Sri Devi Khadgamala Namavali – देवी खड्गमाला नामावली

॥ देवी खड्गमाला नामावली ॥
॥ नामावली ॥
ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ हृदयदेव्यै नमः ।
ॐ शिरोदेव्यै नमः ।
ॐ शिखादेव्यै नमः ।
ॐ कवचदेव्यै नमः ।
ॐ नेत्रदेव्यै नमः ।
ॐ अस्त्रदेव्यै नमः ।
ॐ कामेश्वर्यै नमः ।
ॐ भगमालिन्यै नमः ।
ॐ नित्यक्लिन्नायै नमः । ॥ १० ॥
ॐ भेरुण्डायै नमः ।
ॐ वह्निवासिन्यै नमः ।
ॐ महावज्रेश्वर्यै नमः ।
ॐ शिवदूत्यै नमः ।
ॐ त्वरितायै नमः ।
ॐ कुलसुन्दर्यै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ नीलपताकायै नमः ।
ॐ विजयायै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः । ॥ २० ॥
ॐ ज्वालामालिन्यै नमः ।
ॐ चित्रायै नमः ।
ॐ महानित्यायै नमः ।
ॐ परमेश्वरपरमेश्वर्यै नमः ।
ॐ मित्रीशमय्यै नमः ।
ॐ षष्ठीशमय्यै नमः ।
ॐ उड्डीशमय्यै नमः ।
ॐ चर्यानाथमय्यै नमः ।
ॐ लोपामुद्रामय्यै नमः ।
ॐ अगस्त्यमय्यै नमः । ॥ ३० ॥
ॐ कालतापनमय्यै नमः ।
ॐ धर्माचार्यमय्यै नमः ।
ॐ मुक्तकेशीश्वरमय्यै नमः ।
ॐ दीपकलानाथमय्यै नमः ।
ॐ विष्णुदेवमय्यै नमः ।
ॐ प्रभाकरदेवमय्यै नमः ।
ॐ तेजोदेवमय्यै नमः ।
ॐ मनोजदेवमय्यै नमः ।
ॐ कल्याणदेवमय्यै नमः ।
ॐ रत्नदेवमय्यै नमः । ॥ ४० ॥
ॐ वासुदेवमय्यै नमः ।
ॐ श्रीरामानन्दमय्यै नमः ।
ॐ अणिमासिद्ध्यै नमः ।
ॐ लघिमासिद्ध्यै नमः ।
ॐ महिमासिद्ध्यै नमः ।
ॐ ईशित्वसिद्ध्यै नमः ।
ॐ वशित्वसिद्ध्यै नमः ।
ॐ प्राकाम्यसिद्ध्यै नमः ।
ॐ भुक्तिसिद्ध्यै नमः ।
ॐ इच्छासिद्ध्यै नमः । ॥ ५० ॥
ॐ प्राप्तिसिद्ध्यै नमः ।
ॐ सर्वकामसिद्ध्यै नमः ।
ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ माहेश्वर्यै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ वैष्णव्यै नमः ।
ॐ वाराह्यै नमः ।
ॐ माहेन्द्र्यै नमः ।
ॐ चामुण्डायै नमः ।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः । ॥ ६० ॥
ॐ सर्वसङ्क्षोभिण्यै नमः ।
ॐ सर्वविद्राविण्यै नमः ।
ॐ सर्वाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ सर्ववशङ्कर्यै नमः ।
ॐ सर्वोन्मादिन्यै नमः ।
ॐ सर्वमहाङ्कुशायै नमः ।
ॐ सर्वखेचर्यै नमः ।
ॐ सर्वबीजायै नमः ।
ॐ सर्वयोन्यै नमः ।
ॐ सर्वत्रिखण्डायै नमः । ॥ ७० ॥
ॐ त्रैलोक्यमोहनचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ प्रकटयोगिन्यै नमः ।
ॐ कामाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ बुद्ध्याकर्षिण्यै नमः ।
ॐ अहङ्काराकर्षिण्यै नमः ।
ॐ शब्दाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ स्पर्शाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ रूपाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ रसाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ गन्धाकर्षिण्यै नमः । ॥ ८० ॥
ॐ चित्ताकर्षिण्यै नमः ।
ॐ धैर्याकर्षिण्यै नमः ।
ॐ स्मृत्याकर्षिण्यै नमः ।
ॐ नामाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ बीजाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ आत्माकर्षिण्यै नमः ।
ॐ अमृताकर्षिण्यै नमः ।
ॐ शरीराकर्षिण्यै नमः ।
ॐ सर्वाशापरिपूरकचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ गुप्तयोगिन्यै नमः । ॥ ९० ॥
ॐ अनङ्गकुसुमायै नमः ।
ॐ अनङ्गमेखलायै नमः ।
ॐ अनङ्गमदनायै नमः ।
ॐ अनङ्गमदनातुरायै नमः ।
ॐ अनङ्गरेखायै नमः ।
ॐ अनङ्गवेगिन्यै नमः ।
ॐ अनङ्गाङ्कुशायै नमः ।
ॐ अनङ्गमालिन्यै नमः ।
ॐ सर्वसङ्क्षोभणचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ गुप्ततरयोगिन्यै नमः । ॥ १०० ॥
ॐ सर्वसङ्क्षोभिण्यै नमः ।
ॐ सर्वविद्राविण्यै नमः ।
ॐ सर्वाकर्षिण्यै नमः ।
ॐ सर्वाह्लादिन्यै नमः ।
ॐ सर्वसम्मोहिन्यै नमः ।
ॐ सर्वस्तम्भिन्यै नमः ।
ॐ सर्वजृम्भिण्यै नमः ।
ॐ सर्ववशङ्कर्यै नमः ।
ॐ सर्वरञ्जिन्यै नमः ।
ॐ सर्वोन्मादिन्यै नमः । ॥ ११० ॥
ॐ सर्वार्थसाधिन्यै नमः ।
ॐ सर्वसम्पत्तिपूरण्यै नमः ।
ॐ सर्वमन्त्रमय्यै नमः ।
ॐ सर्वद्वन्द्वक्षयङ्कर्यै नमः ।
ॐ सर्वसौभाग्यदायकचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ सम्प्रदाययोगिन्यै नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदायै नमः ।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायै नमः ।
ॐ सर्वप्रियङ्कर्यै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलकारिण्यै नमः । ॥ १२० ॥
ॐ सर्वकामप्रदायै नमः ।
ॐ सर्वदुःखविमोचिन्यै नमः ।
ॐ सर्वमृत्युप्रशमन्यै नमः ।
ॐ सर्वविघ्ननिवारिण्यै नमः ।
ॐ सर्वाङ्गसुन्दर्यै नमः ।
ॐ सर्वसौभाग्यदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वार्थसाधकचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ कुलोत्तीर्णयोगिन्यै नमः ।
ॐ सर्वज्ञायै नमः ।
ॐ सर्वशक्त्यै नमः । ॥ १३० ॥
ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वज्ञानमय्यै नमः ।
ॐ सर्वव्याधिविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वाधारस्वरूपायै नमः ।
ॐ सर्वपापहरायै नमः ।
ॐ सर्वानन्दमय्यै नमः ।
ॐ सर्वरक्षास्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ सर्वेप्सितफलप्रदायै नमः ।
ॐ सर्वरक्षाकरचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ निगर्भयोगिन्यै नमः । ॥ १४० ॥
ॐ वशिन्यै नमः ।
ॐ कामेश्वर्यै नमः ।
ॐ मोदिन्यै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ अरुणायै नमः ।
ॐ जयिन्यै नमः ।
ॐ सर्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ कौलिन्यै नमः ।
ॐ सर्वरोगहरचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ रहस्ययोगिन्यै नमः । ॥ १५० ॥
ॐ बाणिन्यै नमः ।
ॐ चापिन्यै नमः ।
ॐ पाशिन्यै नमः ।
ॐ अङ्कुशिन्यै नमः ।
ॐ महाकामेश्वर्यै नमः ।
ॐ महावज्रेश्वर्यै नमः ।
ॐ महाभगमालिन्यै नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ अतिरहस्ययोगिन्यै नमः ।
ॐ श्रीश्रीमहाभट्टारिकायै नमः । ॥ १६० ॥
ॐ सर्वानन्दमयचक्रस्वामिन्यै नमः ।
ॐ परापररहस्ययोगिन्यै नमः ।
ॐ त्रिपुरायै नमः ।
ॐ त्रिपुरेश्यै नमः ।
ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ त्रिपुरवासिन्यै नमः ।
ॐ त्रिपुराश्रियै नमः ।
ॐ त्रिपुरमालिन्यै नमः ।
ॐ त्रिपुरासिद्धायै नमः ।
ॐ त्रिपुराम्बायै नमः । ॥ १७० ॥
ॐ महात्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ महामहेश्वर्यै नमः ।
ॐ महामहाराज्ञ्यै नमः ।
ॐ महामहाशक्त्यै नमः ।
ॐ महामहागुप्तायै नमः ।
ॐ महामहाज्ञप्तायै नमः ।
ॐ महामहानन्दायै नमः ।
ॐ महामहास्पन्दायै नमः ।
ॐ महामहाशययै नमः ।
ॐ महामहाश्रीचक्रनगरसाम्राज्ञ्यै नमः । ॥ १८० ॥
॥ इति देवी खड्गमाला नामावली सम्पूर्णा ॥
देवी खड्गमाला नामावली — तात्विक परिचय एवं आध्यात्मिक दर्शन (Introduction)
देवी खड्गमाला नामावली (Sri Devi Khadgamala Namavali) सनातन धर्म की "श्रीविद्या" परंपरा का वह अनमोल रत्न है जिसे आत्म-साक्षात्कार का सबसे सुगम और त्वरित मार्ग माना गया है। यह नामावली साक्षात् माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी के दिव्य स्वरूप और उनकी अनंत शक्तियों का एक ब्रह्मांडीय विन्यास है। "खड्गमाला" शब्द दो गहरे अर्थों को समेटे हुए है — "खड्ग" अर्थात् वह ज्ञान रूपी तलवार जो अज्ञान, अहंकार और भ्रम के बंधनों को काट देती है, और "माला" अर्थात् उन १८० दिव्य शक्तियों की श्रृंखला जो श्रीचक्र (Sri Chakra) के विभिन्न आवरणों में स्थित हैं।
श्रीविद्या साधना में "श्रीचक्र" को ब्रह्मांड का नक्शा और मानव शरीर का सूक्ष्म रूप माना जाता है। श्रीचक्र में नौ आवरण होते हैं, और प्रत्येक आवरण की अपनी अधिष्ठात्री देवी (Yogini) होती है। देवी खड्गमाला नामावली का अर्चन करना वास्तव में श्रीचक्र की नौ परतों की मानसिक यात्रा करना है। यह नामावली साधक को बाहरी संसार से हटाकर 'बिंदु' (Center Point) की ओर ले जाती है, जहाँ शिव और शक्ति का पूर्ण मिलन होता है। प्रत्येक नाम के साथ जब हम ॐ (ब्रह्मांडीय नाद) और नमः (समर्पण) जोड़ते हैं, तो वह नाम एक जाग्रत तांत्रिक मंत्र में बदल जाता है।
दार्शनिक रूप से, खड्गमाला नामावली का पाठ "नवावरण पूजा" (Nava-Avarana Puja) का संक्षिप्त और अत्यधिक प्रभावशाली रूप है। जो साधक घंटों तक चलने वाली श्रीचक्र पूजा करने में असमर्थ हैं, उनके लिए यह नामावली वही फल प्रदान करती है। इसमें प्रयुक्त नाम जैसे "त्रैलोक्यमोहनचक्रस्वामिन्यै" और "सर्वानन्दमयचक्रस्वामिन्यै" साधक को भौतिक जगत के आकर्षणों से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक आनंद की उच्चतम अवस्था तक पहुँचाते हैं। यह नामावली न केवल देवी की स्तुति है, बल्कि यह जातक के भीतर सुप्त "कुंडलिनी शक्ति" को जाग्रत करने का एक वैज्ञानिक विधान भी है।
वर्तमान कलयुग के इस अशांत और द्वंद्वपूर्ण समय में, देवी खड्गमाला नामावली का अर्चन एक "आध्यात्मिक ढाल" की तरह कार्य करता है। यह नामावली जातक के भीतर छिपे काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे आंतरिक शत्रुओं का दमन करती है। जब साधक बिना किसी अंक (Numbers) के इन नामों का अखंड प्रवाह के साथ जप करता है, तो उसके आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र में दिव्य स्पंदन उत्पन्न होते हैं। यह पाठ केवल धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह स्वयं को खोजने और ब्रह्मांडीय ऊर्जा (आदि शक्ति) के साथ एकाकार होने की एक महान तांत्रिक प्रक्रिया है। माँ ललिता की कृपा से जातक को "अखण्ड सौभाग्य" और "श्री" (ऐश्वर्य) की प्राप्ति होती है, जो उसे जीवन के समस्त क्लेशों से मुक्त कर देती है।
विशिष्ट महिमा एवं श्रीचक्र आवरणों का रहस्य (Significance)
देवी खड्गमाला नामावली का महत्व इसलिए अद्वितीय है क्योंकि यह १८० नामों के माध्यम से श्रीचक्र के ५१ कोणों और ९ चक्रों की सभी देवियों को तृप्त करती है। इसमें माँ के "राजराजेश्वरी" और "कामेश्वरी" स्वरूप की प्रमुखता है। तंत्र शास्त्र में माना गया है कि खड्गमाला का एक पाठ अनंत जन्मों के पापों को भस्म करने की शक्ति रखता है।
विशेष रूप से "सर्वसिद्धप्रदचक्रस्वामिन्यै" जैसे नामों का जप साधक के जीवन में आने वाली भौतिक बाधाओं को दूर करता है। यह नामावली "प्रपत्ति" (पूर्ण शरणागति) का वह मार्ग है जहाँ साधक स्वयं को माँ के चरणों में समर्पित कर देता है और बदले में उसे वह 'खड्ग' (ज्ञान) मिलता है जो उसे मृत्यु के भय से भी मुक्त कर देता है।
फलश्रुति: नामावली अर्चन के अभूतपूर्व लाभ (Benefits)
शास्त्रों और श्रीविद्या आचार्यों के अनुसार, इस नामावली के नित्य अर्चन से निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:
- अक्षय ऐश्वर्य और श्री: "सर्वसम्पत्तिपूरण्यै" — माँ की कृपा से जातक के घर में धन, धान्य और राजसी वैभव की कभी कमी नहीं रहती।
- शत्रु और बाधा निवारण: यह पाठ शत्रुओं के कुचक्रों, बुरी नजर और नकारात्मक तांत्रिक प्रभावों को तत्काल नष्ट कर देता है।
- मानसिक शांति और मेधा: "बुद्ध्याकर्षिण्यै" — यह नामावली एकाग्रता बढ़ाती है और साधक को कुशाग्र बुद्धि (Intellect) प्रदान करती है।
- आरोग्य और दीर्घायु: "सर्वरोगहरचक्रस्वामिन्यै" — शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है और जातक तेजस्वी बनता है।
- अखण्ड सौभाग्य: विवाहित महिलाओं के लिए यह पाठ अखण्ड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति प्रदाता माना गया है।
पाठ विधि एवं अर्चना विधान (Ritual Method)
माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी प्रेम और सौंदर्य की देवी हैं, परन्तु खड्गमाला जैसी तांत्रिक नामावली के लिए मर्यादा आवश्यक है:
पूजा के मुख्य नियम:
- समय और दिन: प्रातःकाल स्नान के पश्चात या मध्य रात्रि (निशीथ काल) में। शुक्रवार (Friday), अष्टमी, और पूर्णिमा इसके लिए सर्वोत्तम हैं।
- शुद्धि: स्नान के बाद लाल (Red) या श्वेत वस्त्र धारण करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- अर्चना सामग्री: १८० नामों के साथ माँ के चित्र या श्रीचक्र (मेरु) पर लाल पुष्प, कुमकुम या अक्षत अर्पित करें।
- नैवेद्य: केसरिया खीर, मिश्री, या ताजे फलों का भोग लगाएँ।
- विशेष: पाठ के दौरान मन में यह भावना रखें कि आप श्रीचक्र के केंद्र में स्थित माँ ललिता के हृदय में प्रवेश कर रहे हैं।
विशेष प्रयोग:
- संकट मुक्ति हेतु: लगातार २१ शुक्रवार तक घी का दीपक जलाकर नामावली का अर्चन करने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. देवी खड्गमाला नामावली क्या है?
यह माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी के १८० नामों का संग्रह है जो श्रीचक्र के नौ आवरणों में स्थित समस्त शक्तियों की मानसिक और भौतिक पूजा (अर्चन) के लिए प्रयुक्त होती है।
2. 'खड्गमाला' नाम का क्या अर्थ है?
'खड्ग' का अर्थ है तलवार (ज्ञान) और 'माला' का अर्थ है श्रृंखला। यह वह ज्ञान रूपी तलवार प्रदान करती है जो अज्ञानता को नष्ट कर देती है।
3. क्या इस नामावली का पाठ बिना गुरु दीक्षा के किया जा सकता है?
सामान्य भक्ति भाव से पाठ और अर्चन के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं है। परन्तु गंभीर तांत्रिक प्रयोगों और कुंडलिनी साधना के लिए गुरु मार्गदर्शन आवश्यक है।
4. इस नामावली का पाठ करने का सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
शुक्रवार (Friday), पूर्णिमा, और नवरात्रि के नौ दिन माँ ललिता की उपासना के लिए सर्वाधिक शक्तिशाली और शुभ माने जाते हैं।
5. खड्गमाला नामावली और ललिता सहस्रनाम में क्या अंतर है?
सहस्रनाम में १००० नाम हैं जो देवी के गुणों का वर्णन करते हैं, जबकि खड्गमाला १८० नामों के माध्यम से श्रीचक्र के नौ आवरणों की व्यवस्थित तांत्रिक पूजा है।
6. क्या १०८ नामों के स्थान पर १८० नाम पढ़ना अनिवार्य है?
जी हाँ, खड्गमाला नामावली की पूर्णता १८० नामों में ही है, क्योंकि प्रत्येक नाम श्रीचक्र के एक विशिष्ट आवरण और उसकी योगिनी शक्ति को दर्शाता है।
7. पाठ के दौरान किस सामग्री से अर्चन करना श्रेष्ठ है?
लाल पुष्प, कुमकुम, सिंदूर या चमेली का इत्र माँ ललिता को अत्यंत प्रिय है। इनसे अर्चन करना शीघ्र फलदायी होता है।
8. क्या इस पाठ से घर की नकारात्मकता दूर होती है?
निश्चित रूप से। "सर्वविघ्ननिवारिण्यै" नाम के प्रभाव से घर की वास्तु दोष, नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश होता है।
9. क्या बच्चे भी इस नामावली का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, इससे बच्चों की एकाग्रता और बौद्धिक क्षमता (IQ) बढ़ती है। विद्यार्थियों के लिए "सर्वज्ञानमय्यै" नाम का जप विशेष हितकारी है।
10. 'त्रिपुरसुन्दरी' नाम का क्या रहस्य है?
इसका अर्थ है — "वह जो तीनों पुरों (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति) में सबसे सुंदर और श्रेष्ठ है"। यह माँ की त्रिलोक-व्यापकता को दर्शाता है।