श्री एकमुखी हनुमत् कवचम् (ब्रह्माण्ड पुराण)
Shri Ekamukhi Hanumat Kavacham

इस कवच का विशिष्ट महत्व
श्री एकमुखी हनुमत् कवचम् (Shri Ekamukhi Hanumat Kavacham), जो ब्रह्माण्डपुराण (Brahmanda Purana) के नारद-अगस्त्य संवाद से लिया गया है, भगवान हनुमान की स्तुति में एक अत्यंत शक्तिशाली रक्षा स्तोत्र है। 'कवच' का अर्थ है 'कवच' या 'सुरक्षा कवच', और यह स्तोत्र श्री रामचन्द्र जी द्वारा स्वयं कहा गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें भगवान राम स्वयं अपने प्रिय भक्त हनुमान के विभिन्न नामों और रूपों का आह्वान करके शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा करने की प्रार्थना करते हैं। यह कवच हनुमान जी को रामदूत, पवनात्मज, अञ्जनीसूनु, महाबल, और सभी संकटों से बचाने वाले के रूप में पूजता है। राम जी द्वारा रचित होने के कारण, इस कवच की शक्ति और प्रामाणिकता अतुलनीय है।
कवच के प्रमुख भाव और लाभ
इस कवच की फलश्रुति और श्लोकों में वर्णित गुणों के आधार पर, इसके पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
भौतिक सुख और मुक्ति की प्राप्ति (Attainment of Worldly Pleasures and Liberation): फलश्रुति स्पष्ट रूप से कहती है कि जो विद्वान इस कवच का पाठ करता है, वह "भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति" अर्थात् इस लोक में सभी प्रकार के भोग (सुख) और अंत में मोक्ष (Moksha), दोनों को प्राप्त करता है।
शत्रुओं पर त्वरित विजय (Quick Victory over Enemies): जो व्यक्ति तीन महीने तक, दिन में एक या तीन बार इसका पाठ करता है, वह "सर्वान् रिपून् क्षणान् जित्वा" अर्थात् क्षण भर में अपने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लेता है और धन-संपत्ति (wealth and prosperity) को प्राप्त करता है।
सर्वांगीण सुरक्षा (All-round Protection): यह कवच शरीर के प्रत्येक अंग, सिर से लेकर पैरों की उंगलियों तक, की रक्षा के लिए हनुमान जी के विशिष्ट रूपों का आह्वान करता है। यह "सर्वापद्भ्यो निरन्तरं" अर्थात् सभी आपत्तियों से निरंतर रक्षा (protection) प्रदान करता है।
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा (Protection from Negative Energies): यह कवच भूत, प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस और सभी प्रकार के ज्वर (बुखार) जैसी बाधाओं को दूर करता है। इसके उच्चारण मात्र से सभी प्रकार के ज्वर नष्ट हो जाते हैं।
पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
सर्वोत्तम फल के लिए, इस कवच का पाठ तीन महीने तक प्रतिदिन एक या तीन बार करना चाहिए।
हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti), मंगलवार और शनिवार के दिन इस कवच का पाठ करना विशेष रूप से शक्तिशाली और शीघ्र फलदायी होता है।
पाठ से पहले विनियोग, करन्यास, अंगन्यास और भगवान हनुमान के दिव्य स्वरूप का ध्यान करना अनिवार्य है, जैसा कि स्तोत्र में निर्देशित है।
किसी भी प्रकार के गंभीर संकट, शत्रु भय, रोग, या किसी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए इस कवच का पाठ एक अचूक उपाय है।