Sri Bhadrakali Ashtottara Shatanamavali – श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली ॥
ॐ भद्रकाल्यै नमः ।
ॐ कामरूपायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ यशस्विन्यै नमः ।
ॐ महाश्रयायै नमः ।
ॐ महाभागायै नमः ।
ॐ दक्षयागविभेदिन्यै नमः ।
ॐ रुद्रकोपसमुद्भूतायै नमः ।
ॐ भद्रायै नमः । ९
ॐ मुद्रायै नमः ।
ॐ शिवङ्कर्यै नमः ।
ॐ चन्द्रिकायै नमः ।
ॐ चन्द्रवदनायै नमः ।
ॐ रोषताम्राक्षशोभिन्यै नमः ।
ॐ इन्द्रादिदमन्यै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः ।
ॐ भक्तार्तिहारिण्यै नमः । १८
ॐ मुक्तायै नमः ।
ॐ चण्डिकानन्ददायिन्यै नमः ।
ॐ सौदामिन्यै नमः ।
ॐ सुधामूर्त्यै नमः ।
ॐ दिव्यालङ्कारभूषितायै नमः ।
ॐ सुवासिन्यै नमः ।
ॐ सुनासायै नमः ।
ॐ त्रिकालज्ञायै नमः ।
ॐ धुरन्धरायै नमः । २७
ॐ सर्वज्ञायै नमः ।
ॐ सर्वलोकेश्यै नमः ।
ॐ देवयोनये नमः ।
ॐ अयोनिजायै नमः ।
ॐ निर्गुणायै नमः ।
ॐ निरहङ्कारायै नमः ।
ॐ लोककल्याणकारिण्यै नमः ।
ॐ सर्वलोकप्रियायै नमः ।
ॐ गौर्यै नमः । ३६
ॐ सर्वगर्वविमर्दिन्यै नमः ।
ॐ तेजोवत्यै नमः ।
ॐ महामात्रे नमः ।
ॐ कोटिसूर्यसमप्रभायै नमः ।
ॐ वीरभद्रकृतानन्दभोगिन्यै नमः ।
ॐ वीरसेवितायै नमः ।
ॐ नारदादिमुनिस्तुत्यायै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ सत्यायै नमः । ४५
ॐ तपस्विन्यै नमः ।
ॐ ज्ञानरूपायै नमः ।
ॐ कलातीतायै नमः ।
ॐ भक्ताभीष्टफलप्रदायै नमः ।
ॐ कैलासनिलयायै नमः ।
ॐ शुभ्रायै नमः ।
ॐ क्षमायै नमः ।
ॐ श्रियै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः । ५४
ॐ सिद्धविद्यायै नमः ।
ॐ महाशक्त्यै नमः ।
ॐ कामिन्यै नमः ।
ॐ पद्मलोचनायै नमः ।
ॐ देवप्रियायै नमः ।
ॐ दैत्यहन्त्र्यै नमः ।
ॐ दक्षगर्वापहारिण्यै नमः ।
ॐ शिवशासनकर्त्र्यै नमः ।
ॐ शैवानन्दविधायिन्यै नमः । ६३
ॐ भवपाशनिहन्त्र्यै नमः ।
ॐ सवनाङ्गसुकारिण्यै नमः ।
ॐ लम्बोदर्यै नमः ।
ॐ महाकाल्यै नमः ।
ॐ भीषणास्यायै नमः ।
ॐ सुरेश्वर्यै नमः ।
ॐ महानिद्रायै नमः ।
ॐ योगनिद्रायै नमः ।
ॐ प्रज्ञायै नमः । ७२
ॐ वार्तायै नमः ।
ॐ क्रियावत्यै नमः ।
ॐ पुत्रपौत्रप्रदायै नमः ।
ॐ साध्व्यै नमः ।
ॐ सेनायुद्धसुकाङ्क्षिण्यै नमः ।
ॐ शम्भवे इच्छायै नमः ।
ॐ कृपासिन्धवे नमः ।
ॐ चण्ड्यै नमः ।
ॐ चण्डपराक्रमायै नमः । ८१
ॐ शोभायै नमः ।
ॐ भगवत्यै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ नीलायै नमः ।
ॐ मनोगत्यै नमः ।
ॐ खेचर्यै नमः ।
ॐ खड्गिन्यै नमः ।
ॐ चक्रहस्तायै नमः । ९०
ॐ शूलविधारिण्यै नमः ।
ॐ सुबाणायै नमः ।
ॐ शक्तिहस्तायै नमः ।
ॐ पादसञ्चारिण्यै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ तपःसिद्धिप्रदायै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ वीरभद्रसहायिन्यै नमः ।
ॐ धनधान्यकर्यै नमः । ९९
ॐ विश्वायै नमः ।
ॐ मनोमालिन्यहारिण्यै नमः ।
ॐ सुनक्षत्रोद्भवकर्यै नमः ।
ॐ वंशवृद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मादिसुरसंसेव्यायै नमः ।
ॐ शाङ्कर्यै नमः ।
ॐ प्रियभाषिण्यै नमः ।
ॐ भूतप्रेतपिशाचादिहारिण्यै नमः ।
ॐ सुमनस्विन्यै नमः । १०८
ॐ पुण्यक्षेत्रकृतावासायै नमः ।
ॐ प्रत्यक्षपरमेश्वर्यै नमः । ११०
॥ इति श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
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परिचय: भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली
श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली माँ भद्रकाली के 108 पवित्र नामों की सूची है। इसमें प्रत्येक नाम 'ॐ...नमः' प्रारूप में है जो अर्चना और पुष्पांजलि के लिए आदर्श है।
नामावली और स्तोत्र में अंतर यह है कि स्तोत्र में श्लोक रूप में नाम होते हैं, जबकि नामावली में प्रत्येक नाम अलग से 'ॐ...नमः' के साथ होता है। नामावली का उपयोग मुख्यतः पूजा में पुष्प अर्पण के समय होता है।
अर्चना विधि
- माँ भद्रकाली की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठें
- 108 पुष्प या अक्षत (चावल) पास में रखें
- प्रत्येक नाम बोलते हुए एक पुष्प चढ़ाएं
- "ॐ भद्रकाल्यै नमः" बोलें, पुष्प चढ़ाएं
- इसी प्रकार 108 नाम पूर्ण करें
- अंत में प्रणाम करें
नामावली अर्चना के लाभ
- भद्रकाली कृपा: माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- पुण्य: महापुण्य की प्राप्ति
- संतान सुख: पुत्र-पौत्र की प्राप्ति
- धन-धान्य: समृद्धि बढ़ती है
- वंश वृद्धि: कुल की वृद्धि होती है
- भूत-प्रेत निवारण: नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
- रोग नाश: सभी रोग दूर होते हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र में श्लोक रूप में नाम होते हैं जो पाठ के लिए हैं। नामावली में प्रत्येक नाम अलग से 'ॐ...नमः' के साथ होता है जो अर्चना/पुष्पांजलि के लिए है।
2. कौन से पुष्प चढ़ाएं?
लाल पुष्प जैसे गुड़हल (जपाकुसुम), गुलाब, कनेर आदि माँ काली/भद्रकाली को प्रिय हैं। इनके अभाव में अक्षत (चावल) भी चढ़ा सकते हैं।
3. 108 पुष्प न हों तो?
कम पुष्प होने पर अक्षत (चावल के दाने) का उपयोग करें। या एक ही पुष्प से सभी नाम बोलते हुए मानसिक पुष्प अर्पित करें।
4. 108 संख्या का क्या महत्व है?
108 = 12 (राशियाँ) × 9 (नवग्रह) या 27 (नक्षत्र) × 4 (पाद)। यह ब्रह्माण्डीय सम्पूर्णता का प्रतीक है।
5. इसमें 110 नाम क्यों हैं?
मूल 108 नाम हैं, अंतिम 2 नाम (पुण्यक्षेत्रकृतावासा, प्रत्यक्षपरमेश्वरी) उपसंहार के रूप में जोड़े गए हैं।
6. कब पढ़ना सबसे शुभ है?
मंगलवार, शुक्रवार और पूर्णिमा को विशेष फलदायी है। नवरात्रि में प्रतिदिन अर्चना करना अत्यंत शुभ है।
7. घर में अर्चना कर सकते हैं?
हाँ, घर में माँ भद्रकाली की तस्वीर या प्रतिमा के समक्ष नियमित अर्चना कर सकते हैं।
8. क्या मंत्र दीक्षा आवश्यक है?
नामावली पाठ के लिए दीक्षा आवश्यक नहीं है। यह सभी के लिए खुला है। केवल बीज मंत्र जप के लिए दीक्षा लें।
9. 'वीरभद्रसहायिनी' का क्या अर्थ है?
वीरभद्र की सहायिनी—दक्ष यज्ञ विध्वंस में भद्रकाली ने वीरभद्र की सहायता की थी।
10. केरल में भद्रकाली पूजा कैसे होती है?
केरल में कलमेझुत्तु (चित्रपट पूजा), तीय्याट्टम् और विशेष तेय्यम अनुष्ठान से भद्रकाली की पूजा होती है।