Sri Kamakshi Ashtottara Shatanamavali – श्री कामाक्ष्यष्टोत्तरशतनामावली

॥ श्री कामाक्ष्यष्टोत्तरशतनामावली ॥
॥ नामावली ॥
ॐ कालकण्ठ्यै नमः ।
ॐ त्रिपुरायै नमः ।
ॐ बालायै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ सुन्दर्यै नमः ।
ॐ सौभाग्यवत्यै नमः ।
ॐ क्लीङ्कार्यै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः ।
ॐ ऐङ्कार्यै नमः ।
ॐ स्कन्दजनन्यै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ पञ्चदशाक्षर्यै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यमोहनाधीशायै नमः ।
ॐ सर्वाशापूरवल्लभायै नमः ।
ॐ सर्वसङ्क्षोभणाधीशायै नमः ।
ॐ सर्वसौभाग्यवल्लभायै नमः ।
ॐ सर्वार्थसाधकाधीशायै नमः ।
ॐ सर्वरक्षाकराधिपायै नमः ।
ॐ सर्वरोगहराधीशायै नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाधिपायै नमः ।
ॐ सर्वानन्दमयाधीशायै नमः ।
ॐ योगिनीचक्रनायिकायै नमः ।
ॐ भक्तानुरक्तायै नमः ।
ॐ रक्ताङ्ग्यै नमः ।
ॐ शङ्करार्धशरीरिण्यै नमः ।
ॐ पुष्पबाणेक्षुकोदण्डपाशाङ्कुशकरायै नमः ।
ॐ उज्ज्वलायै नमः ।
ॐ सच्चिदानन्दलहर्यै नमः ।
ॐ श्रीविद्यायै नमः ।
ॐ परमेश्वर्यै नमः ।
ॐ अनङ्गकुसुमोद्यानायै नमः ।
ॐ चक्रेश्वर्यै नमः ।
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः ।
ॐ गुप्तायै नमः ।
ॐ गुप्ततरायै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ nityaक्लिन्नायै नमः ।
ॐ मदद्रवायै नमः ।
ॐ मोहिन्यै नमः ।
ॐ परमानन्दायै नमः ।
ॐ कामेश्यै नमः ।
ॐ तरुणीकलायै नमः ।
ॐ कलावत्यै नमः ।
ॐ भगवत्यै नमः ।
ॐ पद्मरागकिरीटायै नमः ।
ॐ रक्तवस्त्रायै नमः ।
ॐ रक्तभूषायै नमः ।
ॐ रक्तगन्धानुलेपनायै नमः ।
ॐ सौगन्धिकलसद्वेण्यै नमः ।
ॐ मन्त्रिण्यै नमः ।
ॐ तन्त्ररूपिण्यै नमः ।
ॐ तत्त्वमय्यै नमः ।
ॐ सिद्धान्तपुरवासिन्यै नमः ।
ॐ श्रीमत्यै नमः ।
ॐ चिन्मय्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ कौलिन्यै नमः ।
ॐ परदेवतायै नमः ।
ॐ कैवल्यरेखायै नमः ।
ॐ वशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ सर्वमातृकायै नमः ।
ॐ विष्णुस्वस्रे नमः ।
ॐ वेदमय्यै नमः ।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः ।
ॐ किङ्करीभूतगीर्वाण्यै नमः ।
ॐ सुतवापिविनोदिन्यै नमः ।
ॐ मणिपूरसमासीनायै नमः ।
ॐ अनाहताब्जवासिन्यै नमः ।
ॐ विशुद्धिचक्रनिलयायै नमः ।
ॐ आज्ञापद्मनिवासिन्यै नमः ।
ॐ अष्टत्रिंशत्कलामूर्त्यै नमः ।
ॐ सुषुम्नाद्वारमध्यगायै नमः ।
ॐ योगीश्वरमनोध्येयायै नमः ।
ॐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ चतुर्भुजायै नमः ।
ॐ चन्द्रचूडायै नमः ।
ॐ पुराणागमरूपिण्यै नमः ।
ॐ ओङ्कार्यै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ पञ्चप्रणवरूपिण्यै नमः ।
ॐ भूतेश्वर्यै नमः ।
ॐ भूतमय्यै नमः ।
ॐ पञ्चाशत्पीठरूपिण्यै नमः ।
ॐ षोडान्यासमहारूपिण्यै नमः ।
ॐ कामाक्ष्यै नमः ।
ॐ दशमातृकायै नमः ।
ॐ आधारशक्त्यै नमः ।
ॐ अरुणायै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ त्रिपुरभैरव्यै नमः ।
ॐ रहःपूजासमालोलायै नमः ।
ॐ रहोयन्त्रस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ त्रिकोणमध्यनिलयायै नमः ।
ॐ बिन्दुमण्डलवासिन्यै नमः ।
ॐ वसुकोणपुरावासायै नमः ।
ॐ दशारद्वयवासिन्यै नमः ।
ॐ चतुर्दशारचक्रस्थायै नमः ।
ॐ वसुपद्मनिवासिन्यै नमः ।
ॐ स्वराब्जपत्रनिलयायै नमः ।
ॐ वृत्तत्रयवासिन्यै नमः ।
ॐ चतुरस्रस्वरूपास्यायै नमः ।
ॐ नवचक्रस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ महानित्यायै नमः ।
ॐ विजयायै नमः ।
ॐ श्रीराजराजेश्वर्यै नमः ।
॥ इति श्री कामाक्ष्यष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
श्री कामाक्ष्यष्टोत्तरशतनामावली — विस्तृत परिचय एवं दार्शनिक स्वरूप (Introduction)
श्री कामाक्ष्यष्टोत्तरशतनामावली (Sri Kamakshi Ashtottara Shatanamavali) सनातन धर्म के शाक्त संप्रदाय और विशेष रूप से "श्री विद्या" (Sri Vidya) पद्धति की एक अत्यंत पवित्र स्तुति है। भगवती कामाक्षी, जो तमिलनाडु के कांचीपुरम् में साक्षात् विग्रह रूप में विराजमान हैं, उन्हें ललिता त्रिपुरसुन्दरी का ही सौम्य और परमोच्च स्वरूप माना जाता है। "कामाक्षी" शब्द का अर्थ अत्यंत गहन है — "का" अर्थात् सरस्वती, "मा" अर्थात् लक्ष्मी, और "अक्षी" अर्थात् नेत्र। अतः माँ कामाक्षी वह पराशक्ति हैं जिनकी आँखों में ज्ञान और ऐश्वर्य का पूर्ण सामंजस्य है। १०८ नामों का यह संकलन भक्त को देवी के उस स्वरूप से जोड़ता है जो प्रेम के माध्यम से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
पौराणिक संदर्भों और ललिता उपाख्यान के अनुसार, कांचीपुरम् को शक्ति पीठों में "नाभि स्थान" (Navel Center) माना जाता है। यहाँ माँ कामाक्षी "बिलकाश" (Inner Space) में विराजमान हैं। कामाक्ष्यष्टोत्तरशतनामावली में प्रयुक्त प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट तांत्रिक और आध्यात्मिक गुण को दर्शाता है। उदाहरण के तौर पर, "पञ्चदशाक्षर्यै नमः" नाम उन्हें श्री विद्या के पवित्र १५ अक्षरों वाले मंत्र (Panchadashi Mantra) का साक्षात् स्वरूप बताता है। वहीं "सच्चिदानन्दलहर्यै नमः" नाम उन्हें सत्य, चेतना और आनंद की अनंत लहर के रूप में प्रतिष्ठित करता है। ये १०८ नाम वास्तव में १०८ मंत्र हैं जो साधक के अंतःकरण को शोधित करते हैं।
दार्शनिक रूप से, माँ कामाक्षी "इच्छा शक्ति" (Will Power) की अधिष्ठात्री हैं। उनके एक हाथ में 'पाश' (मोह का नियंत्रण), दूसरे में 'अंकुश' (अहंकार का दमन), तीसरे में 'गन्ने का धनुष' (मन) और चौथे में 'पुष्प बाण' (पंच तन्मात्राएं) हैं। नामावली के १४ से २२ तक के नाम सीधे तौर पर श्रीचक्र (Shri Chakra) के नौ आवरणों की स्वामिनियों का आह्वान करते हैं, जैसे — "त्रैलोक्यमोहनाधीशायै" और "सर्वानन्दमयाधीशायै"। यह पाठ साधक को मानसिक द्वंद्वों से ऊपर उठाकर 'सामरस्य' (Perfect Balance) की स्थिति में ले जाता है। १०८ की संख्या ब्रह्मांडीय चेतना और मानव शरीर के १०८ मुख्य ऊर्जा बिंदुओं (मर्म) का प्रतीक है।
वर्तमान कलयुग के इस अशांत और भौतिकवादी समय में, माँ कामाक्षी की नामावली का पाठ एक "अभेद दिव्य कवच" की तरह कार्य करता है। जब हम प्रत्येक नाम के आरंभ में ॐ और अंत में "नमः" (समर्पण) जोड़ते हैं, तो वह नाम एक जाग्रत मंत्र बन जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य ने स्वयं कांचीपुरम् में 'श्री चक्र' की स्थापना की थी और माँ की आराधना की थी। यह पाठ न केवल वाणी को शुद्ध करता है, बल्कि जातक के परिवार में सुख, समृद्धि और आरोग्य का संचार करता है। माँ कामाक्षी की कृपा से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और अज्ञानता का समूल नाश होता है, और उसे उस 'कैवल्य' (Moksha) की प्राप्ति होती है जो हर आध्यात्मिक साधक का अंतिम लक्ष्य है।
विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व एवं श्री चक्र का संबंध (Significance)
कामाक्षी नामावली का महत्व इसलिए सर्वोपरि है क्योंकि यह १८ नामों के माध्यम से श्री चक्र के नौ आवरणों (Nava-Avarana) की शक्तियों को एक ही पाठ में समाहित कर लेती है। इसमें देवी को "त्रिपुरसुन्दरी" और "राजराजेश्वरी" कहा गया है, जो उनकी सर्वोच्च सत्ता को सिद्ध करता है।
विशेष रूप से उन नामों का जप जैसे "सुषुम्नाद्वारमध्यगायै नमः" साधक को कुण्डलिनी शक्ति के जागरण में सहायता करता है। यह नामावली जातक के जीवन में "श्री" (लक्ष्मी) और "धी" (सरस्वती) का अद्भुत संगम स्थापित करती है। कांची कामाकोटि पीठ की परंपरा में इस नामावली का अर्चन नित्य अनिवार्य माना गया है।
फलश्रुति: नामावली पाठ के अभूतपूर्व लाभ (Benefits)
शास्त्रों और कांची के आचार्यों के अनुसार, माँ कामाक्षी की नामावली के नित्य पाठ से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
- अखंड सौभाग्य और ऐश्वर्य: "सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै" — माँ की कृपा से जातक के घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं रहती।
- वैवाहिक सुख और शांति: "शङ्करार्धशरीरिण्यै" — यह पाठ पति-पत्नी के बीच प्रेम को सुदृढ़ करता है और पारिवारिक कलह को समाप्त करता है।
- मानसिक शांति और मेधा: तनाव और चिंता को दूर कर यह नामावली एकाग्रता और कुशाग्र बुद्धि (Intellect) प्रदान करती है।
- रोग और बाधा निवारण: "सर्वरोगहराधीशायै" — शारीरिक और मानसिक व्याधियों को दूर कर जातक को उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है।
- मोक्ष की पात्रता: "कैवल्यरेखायै" — निरंतर अर्चन से जीव के अज्ञान का नाश होता है और उसे आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
पाठ विधि एवं अर्चना विधान (Ritual Method)
माँ कामाक्षी प्रेम और सौंदर्य की देवी हैं, अतः उनकी पूजा अत्यंत भक्तिमय और सात्विक होनी चाहिए:
साधना के मुख्य नियम:
- समय: प्रातःकाल 'ब्रह्म मुहूर्त' या संध्या वंदन के समय। शुक्रवार (Friday) और पूर्णिमा माँ कामाक्षी के पूजन के लिए विशेष फलदायी हैं।
- शुद्धि: स्नान के पश्चात लाल (Red) या पीले वस्त्र धारण करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- अर्चन सामग्री: १०८ नामों के साथ लाल पुष्प (गुड़हल या गुलाब), कुङ्कुम या सिंदूर माँ के चित्र या श्री चक्र पर अर्पित करें।
- नैवेद्य: देवी को दूध से बनी मिठाई, पोंगल, या फलों का भोग लगाएँ।
- दीप: गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएँ और धूप-दीप से देवी का विधिवत पूजन करें।
विशेष प्रयोग:
- असाध्य कार्य सिद्धि हेतु: लगातार २१ शुक्रवार तक १०८ नामों के साथ "कुमकुम अर्चन" करने से अभीष्ट फल प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. 'कामाक्षी' नाम का वास्तविक अर्थ क्या है?
कामाक्षी का अर्थ है — "वह जिसकी आँखों (अक्षी) में कामनाओं (काम) की देवी सरस्वती और लक्ष्मी का वास है"। यह नाम देवी की पूर्णता को दर्शाता है।
2. क्या कामाक्षी और ललिता त्रिपुरसुन्दरी एक ही हैं?
हाँ, तात्विक रूप से माँ कामाक्षी साक्षात् ललिता त्रिपुरसुन्दरी का ही वह स्वरूप हैं जो कांचीपुरम् में भक्तों पर कृपा करने के लिए विराजमान हैं।
3. कामाक्षी नामावली का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन प्रातःकाल करना सर्वोत्तम है। शुक्रवार, पूर्णिमा और नवरात्रि के नौ दिनों में इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।
4. क्या १०८ नामों के अर्चन के लिए 'कुमकुम' का प्रयोग अनिवार्य है?
अनिवार्य नहीं है, परन्तु माँ कामाक्षी को कुमकुम अर्चन अत्यंत प्रिय है। यदि कुमकुम न हो, तो लाल पुष्प या अक्षत का प्रयोग किया जा सकता है।
5. क्या बिना श्री विद्या दीक्षा के यह नामावली पढ़ सकते हैं?
हाँ, नामावली और स्तोत्र पाठ के लिए सामान्य भक्ति भाव पर्याप्त है। सूक्ष्म तांत्रिक बीजाक्षरों के अनुष्ठान के लिए गुरु दीक्षा श्रेष्ठ है, पर नाम जप कोई भी कर सकता है।
6. 'पञ्चदशाक्षर्यै' नाम का क्या तात्पर्य है?
इसका अर्थ है कि माँ कामाक्षी श्रीविद्या के १५ अक्षरों वाले सिद्ध मंत्र 'पञ्चदशी' का ही मानवीकृत रूप हैं।
7. क्या इस पाठ से वैवाहिक समस्याओं का समाधान होता है?
जी हाँ, माँ कामाक्षी सौभाग्य और प्रेम की अधिष्ठात्री हैं। उनके नाम जप से वैवाहिक संबंधों में मधुरता आती है और बाधाएँ दूर होती हैं।
8. पाठ के दौरान ॐ और नमः क्यों जोड़ा जाता है?
ॐ ब्रह्मांड की मूल ध्वनि है जो मंत्र को शक्ति देती है, और नमः हमारे अहंकार को देवी के चरणों में समर्पित करने का प्रतीक है।
9. कांची कामाकोटि पीठ और इस नामावली का क्या संबंध है?
कांची कामाकोटि पीठ माँ कामाक्षी का प्रधान सेवा केंद्र है, जहाँ आदि गुरु शंकराचार्य ने इस नामावली और श्री विद्या की परंपरा को पुनर्जीवित किया था।
10. क्या बच्चे भी इस नामावली का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, इससे बच्चों की एकाग्रता और बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। माँ कामाक्षी का 'बाला' स्वरूप विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणादायक है।