Sri Goda Devi Ashtottara Shatanamavali – श्री गोदादेवि अष्टोत्तरशतनामावली
Sri Goda Devi Ashtottara Shatanamavali: 108 Divine Names of Andal

ओं श्रीरङ्गनायक्यै नमः ।
ओं गोदायै नमः ।
ओं विष्णुचित्तात्मजायै नमः ।
ओं सत्यै नमः ।
ओं गोपीवेषधरायै नमः ।
ओं देव्यै नमः ।
ओं भूसुतायै नमः ।
ओं भोगशालिन्यै नमः ।
ओं तुलसीकाननोद्भूतायै नमः । ९ ॥
ओं श्रीधन्विपुरवासिन्यै नमः ।
ओं भट्टनाथप्रियकर्यै नमः ।
ओं श्रीकृष्णहितभोगिन्यै नमः ।
ओं आमुक्तमाल्यदायै नमः ।
ओं बालायै नमः ।
ओं रङ्गनाथप्रियायै नमः ।
ओं परायै नमः ।
ओं विश्वम्भरायै नमः ।
ओं कलालापायै नमः । १८ ॥
ओं यतिराजसहोदर्यै नमः ।
ओं कृष्णानुरक्तायै नमः ।
ओं सुभगायै नमः ।
ओं सुलभश्रियै नमः ।
ओं सुलक्षणायै नमः ।
ओं लक्ष्मीप्रियसख्यै नमः ।
ओं श्यामायै नमः ।
ओं दयाञ्चितदृगञ्चलायै नमः ।
ओं फल्गुन्याविर्भवायै नमः । २७ ॥
ओं रम्यायै नमः ।
ओं धनुर्मासकृतव्रतायै नमः ।
ओं चम्पकाशोकपुन्नाग मालती विलसत्कचायै नमः ।
ओं आकारत्रयसम्पन्नायै नमः ।
ओं नारायणपदाश्रितायै नमः ।
ओं श्रीमदष्टाक्षरी मन्त्रराजस्थित मनोरथायै नमः ।
ओं मोक्षप्रदाननिपुणायै नमः ।
ओं मनुरत्नाधिदेवतायै नमः ।
ओं ब्रह्मण्यायै नमः । ३६ ॥
ओं लोकजनन्यै नमः ।
ओं लीलामानुषरूपिण्यै नमः ।
ओं ब्रह्मज्ञानप्रदायै नमः ।
ओं मायायै नमः ।
ओं सच्चिदानन्दविग्रहायै नमः ।
ओं महापतिव्रतायै नमः ।
ओं विष्णुगुणकीर्तनलोलुपायै नमः ।
ओं प्रपन्नार्तिहरायै नमः ।
ओं नित्यायै नमः । ४५ ॥
ओं वेदसौधविहारिण्यै नमः ।
ओं श्रीरङ्गनाथ माणिक्यमञ्जर्यै नमः ।
ओं मञ्जुभाषिण्यै नमः ।
ओं पद्मप्रियायै नमः ।
ओं पद्महस्तायै नमः ।
ओं वेदान्तद्वयबोधिन्यै नमः ।
ओं सुप्रसन्नायै नमः ।
ओं भगवत्यै नमः ।
ओं श्रीजनार्दनदीपिकायै नमः । ५४ ॥
ओं सुगन्धावयवायै नमः ।
ओं चारुरङ्गमङ्गलदीपिकायै नमः ।
ओं ध्वजवज्राङ्कुशाब्जाङ्क मृदुपाद तलाञ्चितायै नमः ।
ओं तारकाकारनखरायै नमः ।
ओं प्रवालमृदुलाङ्गुल्यै नमः ।
ओं कूर्मोपमेय पादोर्ध्वभागायै नमः ।
ओं शोभनपार्ष्णिकायै नमः ।
ओं वेदार्थभावतत्त्वज्ञायै नमः ।
ओं लोकाराध्याङ्घ्रिपङ्कजायै नमः । ६३ ॥
ओं आनन्दबुद्बुदाकारसुगुल्फायै नमः ।
ओं परमाणुकायै नमः ।
ओं तेजःश्रियोज्ज्वलधृतपादाङ्गुलि सुभूषितायै नमः ।
ओं मीनकेतनतूणीर चारुजङ्घा विराजितायै नमः ।
ओं ककुद्वज्जानुयुग्माढ्यायै नमः ।
ओं स्वर्णरम्भाभसक्थिकायै नमः ।
ओं विशालजघनायै नमः ।
ओं पीनसुश्रोण्यै नमः ।
ओं मणिमेखलायै नमः । ७२ ॥
ओं आनन्दसागरावर्त गम्भीराम्भोज नाभिकायै नमः ।
ओं भास्वद्वलित्रिकायै नमः ।
ओं चारुजगत्पूर्णमहोदर्यै नमः ।
ओं नववल्लीरोमराज्यै नमः ।
ओं सुधाकुम्भायितस्तन्यै नमः ।
ओं कल्पमालानिभभुजायै नमः ।
ओं चन्द्रखण्डनखाञ्चितायै नमः ।
ओं सुप्रवाशाङ्गुलीन्यस्त महारत्नाङ्गुलीयकायै नमः ।
ओं नवारुणप्रवालाभ पाणिदेशसमञ्चितायै नमः । ८१ ॥
ओं कम्बुकण्ठ्यै नमः ।
ओं सुचुबुकायै नमः ।
ओं बिम्बोष्ठ्यै नमः ।
ओं कुन्ददन्तयुजे नमः ।
ओं कारुण्यरसनिष्यन्द नेत्रद्वयसुशोभितायै नमः ।
ओं मुक्ताशुचिस्मितायै नमः ।
ओं चारुचाम्पेयनिभनासिकायै नमः ।
ओं दर्पणाकारविपुलकपोल द्वितयाञ्चितायै नमः ।
ओं अनन्तार्कप्रकाशोद्यन्मणि ताटङ्कशोभितायै नमः । ९० ॥
ओं कोटिसूर्याग्निसङ्काश नानाभूषणभूषितायै नमः ।
ओं सुगन्धवदनायै नमः ।
ओं सुभ्रुवे नमः ।
ओं अर्धचन्द्रललाटिकायै नमः ।
ओं पूर्णचन्द्राननायै नमः ।
ओं नीलकुटिलालकशोभितायै नमः ।
ओं सौन्दर्यसीमायै नमः ।
ओं विलसत्कस्तूरीतिलकोज्ज्वलायै नमः ।
ओं धगद्धगायमानोद्यन्मणि सीमन्तभूषणायै नमः । ९९ ॥
ओं जाज्वल्यमानसद्रत्न दिव्यचूडावतंसकायै नमः ।
ओं सूर्यार्धचन्द्रविलसत् भूषणञ्चित वेणिकायै नमः ।
ओं अत्यर्कानल तेजोधिमणि कञ्चुकधारिण्यै नमः ।
ओं सद्रत्नाञ्चितविद्योत विद्युत्कुञ्जाभ शाटिकायै नमः ।
ओं नानामणिगणाकीर्ण हेमाङ्गदसुभूषितायै नमः ।
ओं कुङ्कुमागरु कस्तूरी दिव्यचन्दनचर्चितायै नमः ।
ओं स्वोचितौज्ज्वल्य विविधविचित्रमणिहारिण्यै नमः ।
ओं असङ्ख्येय सुखस्पर्श सर्वातिशय भूषणायै नमः ।
ओं मल्लिकापारिजातादि दिव्यपुष्पस्रगञ्चितायै नमः । १०८ ॥
ओं श्रीरङ्गनिलयायै नमः ।
ओं पूज्यायै नमः ।
ओं दिव्यदेशसुशोभितायै नमः । १११ ॥
॥ इति श्री गोदा अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
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श्री गोदादेवि अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)
श्री गोदादेवि अष्टोत्तरशतनामावली दक्षिण भारत की महान संत कवयित्री अंडाल (गोदा देवी) के 108 पावन नामों का स्तोत्र है। गोदा देवी को भूदेवी का अवतार माना जाता है और वे 12 आलवार संतों में एकमात्र महिला थीं।
उनका जीवन मधुर भक्ति (Madhuara Bhakti) का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने बचपन से ही श्रीरंगम के भगवान रंगनाथ को अपना पति मान लिया था। वे भगवान को अर्पित करने से पहले फूलों की माला स्वयं पहनकर दर्पण में देखती थीं कि वे सुंदर लग रही हैं या नहीं, और फिर वही 'उतरी हुई माला' (उच्छिष्ट) भगवान को चढ़ाती थीं। भगवान रंगनाथ ने उस 'झूठी' माला को ही स्वीकार किया, इसलिए उनका नाम 'आमुक्तमाल्यदा' (पहनकर माला देने वाली) पड़ा।
गोदा देवी द्वारा रचित 'तिरुप्पावै' (Thiruppavai) और 'नाच्चियार तिरुमोझी' तमिल साहित्य के रत्न हैं। धनुर्मास (Shravan month for Vishnu) में इनका पाठ घर-घर में होता है।
विशिष्ट महत्व (Significance)
धनुर्मास व्रत: गोदा देवी का महत्व 'धनुर्मास' (दिसंबर-जनवरी) में सर्वाधिक होता है। माना जाता है कि इसी महीने में उन्होंने अपनी सखियों (गोपियों के भाव में) के साथ व्रत किया और भगवान कृष्ण (रंगनाथ) को प्रसन्न किया।
प्रेम और समर्पण: उनकी भक्ति में 'आत्म-निवेदन' है। वे हमें सिखाती हैं कि भगवान विधि-विधान से नहीं, बल्कि विशुद्ध प्रेम से रीझते हैं। रामानुजाचार्य जी को गोदा देवी पर इतनी श्रद्धा थी कि उन्हें 'गोदाग्रज' (गोदा का बड़ा भाई) कहा जाता है।
प्रमुख नामों का अर्थ (Key Names Explained)
- गोदा (2): जो आनंद देती है, वाणी (गो) की देवी, और पृथ्वी (गो) की पुत्री।
- विष्णुचित्तात्मजा (3): विष्णुचित्त (पेरियालवार) की पुत्री।
- तुलसीकाननोद्भवा (9): तुलसी के बगीचे में प्रकट होने वाली (अयोनिका)।
- आमुक्तमाल्यदा (14): (Amuktamalyada) स्वयं पहनी हुई माला भगवान को देने वाली।
- रंगनाथप्रिया (16): भगवान रंगनाथ की प्रियतमा।
- धनुर्मासकृतव्रता (29): जिन्होंने धनुर्मास का पवित्र व्रत किया।
- मञ्जुभाषिणी (48): मधुर बोलने वाली (उनका साहित्य अत्यंत मधुर है)।
- श्रीरङ्गनिलया (108): श्रीरंगम (वैकुंठ) में निवास करने वाली।
फलश्रुति लाभ (Benefits)
- शीघ्र विवाह: कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। 'वारणाम आयिरम' (नाच्चियार तिरुमोझी का अंश) का पाठ विवाह बाधाएं दूर करता है।
- सुखी दांपत्य: पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य (श्री और विष्णु जैसा) बढ़ता है।
- भक्ति की प्राप्ति: मन में भगवान के प्रति निश्छल प्रेम और समर्पण जागृत होता है।
- पाप नाश: गोदा देवी की कृपा से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
- समृद्धि: वे साक्षात लक्ष्मी (भूदेवी) हैं, इसलिए घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
पाठ विधि (Ritual Method)
धनुर्मास पूजा:
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले)। धनुर्मास में यह अनिवार्य है।
- भोग: पोंगल (मीठा चावल) और मक्खन। भगवान रंगनाथ को यह बहुत प्रिय है।
- माला: ताजे फूलों की माला (पुष्प माला) अर्पित करें।
- पाठ: पहले 'तिरुप्पावै' के 30 पाशुरम (कम से कम दो) पढ़ें, फिर 108 नामों से अर्चन करें।
- मंत्र: "श्री रंगनाथ दिव्य मणि पादुकाभ्याम नमः"।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. गोदा देवी (अंडाल) कौन हैं?
दक्षिण भारत की संत कवयित्री, भूदेवी का अवतार। उन्होंने भगवान रंगनाथ से विवाह किया।
2. धनुर्मास और गोदा देवी का क्या संबंध है?
उन्होंने इसी महीने में 'कात्यायनी व्रत' (पावै नोम्बु) किया और अपनी सखियों को जगाकर भगवान की स्तुति की (तिरुप्पावै)।
3. 'आमुक्तमाल्यदा' का क्या अर्थ है?
'पहनकर माला देने वाली'। यह उनकी भक्ति की पराकाष्ठा है—प्रभु के लिए खुद को सजाना। विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय ने इसी नाम से तेलुगु महाकाव्य लिखा।
4. विवाह के लिए कौन सा पाठ करें?
'तिरुप्पावै' और 'नाच्चियार तिरुमोझी' का छठा अंश ('वारणाम आयिरम' - एक हजार हाथियों का सपना)। यह विवाह के लिए अचूक माना जाता है।
5. 'विष्णुचित्तात्मजा' कौन हैं?
विष्णुचित्त (पेरियालवार) उनके पिता थे। उन्हें गोदा एक तुलसी के पौधे के नीचे मिली थीं।
6. श्रीविल्लिपुत्तुर क्यों प्रसिद्ध है?
यह गोदा देवी का जन्मस्थान है। यहाँ का वटपत्रशायी मंदिर अत्यंत भव्य है।
7. क्या उत्तर भारत वाले इनकी पूजा कर सकते हैं?
अवश्य। वे मीराबाई की तरह प्रेम-भक्ति का प्रतीक हैं। भगवान सबके हैं।
8. 'तिरुपति ब्रह्मोत्सव' में इनका क्या रोल है?
ब्रह्मोत्सव में गरुड़ सेवा के दिन, भगवान वेंकटेश्वर को श्रीविल्लिपुत्तुर से आई अंडाल की माला पहनाई जाती है।
9. 'रंगनाथप्रिया' का क्या अर्थ है?
भगवान रंगनाथ की प्रेमिका। अंत में वे भौतिक शरीर के साथ ही मूर्ति में समा गई थीं।
10. गोदा जयंती (आडि पूरम) कब है?
तमिल माह 'आडि' (जुलाई-अगस्त) में 'पूरम' नक्षत्र के दिन उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है।