Logoपवित्र ग्रंथ

दुर्गा सप्तशती सिद्ध सम्पुट मंत्र (Durga Saptashati Siddha Samput Mantra) – ३० सिद्ध मंत्र

दुर्गा सप्तशती सिद्ध सम्पुट मंत्र (Durga Saptashati Siddha Samput Mantra) – ३० सिद्ध मंत्र
॥ दुर्गा सप्तशती सिद्ध सम्पुट मंत्र ॥ ❀ सामूहिक कल्याण के लिये मंत्र - देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्‍‌र्या । तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ॥ ❀ विश्‍व के अशुभ तथा भय का विनाश करने के लिये मंत्र - यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्‍च न हि वक्तुमलं बलं च । सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु ॥ ❀ विश्‍व की रक्षा के लिये मंत्र - या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः । श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्‍वम् ॥ ❀ विश्‍व के अभ्युदय के लिये मंत्र - विश्‍वेश्‍वरि त्वं परिपासि विश्‍वं विश्‍वात्मिका धारयसीति विश्‍वम् । विश्‍वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्‍वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥ ❀ विश्‍वव्यापी विपत्तियों के नाश के लिये मंत्र - देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य । प्रसीद विश्‍वेश्‍वरि पाहि विश्‍वं त्वमीश्‍वरी देवि चराचरस्य ॥ ❀ विश्‍व के पाप-ताप-निवारण के लिये मंत्र - देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः । पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्‍च महोपसर्गान् ॥ ❀ विपत्ति-नाश के लिये मंत्र - शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ (भावार्थ: शरणागतों, दीनों एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहने वाली नारायणी देवी! आपको नमस्कार है।) ❀ विपत्तिनाश और शुभ की प्राप्ति के लिये मंत्र - करोतु सा नः शुभहेतुरीश्‍वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः । ❀ भय-नाश के लिये मंत्र - सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥ एतत्ते वदनं सौम्यं लोचनत्रयभूषितम् । पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायनि नमोऽस्तु ते ॥ ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम् । त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते ॥ ❀ पाप-नाश के लिये मंत्र - हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत् । सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽनः सुतानिव ॥ ❀ रोग-नाश के लिये मंत्र - रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥ ❀ महामारी-नाश के लिये मंत्र - जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥ ❀ आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिये मंत्र - देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥ ❀ सुलक्षणा पत्‍‌नी की प्राप्ति के लिये मंत्र - पत्‍‌नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् । तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम् ॥ ❀ बाधा-शान्ति के लिये मंत्र - सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्‍वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ॥ ❀ सर्वविध अभ्युदय के लिये मंत्र - ते सम्मता जनपदेषु धनानि तेषां तेषां यशांसि न च सीदति धर्मवर्गः । धन्यास्त एव निभृतात्मजभृत्यदारा येषां सदाभ्युदयदा भवती प्रसन्ना ॥ ❀ दारिद्र्यदुःखादिनाश के लिये मंत्र - दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता ॥ ❀ रक्षा पाने के लिये मंत्र - शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके । घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च ॥ ❀ समस्त विद्याओं और स्त्रियों में मातृभाव की प्राप्ति के लिये मंत्र - विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु । त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः ॥ ❀ सब प्रकार के कल्याण के लिये मंत्र - सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ❀ शक्ति-प्राप्ति के लिये मंत्र - सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि । गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ❀ प्रसन्नता की प्राप्ति के लिये मंत्र - प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्‍वार्तिहारिणि । त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव ॥ ❀ विविध उपद्रवों से बचने के लिये मंत्र - रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्‍च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र । दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्‍वम् ॥ ❀ बाधामुक्त होकर धन-पुत्रादि की प्राप्ति के लिये मंत्र - सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः । मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॥ ❀ भुक्ति-मुक्ति की प्राप्ति के लिये मंत्र - विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम् । रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥ ❀ पापनाश तथा भक्ति की प्राप्ति के लिये मंत्र - नतेभ्यः सर्वदा भक्त्‍‌या चण्डिके दुरितापहे । रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥ ❀ स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति के लिये मंत्र - सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी । त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः ॥ ❀ स्वर्ग और मुक्ति के लिये मंत्र - सर्वस्य बुद्धिरुपेण जनस्य हृदि संस्थिते । स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ❀ मोक्ष की प्राप्ति के लिये मंत्र - त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्‍वस्य बीजं परमासि माया । सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः ॥ ❀ स्वप्न में सिद्धि-असिद्धि जानने के लिये मंत्र - दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके । मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय ॥

दुर्गा सप्तशती सिद्ध सम्पुट मंत्र: आदि शक्ति की अमोघ शक्ति का परिचय (Introduction)

दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati), जिसे 'देवी माहात्म्य' भी कहा जाता है, मार्कण्डेय पुराण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंश है। इसमें ७०० श्लोक हैं, जो माँ दुर्गा की महिमा, उनके युद्धों और उनके द्वारा असुरों के संहार का वर्णन करते हैं। आध्यात्मिक साधना में 'सम्पुट' (Samput) का अर्थ होता है—किसी मंत्र या पाठ को किसी विशिष्ट मंत्र के द्वारा 'आवरण' प्रदान करना। जब सप्तशती के किसी विशेष सिद्ध मंत्र को पाठ के प्रारंभ और अंत में लगाया जाता है, तो उसे 'सम्पुट पाठ' कहते हैं।
सम्पुट मंत्रों की महत्ता: सप्तशती के ये ३०-३१ मंत्र कोई साधारण श्लोक नहीं हैं, बल्कि ये मंत्र विज्ञान के वे सूत्र हैं जिन्हें ऋषियों ने हजारों वर्षों की तपस्या से 'सिद्ध' किया है। प्रत्येक सम्पुट मंत्र एक विशिष्ट ऊर्जा (Energy Vibration) को जागृत करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई असाध्य रोग से पीड़ित है, तो 'रोगानशेषानपहंसि तुष्टा' मंत्र का सम्पुट लगाने से सप्तशती पाठ का प्रभाव उस रोग को जड़ से मिटाने की दिशा में केंद्रित हो जाता है।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पक्ष: सम्पुट का अर्थ है 'Encapsulation'। जैसे एक कैप्सूल के भीतर दवा सुरक्षित रहती है और शरीर में सटीक स्थान पर पहुँचती है, वैसे ही सम्पुट मंत्र संपूर्ण सप्तशती की ७०० श्लोकों की सामूहिक शक्ति को साधक की विशेष 'कामना' की ओर मोड़ देते हैं। यह मंत्र विज्ञान का वह उच्च स्तर है जहाँ ध्वनि की तरंगे ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़कर 'संकल्प' को 'सिद्धि' में बदल देती हैं।
कलियुग में प्रासंगिकता: कलियुग के अशांत वातावरण में, जहाँ मनुष्य मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और अज्ञात रोगों से घिरा है, सप्तशती के ये सिद्ध सम्पुट मंत्र एक सुरक्षा कवच (Armor) की तरह कार्य करते हैं। चाहे वह 'बाधा शान्ति' के लिए हो या 'आरोग्य' के लिए, ये मंत्र साधक के चारों ओर एक सकारात्मक प्रभामंडल (Aura) का निर्माण करते हैं। माँ चण्डिका की कृपा से इन मंत्रों के माध्यम से असंभव कार्य भी सुलभ हो जाते हैं। इन ३० मंत्रों की सूची में जीवन की लगभग हर समस्या का आध्यात्मिक समाधान समाहित है।

सिद्ध सम्पुट मंत्रों का विशिष्ट महत्व (Significance)

सप्तशती के मंत्रों का महत्व उनके अर्थ के साथ-साथ उनके 'नाद' (Sound) में भी है। इन मंत्रों को 'सप्तशती का सार' माना जाता है।
शक्ति का केन्द्रीकरण: सम्पुट का प्रयोग करने से मंत्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, 'सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो' मंत्र न केवल धन-धान्य प्रदान करता है, बल्कि साधक के भविष्य को भी सुरक्षित करता है। 'पत्नीं मनोरमां देहि' मंत्र उन युवकों के लिए वरदान है जो श्रेष्ठ जीवनसाथी की खोज में हैं, जबकि 'जयन्ती मङ्गला काली' मंत्र समस्त संसार की रक्षा और महामारी के नाश के लिए प्रयोग किया जाता है।

सम्पुट मंत्रों के चमत्कारी लाभ — फलश्रुति (Benefits)

इन सिद्ध मंत्रों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
  • रोग निवारण: असाध्य रोगों से मुक्ति और आरोग्य की प्राप्ति के लिए रोग-नाशक मंत्र अमोघ हैं।
  • भय और शत्रु नाश: 'भयेभ्यस्त्राहि नो देवि' जैसे मंत्र मानसिक भय और गुप्त शत्रुओं के प्रभाव को समाप्त करते हैं।
  • दरिद्रता निवारण: 'दारिद्र्यदुःखभयहारिणी' मंत्र का जाप आर्थिक तंगी को दूर कर घर में लक्ष्मी का वास कराता है।
  • बाधा शान्ति: 'सर्वाबाधाप्रशमनं' मंत्र व्यापार, नौकरी या विवाह में आ रही किसी भी प्रकार की रुकावट को दूर करता है।
  • सर्व कल्याण: 'सर्वमङ्गलमङ्गल्ये' मंत्र संपूर्ण परिवार की खुशहाली और सौभाग्य में वृद्धि करता है।

पाठ विधि एवं सम्पुट प्रयोग (Ritual Method)

सम्पुट मंत्रों का प्रयोग दो तरीके से किया जा सकता है—स्वतंत्र मंत्र जप के रूप में या सप्तशती के पूर्ण पाठ के साथ।

साधना के नियम

  • समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल सर्वोत्तम है। नवरात्रि के दौरान इनका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
  • शुद्धि: स्नान के पश्चात स्वच्छ लाल वस्त्र पहनें। लाल रंग शक्ति का प्रतीक है।
  • आसन: ऊनी या कुशा के आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
  • विधि: अपनी समस्या के अनुसार मंत्र चुनें। यदि सप्तशती पाठ कर रहे हैं, तो प्रत्येक श्लोक के प्रारंभ और अंत में इसे जोड़ें। यदि केवल मंत्र जप कर रहे हैं, तो १०८ बार (एक माला) जप करें।
  • भोग: माँ दुर्गा को सफेद मिठाई, फल या सूखे मेवों का भोग लगाएं।

विशेष सावधानी

  • इन मंत्रों का उच्चारण शुद्ध होना चाहिए। यदि संस्कृत कठिन लगे, तो किसी ब्राह्मण का मार्गदर्शन लें।
  • जप के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य और सात्विक भोजन का पालन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. सम्पुट मंत्र का क्या अर्थ है?

सम्पुट का अर्थ है—घेरना या जोड़ना। जब किसी मुख्य मंत्र या पाठ के पहले और बाद में एक सिद्ध मंत्र लगाया जाता है, तो उसे सम्पुट कहते हैं। यह पाठ की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है।

2. रोग मुक्ति के लिए सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

"रोगानशेषानपहंसि तुष्टा..." मंत्र रोग निवारण के लिए सर्वश्रेष्ठ सम्पुट माना गया है। इसके साथ ही 'महामारी-नाश' के लिए 'जयन्ती मङ्गला काली' मंत्र का पाठ किया जाता है।

3. क्या इन मंत्रों का पाठ घर पर किया जा सकता है?

हाँ, शुद्धि और श्रद्धा के साथ इन मंत्रों का पाठ घर पर किया जा सकता है। नित्य पूजा में अपनी समस्या के अनुसार किसी भी एक मंत्र की माला जपी जा सकती है।

4. बाधा शान्ति के लिए कौन सा मंत्र पढ़ें?

व्यापार, विवाह या कार्यों में रुकावट के लिए "सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्‍वरि..." मंत्र का पाठ करना चाहिए।

5. क्या इन मंत्रों का पाठ केवल नवरात्रि में ही करना चाहिए?

नहीं, यद्यपि नवरात्रि में इनका प्रभाव तीव्र होता है, लेकिन आप इन्हें वर्ष के किसी भी दिन श्रद्धापूर्वक पढ़ सकते हैं।

6. क्या स्त्रियाँ पीरियड्स के दौरान ये मंत्र जप सकती हैं?

धार्मिक मर्यादा के अनुसार उन ५ दिनों में शारीरिक पूजा वर्जित है, परंतु आप मानसिक रूप से (मन ही मन) मंत्रों का स्मरण कर सकती हैं।

7. सुयोग्य पत्नी की प्राप्ति के लिए कौन सा मंत्र है?

"पत्‍‌नीं मनोरमां देहि..." मंत्र उन पुरुषों के लिए है जो श्रेष्ठ और धार्मिक पत्नी की कामना करते हैं।

8. क्या सम्पुट मंत्रों के लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य है?

सामान्य भक्ति भाव से पाठ करने के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं है, परंतु विशेष तांत्रिक अनुष्ठान के लिए गुरु का मार्गदर्शन सदैव शुभ रहता है।

9. स्वप्न में भविष्य जानने के लिए कौन सा मंत्र है?

"दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं... मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय" मंत्र का पाठ सोने से पहले करने से माँ स्वप्न के माध्यम से मार्गदर्शन करती हैं।

10. क्या मंत्र का उच्चारण गलत होने पर नुकसान होता है?

सात्विक भाव और प्रेम से की गई भक्ति में माँ त्रुटियों को क्षमा करती हैं, परंतु मंत्र विज्ञान में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व है, इसलिए प्रयास करें कि उच्चारण सही हो।