॥ श्री वाराही गायत्री मन्त्र ॥
॥ ध्यानम् ॥
नीलोत्पलदलश्यामां त्रिनेत्रां मुण्डमालिनीम् ।
वराहवदनां देवीं ध्यायेत् सर्वार्थसिद्धये ॥
॥ प्रथम वाराही गायत्री (वाराहमुखी) ॥
ॐ वाराहमुख्यै विद्महे महादंष्ट्रायै धीमहि ।
तन्नो वाराही प्रचोदयात् ॥
॥ द्वितीय वाराही गायत्री (दण्डनाथा) ॥
ॐ दण्डनाथायै विद्महे पोत्रिणी देवि धीमहि ।
तन्नो वाराही प्रचोदयात् ॥
॥ तृतीय वाराही गायत्री (मंत्रिणी) ॥
ॐ मंत्रिण्यै च विद्महे दण्डिन्यै च धीमहि ।
तन्नो वाराही प्रचोदयात् ॥
॥ प्रथम गायत्री का अर्थ ॥
ॐ, हम वाराहमुखी (वराह मुख वाली) देवी को जानते हैं ।
हम महादंष्ट्रा (बड़े दाँतों वाली) देवी का ध्यान करते हैं ।
वाराही देवी हमें प्रेरित करें ॥
॥ द्वितीय गायत्री का अर्थ ॥
ॐ, हम दण्डनाथा (न्याय-दण्ड की स्वामिनी) को जानते हैं ।
हम पोत्रिणी (थूथन वाली) देवी का ध्यान करते हैं ।
वाराही देवी हमें प्रेरित करें ॥
॥ तृतीय गायत्री का अर्थ ॥
ॐ, हम मंत्रिणी (ललिता की मंत्री) को जानते हैं ।
हम दण्डिनी (दण्ड धारिणी) देवी का ध्यान करते हैं ।
वाराही देवी हमें प्रेरित करें ॥
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श्री वाराही गायत्री — बिना दीक्षा का सौम्य, शक्तिशाली मार्ग
गायत्री मन्त्र किसी भी देवता की उपासना का सबसे सौम्य और शक्तिशाली माध्यम है। जहाँ वाराही मूल मन्त्र 114 अक्षरों का उग्र तांत्रिक मन्त्र है जिसे गुरु दीक्षा अनिवार्य है, वहीं गायत्री मन्त्र 24 अक्षरों का वैदिक छंद है जो बिना दीक्षा के भी जपा जा सकता है।
यहाँ तीन प्रकार की वाराही गायत्री दी गई हैं — प्रत्येक अलग कार्य हेतु: वाराहमुखी (सामान्य शत्रुनाश और सुरक्षा), दण्डनाथा (न्यायालय, शासन, कार्यालय), और मंत्रिणी (श्रीविद्या साधकों हेतु)। तीनों गायत्री का ध्यान श्लोक एक ही है — "नीलोत्पलदलश्यामां... ध्यायेत् सर्वार्थसिद्धये" — नीले कमल जैसी श्यामवर्णा, मुण्डमालिनी देवी।
ध्यान अर्थ: "नीलोत्पलदलश्यामां" = नीले कमल की पंखुड़ी जैसी श्यामवर्णा। "त्रिनेत्रां" = तीन नेत्रों वाली। "मुण्डमालिनीम्" = मुण्डमाला धारिणी। "वराहवदनाम्" = वराह मुख वाली। "सर्वार्थसिद्धये" = सभी कार्यों की सफलता हेतु ध्यान करें।
तीन गायत्री — कौन सी कब जपें?
प्रथम — वाराहमुखी गायत्री: "ॐ वाराहमुख्यै विद्महे महादंष्ट्रायै धीमहि" — सामान्य शत्रुनाश और सुरक्षा। वाराह (सूकर) मुख वाली, महादंष्ट्रा (भयंकर दाँतों वाली) देवी। सबसे लोकप्रिय — नित्य जप हेतु श्रेष्ठ।
द्वितीय — दण्डनाथा गायत्री: "ॐ दण्डनाथायै विद्महे पोत्रिणी देवि धीमहि" — कोर्ट केस, शासन, कार्यालय संबंधी कार्यों हेतु। 'दण्ड' = न्याय का राजदण्ड। 'पोत्रिणी' = थूथन वाली (वराह रूप)।
तृतीय — मंत्रिणी गायत्री: "ॐ मंत्रिण्यै च विद्महे दण्डिन्यै च धीमहि" — श्रीविद्या साधकों हेतु विशेष। 'मंत्रिणी' = ललिता देवी की मंत्री (Prime Minister)। यह रात्रि में भी जपी जा सकती है।
सरल नियम: शत्रु/सुरक्षा → प्रथम। कोर्ट/नौकरी → द्वितीय। आध्यात्मिक उन्नति → तृतीय। तीनों एक साथ भी जप सकते हैं — प्रत्येक 108 बार।
गायत्री जप के 5 विशेष लाभ
1. शत्रु शमन: नियमित जप से शत्रुओं का प्रभाव क्षीण होता है। "महादंष्ट्रायै" — भयंकर दाँतों वाली देवी शत्रुओं को भस्म करती हैं।
2. सर्व रक्षा: भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, बुरी नज़र से पूर्ण सुरक्षा। वाराही कवच के साथ जपने से प्रभाव दोगुना।
3. बुद्धि वृद्धि: "धीमहि" = ध्यान/बुद्धि की प्रार्थना। निर्णय क्षमता, विवेक और एकाग्रता तीव्र होती है।
4. भय निवारण: मन की भय-आशंकाएं दूर। आत्मविश्वास बढ़ता है। "प्रचोदयात्" = प्रेरित करें — देवी भीतर से शक्ति प्रदान करती हैं।
5. बिना दीक्षा: मूल मन्त्र (114 अक्षर) के विपरीत, गायत्री कोई भी जप सकता है — पुरुष, स्त्री, बालक, वृद्ध।
जप विधि और संख्या
जप संख्या:
- नित्य जप: 11, 21, या 108 बार प्रतिदिन।
- अनुष्ठान: सवा लाख (1,25,000) जप — 40 दिनों में।
- विशेष सिद्धि: तीन लाख जप — गुरु मार्गदर्शन में।
उत्तम समय:
- प्रातःकाल सूर्योदय या सायंकाल सूर्यास्त — सर्वोत्तम।
- मंत्रिणी गायत्री रात्रि में भी जपी जा सकती है।
- विशेष दिन: अष्टमी, नवरात्रि, मंगलवार, शनिवार।
माला: लाल चंदन, मूंगा (Coral), या रुद्राक्ष।
ध्यान: जप से पहले ध्यान श्लोक पढ़कर नीलवर्णा, त्रिनेत्रा, मुण्डमालिनी, वराहमुखी देवी का ध्यान करें।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. वाराही गायत्री मन्त्र क्या है?
देवी वाराही की गायत्री — 24 अक्षरों का वैदिक छंद। तीन प्रकार: वाराहमुखी (शत्रुनाश), दण्डनाथा (कोर्ट/कार्यालय), मंत्रिणी (श्रीविद्या)। बिना दीक्षा के जप योग्य।
2. तीन गायत्री में कौन सी जपें?
शत्रुनाश/सुरक्षा → प्रथम (वाराहमुखी)। कोर्ट केस/नौकरी → द्वितीय (दण्डनाथा)। आध्यात्मिक उन्नति → तृतीय (मंत्रिणी)। तीनों एक साथ भी जप सकते हैं।
3. क्या बिना दीक्षा के जप सकते हैं?
हाँ! यही गायत्री का सबसे बड़ा लाभ — बिना दीक्षा के जप योग्य। मूल मन्त्र (114 अक्षर) के विपरीत, गायत्री सौम्य और सर्वसुलभ है।
4. जप कितने बार करें?
नित्य: 11, 21 या 108 बार। अनुष्ठान: सवा लाख (40 दिन)। विशेष सिद्धि: 3 लाख गुरु मार्गदर्शन में।
5. 'धीमहि' का अर्थ?
धीमहि = हम ध्यान करते हैं, चिंतन करते हैं। यह बुद्धि की प्रार्थना है — विवेक, एकाग्रता और निर्णय क्षमता तीव्र होती है।
6. 'दण्डनाथा' का अर्थ?
दण्ड = न्याय का राजदण्ड। दण्डनाथा = दण्ड की स्वामिनी = न्याय की अधिष्ठात्री। कोर्ट केस, शासन, कार्यालय विवाद हेतु विशेष फलदायी।
7. 'मंत्रिणी' कौन हैं?
ललिता त्रिपुरसुंदरी की मंत्री (Prime Minister)। श्रीविद्या परंपरा में वाराही को मंत्रिणी कहा जाता है। तृतीय गायत्री श्रीविद्या साधकों हेतु।
8. गायत्री और मूल मन्त्र में अंतर?
गायत्री: 24 अक्षर, सौम्य, बिना दीक्षा, नित्य जप। मूल मन्त्र: 114 अक्षर, उग्र, गुरु दीक्षा अनिवार्य, तांत्रिक। शुरुआत गायत्री से करें।
9. क्या महिलाएं जप सकती हैं?
हाँ। वाराही स्वयं स्त्री-शक्ति हैं। महिलाएं पूर्ण अधिकार से गायत्री जप कर सकती हैं।
10. ध्यान श्लोक का अर्थ?
नीले कमल जैसी श्यामवर्णा, त्रिनेत्रा, मुण्डमालिनी, वराह मुख वाली देवी — "सर्वार्थसिद्धये" = सभी कार्यों की सफलता हेतु ध्यान करें।
