प्रातःकाल या सायंकाल। शुक्रवार सर्वोत्तम है। अमावस्या और पूर्णिमा भी विशेष शुभ।
- विशेष अनुष्ठान: वशीकरण सिद्धि हेतु 21 दिन, दारिद्र्य नाश हेतु 41 दिन, और सर्वकामना पूर्ति हेतु 108 दिन तक प्रतिदिन नामावली पाठ का विधान है।
- दोनों नामावलियों का संयुक्त पाठ: अधिक प्रभावी साधना हेतु प्रथम नामावली (मन्त्रिणी स्वरूप) और फिर इस द्वितीय नामावली (जगद्धात्री स्वरूप) का क्रमशः पाठ करें — इससे देवी के सम्पूर्ण स्वरूप की अर्चना होती है।
- दिशा और आसन: पूर्व या उत्तर मुख, हरे या लाल आसन पर बैठें।
- दीक्षा: नामावली पाठ के लिए विशेष दीक्षा आवश्यक नहीं। भक्ति भाव से कोई भी साधक पाठ कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यह द्वितीय नामावली प्रथम नामावली से कैसे भिन्न है?
प्रथम नामावली श्रीविद्या परम्परा में श्यामला के मन्त्रिणी स्वरूप पर केन्द्रित है — वहाँ वीणावती, सङ्गीतरसिका, मन्त्रिणी, कुण्डलिनी जैसे नाम हैं। यह द्वितीय नामावली देवी के जगद्धात्री, आदिशक्ति, त्रिशक्ति और विशेष रूप से वशीकरण स्वरूप पर प्रकाश डालती है। इसमें सात वशीकरण नाम और पाँच वर्ण-वर्णन नाम हैं जो प्रथम में नहीं मिलते।
2. दोनों नामावलियों का एक साथ पाठ करना चाहिए या अलग-अलग?
दोनों विधि उत्तम हैं। यदि समय हो तो पहले प्रथम नामावली (मन्त्रिणी स्वरूप) फिर द्वितीय (जगद्धात्री स्वरूप) का क्रमशः पाठ करें — इससे देवी के सम्पूर्ण स्वरूप की अर्चना होती है। यदि समय सीमित हो तो अपनी कामना अनुसार चुनें — संगीत-विद्या हेतु प्रथम, वशीकरण-ऐश्वर्य हेतु द्वितीय।
3. नामावली में सात वशीकरण नाम कौन से हैं?
1. स्त्रीवशङ्कर्यै — स्त्रियों को वश करने वाली, 2. नरवशङ्कर्यै — पुरुषों को वश करने वाली, 3. देवमोहिन्यै — देवताओं को मोहित करने वाली, 4. सर्वसत्त्ववशङ्कर्यै — समस्त प्राणियों को वश करने वाली, 5. सर्वलोकवशङ्कर्यै — सब लोकों को वश करने वाली, 6. दिव्यनारीवशङ्कर्यै — दिव्य नारियों को वश करने वाली, 7. राजवश्यकर्यै — राजाओं को वश करने वाली।
4. 'त्रिशक्ति' नामों का क्या महत्व है?
'ब्रह्मशक्त्यै, विष्णुशक्त्यै, शिवशक्त्यै' — ये तीन नाम बताते हैं कि श्यामला त्रिमूर्ति की शक्ति स्वरूपा हैं। ब्रह्मा सृष्टि करते हैं — उनकी शक्ति श्यामला, विष्णु पालन करते हैं — उनकी शक्ति श्यामला, शिव संहार करते हैं — उनकी शक्ति श्यामला। अगले तीन नामों में वे स्वयं ब्रह्मरूपा, विष्णुरूपा, शिवरूपा कही गई हैं — अर्थात् शक्ति ही शक्तिमान भी है।
5. 'महादारिद्र्यसंहर्त्र्यै' — यह नाम कितना प्रभावशाली है?
यह अत्यंत शक्तिशाली नाम है। 'महा' = बड़ा/घोर, 'दारिद्र्य' = निर्धनता, 'संहर्त्री' = संहार करने वाली। अर्थात् घोर से घोर दरिद्रता को भी नष्ट करने वाली। गंभीर आर्थिक संकट, ऋण भार या व्यापार में हानि से पीड़ित भक्तों को इस नामावली का नियमित पाठ विशेष राहत देता है।
6. 'राजमातङ्ग्यै' — अंतिम नाम का क्या विशेष है?
नामावली का अंतिम (108वाँ) नाम है 'राजमातङ्ग्यै' — राजाओं की मातङ्गी। यह नाम सम्पूर्ण नामावली का सार है। 'राजमातङ्गी' बताता है कि ये साधारण मातङ्गी नहीं, अपितु राजसत्ता और प्रभुत्व की अधिष्ठात्री हैं। राजनीतिज्ञों, शासकों और नेतृत्व पदों पर कार्य करने वालों को यह नामावली विशेष सफलता देती है।
7. देवी के वर्ण वर्णन वाले पाँच नाम कौन से हैं?
1. महाकृष्णायै — गहरे कृष्ण (काले) वर्ण वाली, 2. नीलोत्पलप्रख्यायै — नील कमल जैसी आभा वाली, 3. मरकतप्रभायै — पन्ने (मरकत रत्न) जैसी हरी प्रभा वाली, 4. नीलमेघप्रतीकाशायै — नीले मेघ जैसी, 5. इन्द्रनीलसमप्रभायै — इन्द्रनील (नीलम) रत्न जैसी कान्ति। ये नाम श्यामला के श्याम-नील-हरित वर्ण का काव्यात्मक वर्णन करते हैं।
8. क्या बिना दीक्षा के यह नामावली पढ़ सकते हैं?
हाँ, नामावली पाठ और पुष्पार्चना के लिए विशेष दीक्षा आवश्यक नहीं। यह मन्त्र जप से भिन्न है — नामों से अर्चना भक्ति भाव से कोई भी कर सकता है। 'मधुमांसबलिप्रियायै' जैसे तांत्रिक विधान केवल दीक्षित साधकों के लिए हैं, सामान्य भक्त केवल पुष्प और फल से पूजा करें।
9. नामावली का पाठ कब और कितने दिन करना चाहिए?
प्रातःकाल या सायंकाल उत्तम है। शुक्रवार सर्वोत्तम दिन है। नवरात्रि का नवमा दिन, गुप्त नवरात्रि, अमावस्या और पूर्णिमा विशेष शुभ हैं। विशेष कामना पूर्ति हेतु — वशीकरण 21 दिन, दारिद्र्य नाश 41 दिन, सर्वकामना 108 दिन तक प्रतिदिन पाठ करें।
10. 'भक्ताष्टैश्वर्यदायै' — अष्ट ऐश्वर्य क्या हैं?
यह नाम बताता है कि देवी भक्तों को आठ प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करती हैं — अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। ये योग और तंत्र की आठ महासिद्धियाँ हैं जो साधक को ब्रह्माण्ड पर अधिकार प्रदान करती हैं।