॥ श्री विपरीत प्रत्यङ्गिरा मन्त्रः ॥
विनियोगः
अस्य श्री विपरीत प्रत्यङ्गिरा मन्त्रस्य भैरव ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्री विपरीत प्रत्यङ्गिरा देवता ममाभीष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥
ऋष्यादि न्यासः
भैरव ऋषये नमः शिरसि ।
अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे ।
श्री विपरीत प्रत्यङ्गिरा देवतायै नमः हृदि ।
ममाभीष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।
करन्यासः
ओं ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ओं ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ओं श्रीं मध्यमाभ्यां नमः ।
ओं प्रत्यङ्गिरे अनमिकाभ्यां नमः ।
ओं मां रक्ष रक्ष कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ओं मम शत्रून् भञ्जय भञ्जय करतलकर पृष्ठाभ्यां नमः ।
हृदयादिन्यासः
ओं ऐं हृदयाय नमः ।
ओं ह्रीं शिरसे स्वाहा ।
ओं श्रीं शिखायै वषट् ।
ओं प्रत्यङ्गिरे कवचाय हुम् ।
ओं मां रक्ष रक्ष नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ओं मम शत्रून् भञ्जय भञ्जय अस्त्राय फट् ।
ध्यानम्
खड्गं कपालं डमरुं त्रिशूलं
सम्बिभ्रती चन्द्रकलावतंसा ।
पिङ्गोर्ध्वकेशाऽसित भीमदंष्ट्रा
भूयाद्विभूत्यै मम भद्रकाली ॥
पञ्चपूजा
लं पृथिव्यात्मिकायै गन्धं समर्पयामि ।
हं आकाशात्मिकायै पुष्पैः पूजयामि ।
यं वाय्वात्मिकायै धूपमाघ्रापयामि ।
रं अग्न्यात्मिकायै दीपं दर्शयामि ।
वं अमृतात्मिकायै अमृतं महानैवेद्यं निवेदयामि ।
सं सर्वात्मिकायै सर्वोपचार पूजाम् समर्पयामि ।
मालाप्रार्थना
मां माले महामाये सर्वशक्तिस्वरूपिणी ।
चतुर्वर्गस्त्वयि न्यस्तस्तस्मान्मे सिद्धिदा भव ॥
ओं ह्रीं सिद्ध्यै नमः ॥
॥ मूल मन्त्र (Moola Mantra) ॥
ओं ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यङ्गिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भञ्जय भञ्जय स्फ्रें हूं फट् स्वाहा ॥
॥ फलश्रुतिः (Benefits) ॥
यः पठेत् प्रात रुत्थाय शुचिः प्रयतमानसः ।
तस्य नश्यन्ति रिपवः प्रलयं यान्ति शत्रवः ॥ १ ॥
न तस्य जायते पीडा न रोगो न च पातकम् ।
न ग्रहा न च वेताला न पिशाचा न राक्षसाः ॥ २ ॥
यत्र यत्र भवेद्भीतिः तत्र तत्र जपेदिमाम् ।
ततत्क्षणमेव नश्यन्ति दस्यु चौर भयादयः ॥ ३ ॥
इमां विद्यां जपेद्यस्तु त्रिसंध्यं नियतः शुचिः ।
तस्य हस्ते भवेत् सिद्धिः सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ४ ॥
॥ इति श्री भैरव तंत्रे श्री विपरीत प्रत्यङ्गिरा मन्त्रः सम्पूर्णः ॥
संलिखित ग्रंथ
श्री विपरीत प्रत्यङ्गिरा मन्त्रः - परिचय (Introduction)
श्री विपरीत प्रत्यङ्गिरा मन्त्रः माँ महाकाली का एक अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली अस्त्र है। जिसे 'उल्टा प्रत्यङ्गिरा' या 'रिवर्सल मन्त्र' भी कहा जाता है। 'विपरीत' का शाब्दिक अर्थ है 'उल्टा'।
जब कोई शत्रु अत्यंत प्रबल हो, या जब किसी साधक पर मारण, मोहन, उच्चाटन, या विद्वेषण जैसी तांत्रिक क्रियाएं (Black Magic) की गई हों, तब यह मन्त्र उस नकारात्मक ऊर्जा को पकड़कर, उसकी दिशा बदल देता है और उसे वापस भेजने वाले (Sender) के पास ही लौटा देता है। यह क्रिया 'बूमरैंग' (Boomerang) की तरह कार्य करती है।
महत्त्व और लाभ (Significance & Benefits)
"मम शत्रून् भञ्जय भञ्जय..."
भावार्थ: हे देवी! मेरी रक्षा करो और मेरे शत्रुओं की शक्ति, बुद्धि और अहंकार को पूरी तरह छिन्न-भिन्न (Destroy/Shatter) कर दो।
भावार्थ: हे देवी! मेरी रक्षा करो और मेरे शत्रुओं की शक्ति, बुद्धि और अहंकार को पूरी तरह छिन्न-भिन्न (Destroy/Shatter) कर दो।
- अभिचार नाश (Black Magic Reversal): यह मन्त्र किये-कराए जादू-टोने, तंत्र प्रयोग और ऊपरी हवाओं को जड़ से काट देता है।
- शत्रु पराजय: गुप्त और प्रत्यक्ष शत्रुओं के षड्यंत्र विफल हो जाते हैं और वे स्वयं अपनी जाल में फंस जाते हैं।
- अभय कवच: यह साधक के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा घेरा बनाता है जिसे भेदना देवताओं और दानवों के लिए भी असंभव माना जाता है।
- आत्म-बल: इसके पाठ से साधक के भीतर निर्भयता और प्रचंड आत्म-बल का संचार होता है।
साधना और हवन विधि (Ritual Method)
विपरीत प्रत्यङ्गिरा साधना में हवन का विशेष महत्त्व है, जिसे 'मुंच विधि' (Muncha Vidhi) भी कहा जाता है।
- समय: अमावस्या, मंगलवार या शुक्रवार की मध्यरात्रि (Midnight) का समय सर्वश्रेष्ठ है।
- आसन और दिशा: काले या लाल आसन पर बैठें और दक्षिण (South) दिशा की ओर मुख करें।
- हवन सामग्री: हवन कुंड में या मिटटी के पात्र में अग्नि प्रज्वलित करें। मन्त्र का 'स्वाहा' बोलते हुए सूखी लाल मिर्च (Dried Red Chilies), काली मिर्च, और राई (Mustard seeds) की आहुति दें।
- भावना: आहुति देते समय यह प्रबल भावना करें कि आपके सभी कष्ट, शत्रु बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा इस अग्नि में भस्म हो रही हैं और वापस लौट रही हैं।
- सावधानी: यह एक उग्र प्रयोग है। इसे हमेशा लोक-कल्याण और आत्म-रक्षा की भावना से करें, प्रतिशोध की भावना से नहीं।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 'विपरीत प्रत्यङ्गिरा' का क्या अर्थ है?
'विपरीत' (Vipareeta) का अर्थ है 'उल्टा' या 'विपरीत दिशा'। यह देवी केवल नकारात्मक ऊर्जा को रोकती नहीं, बल्कि उसे तीव्रता से वापस उसके स्रोत (भेजने वाले) की ओर मोड़ देती हैं (Boomerang Effect)।
2. लाल मिर्च हवन (Muncha Vidhi) क्या है?
इस मन्त्र के साथ सूखी लाल मिर्च (Red Chilies) को हवन कुंड में या कपूर के साथ जलाने का विशेष विधान है। यह शत्रुओं की बुरी नज़र और अभिचार कर्म को भस्म करने का प्रतीक है।
3. इस मन्त्र में 'भैरव ऋषि' का क्या महत्त्व है?
इस मन्त्र के ऋषि भगवान 'भैरव' हैं, जो स्वयं शिव के उग्र रक्षक रूप हैं। यह दर्शाता है कि यह विद्या अत्यंत तीव्र और तत्काल फलदायी है।
4. 'भञ्जय भञ्जय' का क्या अर्थ है?
मन्त्र में बार-बार आने वाले 'भञ्जय भञ्जय' का अर्थ है '(शत्रु शक्ति को) तोड़ दो, नष्ट कर दो'। यह क्रिया शक्ति का आह्वान है।
5. क्या यह मन्त्र काला जादू (Black Magic) हटा सकता है?
हाँ, यह मन्त्र विशेष रूप से 'अभिचार' (Black Magic), 'कृत्या' (Spells) और 'राक्षस बाधा' को नष्ट करने और वापस भेजने के लिए ही सिद्ध है।
6. पाठ के लिए श्रेष्ठ समय कौन सा है?
अमावस्या की रात्रि, कृष्ण पक्ष की अष्टमी, या मंगलवार/शुक्रवार की मध्यरात्रि (Midnight) इस उग्र साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
7. साधना के समय किस दिशा में मुख रखना चाहिए?
शत्रु नाश और मारण प्रयोगों के प्रतिकार के लिए 'दक्षिण' (South) दिशा की ओर मुख करके जप करना विधान सम्मत है।
8. क्या गृहस्थ इसे जप सकते हैं?
गृहस्थों को इसे केवल आत्म-रक्षा के भाव से जपना चाहिए। किसी के अहित की कामना से किया गया जप साधक को ही हानि पहुँचा सकता है।
9. देवी का स्वरूप कैसा है?
ध्यान श्लोक के अनुसार, देवी के हाथ में खड्ग, कपाल, डमरू और त्रिशूल है। वे बाल खोले हुए, सिंह वाहिनी और भयानक दंष्ट्रों (दांतों) वाली हैं।
10. क्या इसे बिना कवच पाठ के किया जा सकता है?
प्रत्यङ्गिरा साधना में शरीर रक्षा अनिवार्य है। इसलिए पाठ से पहले और बाद में प्रत्यङ्गिरा कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए।
