॥ श्री बगलामुखी मंत्राः ॥
॥ ब्रह्मास्त्र विद्या ॥
१. एकाक्षरी बगलामुखी बीज मन्त्र
[सभी मन्त्रों का प्राण — यह एक अक्षर ही ब्रह्मास्त्र के समान है]
॥ ह्लीं ॥
(उच्चारण: Hleem — 'ह' = शिव तत्व, 'ल' = स्थिरता, 'ई' = शक्ति, 'बिन्दु' = दुःख हारी)
२. त्र्यक्षर मन्त्र
[3 अक्षरों वाला मन्त्र — सरल और प्रभावशाली]
॥ ॐ ह्लीं ॐ ॥
३. चतुराक्षर मन्त्र
[4 अक्षरों वाला मन्त्र]
॥ ॐ आं ह्लीं क्रों ॥
४. पञ्चाक्षर मन्त्र
[5 अक्षरों वाला — रक्षा और विजय दोनों के लिए]
॥ ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥
५. अष्टाक्षर मन्त्र
[8 अक्षरों वाला — सिद्ध साधकों द्वारा प्रयुक्त]
॥ ॐ आं ह्लीं क्रों हुं फट् स्वाहा ॥
६. एकादशाक्षर मन्त्र
[11 अक्षरों वाला — पूर्ण स्तम्भन हेतु]
॥ ॐ ह्लीं क्लीं ह्लीं बगलामुखि ठः ठः ॥
७. श्री बगलामुखी मूल मन्त्र
[देवी का प्रधान आह्वान मन्त्र]
॥ ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः ॥
८. श्री बगलामुखी गायत्री मन्त्र
[ध्यान, मानसिक शांति और आत्मबल प्राप्ति के लिए]
॥ ॐ बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥
अर्थ: हम बगलामुखी देवी को जानते हैं (स्मरण करते हैं), जो (शत्रुओं को) स्तम्भित करने वाली हैं, हम उनका ध्यान करते हैं। वे देवी हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
९. श्री बगलामुखी सिद्धि मन्त्र
[सभी कार्यों की सिद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए]
॥ ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वकार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ॥
१०. ब्रह्मास्त्र मन्त्र (३६ अक्षरी महामन्त्र)
[शत्रु नाश, वाक् स्तम्भन और बुद्धि विनाश हेतु सर्वाधिक शक्तिशाली मन्त्र — गुरु दीक्षा अनिवार्य]
॥ ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
मन्त्रार्थ (Word-by-Word Meaning):
ॐ ह्लीं — बीज मन्त्र, शक्ति का आह्वान।
बगलामुखि — हे माँ बगलामुखी!
सर्वदुष्टानां — सभी दुष्टों (शत्रुओं) की
वाचं स्तम्भय — वाणी (Speech) को रोक दो।
मुखं स्तम्भय — मुख (चेहरे) को जड़ कर दो।
पदं स्तम्भय — पैरों (गति/कदम) को स्तम्भित कर दो।
जिव्हां कीलय — जीभ पर कील ठोक दो (बोलने में असमर्थ कर दो)।
बुद्धिं विनाशय — उनकी (दुष्ट) बुद्धि का विनाश करो।
ह्लीं ॐ स्वाहा — पूर्णता और समर्पण (अग्नि देवता को अर्पण)।
॥ इति श्री बगलामुखी मंत्राः सम्पूर्णम् ॥
इतर पश्यतु ।संलिखित ग्रंथ (Related Texts)
बगलामुखी मन्त्र - परिचय (Introduction)
माँ बगलामुखी (Bagalamukhi) दश महाविद्याओं में आठवीं शक्ति हैं। इनका सबसे प्रसिद्ध नाम 'पीताम्बरा देवी' है, क्योंकि ये पूर्णतः पीतवर्ण (Golden Yellow) की हैं — पीला शरीर, पीले वस्त्र, पीले अलंकार। इनकी उत्पत्ति हरिद्रा सरोवर (हल्दी जैसे पीले जल का सरोवर), सौराष्ट्र (गुजरात) से हुई है।
उत्पत्ति कथा: पुराणों के अनुसार, सतयुग में एक भयंकर महाप्रलय आयी जिसने समस्त सृष्टि को नष्ट करने की धमकी दी। सामान्य तूफान या बाढ़ नहीं, बल्कि एक ऐसा विनाशकारी तूफान जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों देवों को भी चिंतित कर दे। भगवान विष्णु ने सृष्टि रक्षा हेतु सौराष्ट्र (काठियावाड़, गुजरात) के हरिद्रा सरोवर के तट पर कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर, चतुर्दशी तिथि, मंगलवार की अर्द्धरात्रि (वीर रात्रि) को माँ बगलामुखी उस पीले सरोवर से प्रकट हुईं। प्रकट होते ही, उन्होंने अपनी अमोघ 'स्तम्भन शक्ति' से उस महाप्रलय को रोक दिया और समस्त सृष्टि की रक्षा की। यही कारण है कि इन्हें 'स्तम्भिनी' (रोकने वाली) कहा जाता है।
असुर मदन की कथा: एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार, असुर मदन को ब्रह्मा जी से 'वाक सिद्धि' का वरदान प्राप्त था — वह जो भी बोलता, वह तत्काल सत्य हो जाता। मदनासुर ने इस शक्ति का दुरुपयोग कर तीनों लोकों में आतंक मचा दिया। जब कोई भी देवता उसे पराजित न कर सका, तब भगवान विष्णु ने माँ बगलामुखी की आराधना की। माँ प्रकट हुईं और उन्होंने बायें हाथ से मदनासुर की जीभ पकड़ ली तथा दायें हाथ में गदा उठाकर उसे प्रहार किया। उसकी वाणी स्तम्भित हो गई और वह निस्तेज हो गया। यही माँ की मूर्ति का प्रतीकात्मक स्वरूप है — एक हाथ में जीभ, दूसरे में गदा।
ब्रह्मास्त्र विद्या: माँ बगलामुखी को 'ब्रह्मास्त्र रूपिणी' कहा जाता है। रुद्रायामल तंत्र में उल्लेख है कि जिस प्रकार ब्रह्मास्त्र अमोघ (अचूक) और अनिवार्य (जो छोड़ा जाए, वह लक्ष्य भेदकर ही रुके) है, ठीक उसी प्रकार माँ बगलामुखी का मन्त्र भी तत्काल प्रभावशाली और अपराजित है। मान्यता है कि प्रजापति, सनत कुमार, नारद, परशुराम और द्रोणाचार्य — ये सभी माँ पीताम्बरा की ब्रह्मास्त्र विद्या के उपासक रहे हैं।
रामायण और महाभारत में प्रमाण: मान्यता है कि श्रीराम ने रावण-वध से पूर्व माँ पीताम्बरा की उपासना की और उनसे ब्रह्मास्त्र प्राप्त किया। महाभारत में जब अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाया और कोई भी उसे हिला न सका — यह माँ बगलामुखी की 'स्तम्भन शक्ति' का प्रत्यक्ष प्रमाण माना जाता है। अर्जुन ने भी महाभारत युद्ध से पूर्व माँ पीताम्बरा बगलामुखी की आराधना की थी।
विशिष्ट महत्व — स्तम्भन शक्ति (Significance)
माँ बगलामुखी की साधना का सार एक शब्द में है — 'स्तम्भन' (Stambhan)। यह शक्ति किसी भी अनिष्टकारी प्रवृत्ति को वहीं रोक देती है, चाहे वह बाहरी शत्रु हो या आंतरिक विकार।
- वाक् स्तम्भन (Speech Paralysis): विरोधियों की वाणी को रोक देती हैं। कोर्ट-कचहरी, बहस, और चुनाव में विरोधी निष्प्रभावी हो जाता है।
- बुद्धि स्तम्भन (Intellect Paralysis): शत्रु की बुद्धि भ्रमित हो जाती है। वह आपके विरुद्ध कोई योजना नहीं बना पाता।
- गति स्तम्भन (Movement Paralysis): 'पदं स्तम्भय' — शत्रु के पैर जड़ हो जाते हैं, अर्थात् वह आपके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।
- आंतरिक स्तम्भन: काम, क्रोध, लोभ, मोह — ये आंतरिक शत्रु भी 'स्तम्भित' हो जाते हैं। साधक को आत्म-नियंत्रण और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- तांत्रिक बाधा नाश: यदि किसी पर मारण, मोहन, उच्चाटन जैसे तांत्रिक प्रयोग किए गए हों, तो यह मन्त्र उन सबको नष्ट कर देता है।
पाठ के लाभ (Benefits)
- कोर्ट केस / मुकदमों में विजय: झूठे आरोपों, न्यायालय के विवादों, और कानूनी लड़ाइयों में यह मन्त्र अचूक है। विरोधी पक्ष का मुख बंद हो जाता है।
- वाक सिद्धि (Speech Power): वक्ताओं, नेताओं, वकीलों और शिक्षकों के लिए। आपकी वाणी में ऐसा प्रभाव आता है कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
- शत्रु दमन: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शत्रुओं (ईर्ष्या, षड्यंत्र, बुरी नज़र) से पूर्ण सुरक्षा। शत्रु के मन में भय उत्पन्न होता है।
- प्रतियोगिता / परीक्षा में सफलता: बहस, डिबेट, इंटरव्यू, और प्रतियोगी परीक्षाओं में विजय प्राप्ति।
- राजनीतिक सफलता: चुनाव, सत्ता संघर्ष, और जनता पर प्रभाव के लिए राजनेताओं में यह साधना अत्यंत लोकप्रिय है।
- मानसिक शांति और आत्मबल: गायत्री मन्त्र के नियमित जाप से भय, चिंता और अवसाद (Depression) से मुक्ति मिलती है।
सम्पूर्ण जाप विधि (Complete Chanting Method)
- स्नान और शुद्धि: प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध हों। यदि सम्भव हो तो जल में हल्दी मिलाकर स्नान करें (माँ हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुई हैं)।
- वस्त्र: पूर्णतः पीले वस्त्र (धोती-कुर्ता या साड़ी) धारण करें। अन्य रंग वर्जित हैं।
- पूजा स्थल: स्वच्छ स्थान पर पीला आसन बिछाएँ। माँ की मूर्ति या चित्र पीले वस्त्र पर स्थापित करें।
- दीपक: सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें (घी का भी प्रयोग कर सकते हैं)।
- संकल्प: दायें हाथ में जल, अक्षत (चावल), और पीला फूल लेकर संकल्प लें — अपना नाम, गोत्र, और मनोकामना स्पष्ट रूप से बोलें।
- माला: 108 मनकों वाली 'हल्दी की माला' (Turmeric Rosary) सर्वश्रेष्ठ है। इसके अभाव में पीले हकीक (Yellow Agate) या कमलगट्टे की माला प्रयोग करें।
- जाप संख्या: प्रतिदिन कम से कम 1 माला (108 बार) जाप करें। विशेष कामना के लिए 11 माला प्रतिदिन। मन्त्र सिद्धि हेतु 1,25,000 जाप (लगभग 40 दिन में 11 माला प्रतिदिन) आवश्यक है।
- नैवेद्य (भोग): माँ को पीली वस्तुएं चढ़ाएँ — बेसन के लड्डू, चने की दाल, पीली मिठाई, केला। फूल पीले कनेर या गेंदे के होने चाहिए। हल्दी और पीला चंदन अर्पित करें।
- दिशा: शत्रु विजय के लिए पूर्व (East) दिशा की ओर मुख करें। धन प्राप्ति के लिए उत्तर (North) दिशा। स्तम्भन प्रयोग (केवल गुरु आदेश से) के लिए दक्षिण (South) दिशा।
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे) या रात्रि 9 बजे के बाद सर्वोत्तम। विशेष साधना के लिए मंगलवार या अमावस्या-पूर्णिमा की रात्रि।
- गोपनीयता: साधना सदैव गुप्त रखें। किसी को न बताएँ। ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक भोजन करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. माँ बगलामुखी को 'ब्रह्मास्त्र विद्या' क्यों कहते हैं?
जिस प्रकार ब्रह्मास्त्र अमोघ और अनिवार्य है — एक बार चलने पर लक्ष्य भेदकर ही रुकता है — ठीक उसी प्रकार माँ बगलामुखी का मन्त्र भी तत्काल फलदायी और अपराजित है। रुद्रायामल तंत्र में इन्हें 'ब्रह्मास्त्र रूपिणी' कहा गया है। प्रजापति, सनत कुमार, नारद, परशुराम और द्रोणाचार्य — ये सब इस विद्या के उपासक रहे हैं।
2. हरिद्रा सरोवर कहाँ है और इसका क्या महत्व है?
हरिद्रा सरोवर सौराष्ट्र (गुजरात) में स्थित माना जाता है। सतयुग में जब महाप्रलय आयी, तब भगवान विष्णु ने इसी हल्दी-सरोवर के तट पर तपस्या की, जिससे माँ बगलामुखी प्रकट हुईं। चतुर्दशी तिथि, मंगलवार की अर्द्धरात्रि (वीर रात्रि) को प्रकट होने के कारण इन तिथियों को विशेष महत्व दिया जाता है। हरिद्रा (हल्दी) से प्रकट होने के कारण इन्हें 'पीताम्बरा' कहते हैं।
3. क्या रामायण और महाभारत में बगलामुखी का उल्लेख है?
हाँ। मान्यता है कि श्रीराम ने रावण-वध से पूर्व माँ पीताम्बरा की उपासना की और उनसे ब्रह्मास्त्र प्राप्त किया। रामायण में मेघनाथ ने हनुमान की गति रोकने के लिए बगलामुखी की स्तम्भन शक्ति का प्रयोग किया। अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाकर 'स्तम्भन' की शक्ति दिखाई। और अर्जुन ने भी महाभारत युद्ध से पूर्व माँ पीताम्बरा बगलामुखी की आराधना की थी।
4. मन्त्र जाप के लिए कौन सी माला सर्वोत्तम है?
माँ हरिद्रा सरोवर (हल्दी) से प्रकट हुई हैं, इसलिए 'हल्दी की माला' (Turmeric Rosary) सर्वश्रेष्ठ है। इसके अभाव में 'पीले हकीक' (Yellow Agate) या 'कमलगट्टे' की माला का प्रयोग भी किया जा सकता है। रुद्राक्ष माला का प्रयोग इस साधना में वर्जित है।
5. क्या यह मन्त्र कोर्ट केस में सहायक है?
अत्यंत सहायक है। मन्त्र में स्पष्ट कहा गया है — 'वाचं मुखं पदं स्तम्भय' — विरोधी की वाणी, मुख और गति को रोक दो। इसका अर्थ है कि न्यायालय में विरोधी पक्ष का वकील ठीक से बोल नहीं पाएगा, उसके तर्क कमजोर होंगे, और न्यायाधीश आपके पक्ष में निर्णय देंगे। वकीलों, व्यापारियों, और मुकदमों में फंसे लोगों के लिए यह अत्यंत प्रभावशाली है।
6. बीज मन्त्र 'ह्लीं' (Hleem) का क्या अर्थ है?
'ह्लीं' को 'स्थिर माया बीज' कहा जाता है। इसके प्रत्येक अक्षर का विशेष अर्थ है: 'ह' = शिव तत्व (चैतन्य), 'ल' = पृथ्वी तत्व (स्थिरता/जड़ता), 'ई' = शक्ति (ऊर्जा), 'बिन्दु' (अनुस्वार) = दुःख हारी। ये मिलकर 'स्तम्भन' (रोकने/जड़ करने) की शक्ति उत्पन्न करते हैं। उच्चारण में 'ह' और 'ल' का संयुक्त स्वर बोलना है और अंत में अनुस्वार का गूंजता हुआ नाद होना चाहिए।
7. साधना में पीले रंग का इतना महत्व क्यों है?
माँ बगलामुखी 'हरिद्रा सरोवर' (हल्दी के सरोवर) से प्रकट हुई हैं। उनका पूर्ण स्वरूप पीतवर्ण है — पीला शरीर, पीले वस्त्र, पीले अलंकार। इसलिए पूजा में भी सब कुछ पीला होना अनिवार्य है — पीले वस्त्र, पीला आसन, पीले फूल (कनेर/गेंदा), हल्दी की माला, पीला चंदन, और पीला प्रसाद (बेसन लड्डू/चने की दाल)। यह उनकी उत्पत्ति और स्वरूप से जुड़ी शास्त्रीय परम्परा है।
8. क्या स्त्रियाँ यह मन्त्र जप सकती हैं?
जी हाँ, स्त्रियाँ इसका जाप कर सकती हैं — माँ बगलामुखी स्वयं नारी शक्ति का उग्र रूप हैं। परन्तु मासिक धर्म के समय साधना वर्जित है। गर्भवती महिलाओं को केवल बीज मन्त्र ('ह्लीं') या गायत्री मन्त्र का मानसिक जप करना चाहिए, उग्र प्रयोगों (36 अक्षरी ब्रह्मास्त्र मन्त्र) से बचना चाहिए।
9. 'असुर मदन' की कथा और मूर्ति-स्वरूप का क्या सम्बन्ध है?
असुर मदन को ब्रह्मा जी से 'वाक सिद्धि' प्राप्त थी — वह जो बोलता, वह सत्य हो जाता। उसने इसका दुरुपयोग कर तीनों लोकों में आतंक मचा दिया। माँ बगलामुखी प्रकट हुईं और उसकी जीभ पकड़कर स्तम्भित कर दिया। इसीलिए माँ की मूर्ति में वे एक हाथ से असुर की जीभ पकड़े और दूसरे हाथ में गदा लिए दिखाई देती हैं। यह स्वरूप 'वाक-स्तम्भन' (Speech Paralysis) का प्रतीक है।
10. क्या गुरु दीक्षा बिना यह मन्त्र जपा जा सकता है?
बीज मन्त्र ('ह्लीं'), मूल मन्त्र, और गायत्री मन्त्र — ये तीन मन्त्र भक्ति भाव से बिना दीक्षा के भी जपे जा सकते हैं। परन्तु 36 अक्षरी ब्रह्मास्त्र मन्त्र ('ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां...') का जाप केवल गुरु दीक्षा के बाद ही करना शास्त्र-सम्मत है। यह अत्यंत शक्तिशाली मन्त्र है और अनुचित प्रयोग से उल्टा प्रभाव भी हो सकता है।
