॥ श्रीहनुमदष्टादशाक्षरमन्त्रजपविधानम् ॥
॥ मूल मन्त्र ॥
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा ॥
॥ विनियोगः ॥
अस्य मन्त्रस्य ईश्वर ऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः । हनुमान् देवता ।
हुं बीजम् । स्वाहा शक्तिः । सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोगः ।
॥ ध्यानम् ॥
ॐ दहनतप्तसुवर्णसमप्रभं भयहरं हृदये विहिताञ्जलिम् ।
श्रवणकुण्डलशोभिमुखाम्बुजं नमत वानरराजमिहाद्भुतम् ॥
॥ षडङ्गन्यासवन्दनम् ॥
ॐ आञ्जनेयाय नमः । ॐ रुद्रमूर्तये नमः ।
ॐ वायुपुत्राय नमः । ॐ अग्निगर्भाय नमः । ॐ रामदूताय नमः ।
ॐ ब्रह्मास्त्रनिवारकाय नमः ।
॥ दिशावन्दनम् ॥
ॐ रामभक्ताय नमः । ॐ महातेजसे नमः । ॐ कपिराजाय नमः ।
ॐ महाबलाय नमः । ॐ द्रोणाद्रिहारकाय नमः ।
ॐ मेरुपीठार्चनकारकाय नमः । ॐ दक्षिणाशाभास्कराय नमः ।
ॐ सर्वविघ्ननिवारकाय नमः ।
॥ परिवारवन्दनम् ॥
ॐ सुग्रीवाय नमः । ॐ अङ्गदाय नमः । ॐ नीलाय नमः ।
ॐ जाम्बवते नमः । ॐ नलाय नमः । ॐ सुषेणाय नमः ।
ॐ द्विविदाय नमः । ॐ मैन्दाय नमः ।
॥ यन्त्रस्थापना ॥
संविन्मय प्रभो देव परामृतरसप्रिय ।
अभीष्टं मम देहि त्वं शरणागतवत्सल ॥
॥ विश्वलोचनचक्रपूजा ॥
ॐ नमो भगवते हनुमते सर्वभूतात्मने हनुमते सर्वात्मसंयोग-
पद्मपीठात्मने नमः ॥
॥ फलश्रुति ॥
काम्यमन्त्रयोगफलानि जपित्वा क्षुद्ररोगेभ्यो मुच्यते दिवसत्रयात् ।
भूतप्रेतपिशाचादिनाशाय च समाचरेत् ।
महारोगनिवृत्त्यै च मुच्यते दिवसत्रयात् ।
एकाशनोऽयुतं नित्यं जपन्ध्यायन्कपीश्वरम् ।
राक्षसौघं विनिघ्नन्तं अचिराज्जयति द्विषः ॥
लङ्कां दहन्तं निध्यायन्नयुतं प्रजपेन्मनुम् ।
शत्रूणां प्रदहेद्ग्रामानचिरादेव साधकः ॥
यः कपीशं सदा गेहे पूजयेज्जपतत्परः ।
आयुर्लक्ष्म्यौ प्रवर्धेते तस्य नश्यन्त्युपद्रवाः ॥
शार्दूलतस्करादिभ्यो रक्षेन्मनुरयं स्मृतः ।
प्रस्वापकाले चौरेभ्यो दुष्टस्वप्नादपि ध्रुवम् ॥संलिखित ग्रंथ पढ़ें
अष्टादशाक्षर मन्त्र परिचय
अष्टादशाक्षर मन्त्र (18 Syllable Mantra) भगवान हनुमान का एक "काम्य मन्त्र" है, जिसका अर्थ है - विशेष कामनाओं को पूरा करने वाला सिद्ध मंत्र। यह मंत्र
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा अत्यंत प्रभावशाली है।इस विधान में मंत्र जप के साथ-साथ दिशा वंदन, परिवार वंदन (वानर वीरों की पूजा) और यन्त्र स्थापना का भी समावेश है, जो इसे एक पूर्ण साधना बनाता है।
साधना फल (Benefits)
- रोग मुक्ति: फलश्रुति के अनुसार, इसका जप करने से मात्र 3 दिनों में क्षुद्र रोगों (Minor diseases) और महारोगों से भी राहत मिलती है।
- शत्रु विजय: यदि कोई एकासन (एक बार भोजन) करके 10,000 (अयुत) जप करता है, तो वह शीघ्र ही शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है।
- सुरक्षा: यह मंत्र चोर, डाकू (तस्कर) और हिंसक जानवरों (शार्दूल) से रक्षा करता है।
- दुःस्वप्न नाश: सोते समय इसका स्मरण करने से बुरे सपने नहीं आते।
- समृद्धि: जो घर में इस विधान से पूजा करता है, उसकी आयु और लक्ष्मी (धन) की वृद्धि होती है और सारे उपद्रव नष्ट हो जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
१. अष्टादशाक्षर मंत्र का क्या अर्थ है?
मंत्र का अर्थ है: "मैं उन भगवान आंजनेय (अंजनी पुत्र) को नमन करता हूँ जो अत्यधिक बलशाली (महाबली) हैं।" 'स्वाहा' मंत्र को आहुति के रूप में समर्पित करने का सूचक है।
२. दिशा वंदन और परिवार वंदन क्यों किया जाता है?
साधना के दौरान अपनी चारों दिशाओं को सुरक्षित करने के लिए 'दिशा वंदन' किया जाता है। 'परिवार वंदन' में हनुमान जी के सहयोगियों (सुग्रीव, अंगद आदि) का सम्मान किया जाता है ताकि वे साधना में सहायता करें।
३. 'अयुत' जप का क्या अर्थ है?
'अयुत' का अर्थ है दस हजार (10,000)। विशेष फल प्राप्ति के लिए 10,000 मंत्रों का अनुष्ठान करने का विधान बताया गया है।
४. क्या इसे बिना यन्त्र के कर सकते हैं?
हृदय में हनुमान जी का ध्यान करके भी यह साधना की जा सकती है। यदि ताम्र यन्त्र उपलब्ध न हो, तो भोजपत्र या कागज पर अष्टदल कमल बनाकर पूजा की जा सकती है।
५. "विश्वलोचन चक्र" क्या है?
यह एक विशिष्ट तांत्रिक चक्र है जिसमें हनुमान जी को 'सर्वभूतात्मा' (सभी प्राणियों की आत्मा) के रूप में पूजा जाता है। यह साधक को विश्वदृष्टि और ज्ञान प्रदान करता है।
६. क्या यह मंत्र गृहस्थों के लिए सुरक्षित है?
हाँ, "स्वाहा" से अंत होने वाले मंत्र सौम्य और गृहस्थों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। यह मंत्र रक्षा और समृद्धि दोनों देता है, इसलिए परिवार वाले इसे निःसंकोच कर सकते हैं।
७. जप के लिए कौन सी माला प्रयोग करें?
हनुमान मंत्रों के लिए लाल चन्दन, मूंगा या रुद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
८. "एकाशन" का नियम क्या है?
श्लोक में "एकाशनोऽयुतं" कहा गया है। इसका अर्थ है कि अनुष्ठान के दिनों में साधक को दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन करना चाहिए और बाकी समय फलाहार या व्रत रखना चाहिए।
९. क्या स्त्रियाँ यह साधना कर सकती हैं?
हाँ, स्त्रियाँ भी इस मंत्र का जप कर सकती हैं। वे यन्त्र पूजा और स्पर्श न करें, लेकिन मंत्र का मानसिक या वाचिक जप पूरी श्रद्धा से कर सकती हैं।
१०. किस दिन से शुरुआत करें?
मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती या किसी भी शुभ पूर्णिमा से इस साधना का संकल्प लेना चाहिए।
