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Sri Budha Ashtottara Shatanamavali – 108 Names of Mercury (Archana & Benefits)

Sri Budha Ashtottara Shatanamavali – 108 Names of Mercury (Archana & Benefits)
॥ श्री बुध अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॥ ॐ श्री बुधाय नमः ॥ ॐ बुधाय नमः । ॐ बुधार्चिताय नमः । ॐ सौम्याय नमः । ॐ सौम्यचित्ताय नमः । ॐ शुभप्रदाय नमः । ॐ दृढव्रताय नमः । ॐ दृढफलाय नमः । ॐ श्रुतिजालप्रबोधकाय नमः । ॐ सत्यवासाय नमः । ॐ सत्यवचसे नमः । (१०) ॐ श्रेयसां पतये नमः । ॐ अव्ययाय नमः । ॐ सोमजाय नमः । ॐ सुखदाय नमः । ॐ श्रीमते नमः । ॐ सोमवंशप्रदीपकाय नमः । ॐ वेदविदे नमः । ॐ वेदतत्त्वज्ञाय नमः । ॐ वेदान्तज्ञानभास्वराय नमः । ॐ विद्याविचक्षणाय नमः । (२०) ॐ विभवे नमः । ॐ विद्वत्प्रीतिकराय नमः । ॐ ऋजवे नमः । ॐ विश्वानुकूलसञ्चाराय नमः । ॐ विशेषविनयान्विताय नमः । ॐ विविधागमसारज्ञाय नमः । ॐ वीर्यवते नमः । ॐ विगतज्वराय नमः । ॐ त्रिवर्गफलदाय नमः । ॐ अनन्ताय नमः । (३०) ॐ त्रिदशाधिपपूजिताय नमः । ॐ बुद्धिमते नमः । ॐ बहुशास्त्रज्ञाय नमः । ॐ बलिने नमः । ॐ बन्धविमोचकाय नमः । ॐ वक्रातिवक्रगमनाय नमः । ॐ वासवाय नमः । ॐ वसुधाधिपाय नमः । ॐ प्रसन्नवदनाय नमः । ॐ वन्द्याय नमः । (४०) ॐ वरेण्याय नमः । ॐ वाग्विलक्षणाय नमः । ॐ सत्यवते नमः । ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः । ॐ सत्यबन्धवे नमः । ॐ सदादराय नमः । ॐ सर्वरोगप्रशमनाय नमः । ॐ सर्वमृत्युनिवारकाय नमः । ॐ वाणिज्यनिपुणाय नमः । ॐ वश्याय नमः । (५०) ॐ वाताङ्गाय नमः । ॐ वातरोगहृते नमः । ॐ स्थूलाय नमः । ॐ स्थैर्यगुणाध्यक्षाय नमः । ॐ स्थूलसूक्ष्मादिकारणाय नमः । ॐ अप्रकाशाय नमः । ॐ प्रकाशात्मने नमः । ॐ घनाय नमः । ॐ गगनभूषणाय नमः । ॐ विधिस्तुत्याय नमः । (६०) ॐ विशालाक्षाय नमः । ॐ विद्वज्जनमनोहराय नमः । ॐ चारुशीलाय नमः । ॐ स्वप्रकाशाय नमः । ॐ चपलाय नमः । ॐ जितेन्द्रियाय नमः । ॐ उदङ्मुखाय नमः । ॐ मखासक्ताय नमः । ॐ मगधाधिपतये नमः । ॐ हरये नमः । (७०) ॐ सौम्यवत्सरसञ्जाताय नमः । ॐ सोमप्रियकराय नमः । ॐ सुखिने नमः । ॐ सिंहाधिरूढाय नमः । ॐ सर्वज्ञाय नमः । ॐ शिखिवर्णाय नमः । ॐ शिवङ्कराय नमः । ॐ पीताम्बराय नमः । ॐ पीतवपुषे नमः । ॐ पीतच्छत्रध्वजाङ्किताय नमः । (८०) ॐ खड्गचर्मधराय नमः । ॐ कार्यकर्त्रे नमः । ॐ कलुषहारकाय नमः । ॐ आत्रेयगोत्रजाय नमः । ॐ अत्यन्तविनयाय नमः । ॐ विश्वपावनाय नमः । ॐ चाम्पेयपुष्पसङ्काशाय नमः । ॐ चारणाय नमः । ॐ चारुभूषणाय नमः । ॐ वीतरागाय नमः । (९०) ॐ वीतभयाय नमः । ॐ विशुद्धकनकप्रभाय नमः । ॐ बन्धुप्रियाय नमः । ॐ बन्धमुक्ताय नमः । ॐ बाणमण्डलसंश्रिताय नमः । ॐ अर्केशानप्रदेशस्थाय नमः । ॐ तर्कशास्त्रविशारदाय नमः । ॐ प्रशान्ताय नमः । ॐ प्रीतिसम्युक्ताय नमः । ॐ प्रियकृते नमः । (१००) ॐ प्रियभाषणाय नमः । ॐ मेधाविने नमः । ॐ माधवासक्ताय नमः । ॐ मिथुनाधिपतये नमः । ॐ सुधिये नमः । ॐ कन्याराशिप्रियाय नमः । ॐ कामप्रदाय नमः । ॐ घनफलाश्रयाय नमः । ॥ इति श्री बुधाष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥

॥ श्री बुध अष्टोत्तरशतनामावली: परिचय ॥

श्री बुध अष्टोत्तरशतनामावली (Sri Budha Ashtottara Shatanamavali) भगवान बुध (Mercury) के 108 दिव्य और सिद्ध नामों का एक अत्यंत प्रभावशाली संग्रह है। वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को "युवराज" की उपाधि प्राप्त है। वे बुद्धि ("बुद्धिमते नमः"), वाणी ("वाग्विलक्षणाय नमः"), व्यापार, गणित और संचार के कारक ग्रह हैं।
बुध देव चन्द्रमा और तारा के पुत्र हैं ("सोमजाय नमः"), इसलिए वे अत्यंत सौम्य और सुंदर हैं ("सौम्याय नमः", "सुन्दराय नमः")। जिन जातकों की कुंडली में बुध कमजोर या पीड़ित होता है, उन्हें वाणी दोष, त्वचा रोग, या व्यापार में घाटे का सामना करना पड़ता है।
अतः यह नामावली केवल नामों की सूची नहीं, बल्कि बुद्धि विकार और दरिद्रता नाश का एक सिद्ध मन्त्र समूह है। जहाँ 'स्तोत्र' का पाठ श्लोक रूप में किया जाता है, वहीं 'नामावली' का प्रयोग अर्चन (Archana) के लिए होता है, जहाँ प्रत्येक नाम के साथ 'ॐ' और 'नमः' लगाकर देवता को पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

॥ विशिष्ट महत्व (Significance) ॥

बुध देव को 'बुद्धिदाता' और 'वाणिज्य कारक' माना जाता है। यह 108 नामावली बुध के विभिन्न आयामों को उजागर करती है:
  • कुशाग्र बुद्धि और स्मरण शक्ति: बुध "विद्याविचक्षणाय" हैं। छात्रों के लिए यह पाठ वरदान है, इससे एकाग्रता (concentration) और याददाश्त बढ़ती है।
  • व्यापार में अपार सफलता: बुध को "वाणिज्यनिपुणाय" (व्यापार में निपुण) कहा गया है। नित्य पाठ करने से व्यापारिक निर्णय सही होते हैं और धन लाभ होता है।
  • वाकसिद्धि और मधुर वाणी: जो लोग हकलाते हैं या अपनी बात सही से नहीं रख पाते, उन्हें "सत्यवचसे" और "प्रियभाषणाय" का ध्यान करना चाहिए।
  • नर्वस सिस्टम और त्वचा रोग: ज्योतिष में बुध त्वचा और तंत्रिका तंत्र का कारक है। "सर्वरोगप्रशमनाय" नाम के जाप से चर्म रोग और नसों की कमजोरी दूर होती है।

॥ अर्चन और पाठ विधि (Ritual Method) ॥

इस नामावली का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए इसे सही विधि और निष्ठा से करना आवश्यक है:
  1. समय: वैसे तो नित्य करना चाहिए, लेकिन बुधवार (Wednesday) इसका विशेष दिन है। बुध की होरा में पाठ करना अति उत्तम होता है।
  2. दिशा: उत्तर दिशा (North) कुबेर और बुध की दिशा है, इसलिए उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
  3. सामग्री: एक तांबे के लोटे में जल, दूर्वा, हरे मूंग, और हरे फूल (जैसे कनेर) तैयार रखें। भगवान गणेश और बुध यंत्र स्थापित करें।
  4. अर्चन विधि: 'ओम' से शुरू होकर 'नमः' पर समाप्त होने वाले प्रत्येक नाम के साथ तुलसी पत्र या दूर्वा अर्पित करें।
  5. नैवेद्य: मूंग की दाल का हलवा या हरे फल (जैसे अमरूद, अंगूर) का भोग लगाएं।
(नोट: गणेश जी की पूजा पहले अवश्य करें क्योंकि वे बुद्धि के देवता हैं।)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. बुध देव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय क्या है?

बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाना, गणेश जी की पूजा करना और किन्नरों (transgenders) को हरी चूड़ियाँ या वस्त्र दान करना बुध को सबसे जल्दी प्रसन्न करता है।

2. क्या महिलाएं बुध अष्टोत्तर का पाठ कर सकती हैं?

जी हाँ, महिलाएं निसंकोच यह पाठ कर सकती हैं। यह उनके लिए बुद्धिमत्ता और पारिवारिक सौहार्द ("बन्धुप्रियाय") लाने वाला है।

3. क्या छात्रों के लिए यह पाठ अनिवार्य है?

अनिवार्य नहीं, लेकिन अत्यंत लाभकारी है। परीक्षा के दिनों में "ॐ बुद्धिमते नमः" का 108 बार जाप करने से पढ़ा हुआ याद रहता है और मन शांत रहता है।

4. बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव क्या हैं?

वाणी में दोष, त्वचा रोग, नसों की कमजोरी, व्यापार में बार-बार नुकसान, और सगे-संबंधियों से विवाद बुध के कमजोर होने के लक्षण हैं।

5. कौन सा रत्न बुध के लिए धारण करना चाहिए?

पन्ना (Emerald) बुध का मुख्य रत्न है। इसे बुधवार को कनिष्ठा उंगली (Little finger) में सोने या चाँदी में धारण किया जाता है, लेकिन ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।

6. क्या गणेश पूजा से बुध ग्रह शांत होता है?

हाँ, भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं और बुध भी बुद्धि के कारक हैं। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से बुध दोष स्वतः ही शांत हो जाता है।

7. पाठ के बाद क्या दान करें?

हरी मूंग की दाल (साबुत), हरे वस्त्र, कांस्य के बर्तन, या हरी सब्जियों का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद विद्यार्थी को करना चाहिए।

8. क्या तुलसी के पत्ते बुध को चढ़ा सकते हैं?

बिल्कुल। बुध, भगवान विष्णु के ही स्वरूप माने जाते हैं ("हरये नमः"), इसलिए उन्हें तुलसी दल अत्यंत प्रिय है। इससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

9. बुध बीज मंत्र क्या है?

बुध का तांत्रिक बीज मंत्र है: "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः"। नामावली पाठ से पहले इस मंत्र की एक माला (108 बार) जप करने से फल कई गुना बढ़ जाता है।

10. "सौम्यवत्सरसञ्जाताय नमः" का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है "सौम्य संवत्सर में जन्म लेने वाले"। यह बुध की सौम्य और शांत प्रकृति को दर्शाता है, जो अपने भक्तों को भी सौम्यता प्रदान करता है।