विज्ञान भैरव तंत्र: विधियाँ 61-65 - शून्य और अंधकार का रहस्य | भाग 13

विज्ञान भैरव तंत्र (Vigyan Bhairav Tantra) की यह यात्रा अब एक अत्यंत सूक्ष्म अवस्था में प्रवेश कर रही है। पिछले भागों में हमने श्वास, इंद्रियों और ध्वनि पर ध्यान केंद्रित किया था। अब, भगवान शिव (Lord Shiva) हमें 'पदार्थ' (Matter) से 'शून्य' (Void) की ओर ले जा रहे हैं।
यह भाग (Vigyan Bhairav Tantra Part 13) विधियों 61 से 65 (Verses 84-88) को कवर करता है।
यहाँ शिव हमें सिखाते हैं कि कैसे अपने शरीर के घनत्व (Solidity) को भुलाकर, खुद को आकाश (Sky) की तरह अनंत और अंधकार (Darkness) की तरह गहरा महसूस किया जाए। ये विधियाँ हमारे मन को उस बिंदु पर ले जाती हैं जहाँ 'पदार्थ' (Matter) समाप्त होता है और 'चेतना' (Spirit) शुरू होती है।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आपका शरीर ठोस नहीं, बल्कि खाली आकाश है? क्या आप उस अंधेरे को देख सकते हैं जो रोशनी से भी ज्यादा चमकीला है? यही तंत्र का जादू है।
विधि 61: सब कुछ मुझमें है (Merging into Oneness)
"सर्वं देहगतं द्रव्यं वियद्व्याप्तं मृगेक्षणे। विभावयेत् ततस्तस्य भावना सा स्थिरा भवेत्॥ ८४॥"
अर्थ: हे मृगनयनी (देवी), साधक को यह भावना करनी चाहिए कि "मेरा पूरा शरीर और इस संसार के सभी पदार्थ (Objects) आकाश (Space) से व्याप्त हैं, अर्थात् वे ठोस नहीं, बल्कि शून्य हैं।" जब यह भावना स्थिर हो जाती है, तो साधक स्वयं आकाश-स्वरूप हो जाता है।
विधि की विस्तृत व्याख्या
हम अपने जीवन में सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि हम चीजों को 'ठोस' (Solid) मानते हैं। हमें लगता है कि हमारा शरीर एक पत्थर की तरह ठोस है, दीवारें ठोस हैं, और दुनिया ठोस है। यह 'ठोसपन' (Solidity) ही हमारे अहंकार (Ego) को जन्म देता है। जहाँ ठोसपन है, वहाँ सीमा (Boundary) होगी, और जहाँ सीमा है, वहाँ अलगाव (Separation) होगा।
शिव इस विधि में कहते हैं: अपनी दृष्टि बदलो। भौतिक विज्ञान (Physics) भी यही कहता है कि परमाणु (Atom) का 99.99% हिस्सा खाली है। जो हमें ठोस दिखता है, वह वास्तव में ऊर्जा का कंपन (Vibration) है। इस ध्यान में आपको यह कल्पना करनी है कि आपकी त्वचा (Skin) की सीमाएं घुल रही हैं।
प्रयोग कैसे करें:
शांत बैठें। अपनी आँखों को बंद करें। अपने शरीर के भीतर झांकें। कल्पना करें कि हड्डियों, मांस और रक्त (Flesh and Blood) की जगह केवल खाली आकाश (Empty Space) है। जैसे एक घड़ा (Pot) होता है—बाहर से मिट्टी का दिखता है, लेकिन अंदर केवल खाली स्थान होता है। वैसे ही खुद को देखें। आप एक 'मानव-आकार के आकाश' (Human-shaped Sky) हैं। धीरे-धीरे महसूस करें कि आपके शरीर का आकाश और बाहर का आकाश मिल रहे हैं। सीमाएं समाप्त हो गई हैं। आप सब कुछ में हैं।
Body Schema Dissolution: हमारे मस्तिष्क के Parietal Lobe में हमारे शरीर का एक नक्शा होता है जिसे 'Body Schema' कहते हैं। यह हमें बताता है कि हमारा शरीर कहाँ खत्म होता है और दुनिया कहाँ शुरू होती है। जब हम यह कल्पना करते हैं कि शरीर 'शून्य' या 'आकाश' है, तो हम इस न्यूरल मैप (Neural Map) को चुनौती देते हैं। इससे मस्तिष्क 'Orientation Association Area' से इनपुट लेना कम कर देता है, जिससे हमें असीमितता (Limitlessness) या महासागर में विलीन होने (Oceanic Feeling) का अनुभव होता है। यह वही अवस्था है जिसे मनोविज्ञान में 'Ego Dissolution' कहा जाता है।
विधि 62: निराधार शरीर (Feel Body as Supportless)
"लीनं मूर्ध्नि वियत्सर्वं भैरवत्वेन भावयेत्। तत्सर्वं भैरवाकारतेजस्तत्त्वं समाविशेत्॥ ८५॥"
अर्थ: साधक को अपने मस्तक (Head) में संपूर्ण आकाश (Sky) को लीन (Absorb) होते हुए अनुभव करना चाहिए। यह भावना करनी चाहिए कि "मैं साक्षात् भैरव हूँ।" तब वह सर्वत्र भैरव के प्रकाश-स्वरूप (Light of Consciousness) में प्रवेश कर जाता है।
विधि की विस्तृत व्याख्या
यह विधि पिछली विधि का अगला चरण है। वहाँ हमने शरीर को आकाश माना था, यहाँ हम बाहर के आकाश को अपने भीतर ले रहे हैं। यह एक बहुत शक्तिशाली 'विश्राम' (Relaxation) की विधि है।
हमारा मन हमेशा सिकुड़ा (Contracted) रहता है—चिंताओं से, विचारों से, तनाव से। आकाश विस्तार (Expansion) का प्रतीक है। शिव कहते हैं कि उस असीमित नीले आकाश को अपने सिर के (Crown Chakra) के माध्यम से अंदर आने दो।
प्रयोग कैसे करें:
खुले आसमान के नीचे लेट जाएं या खिड़की के पास बैठें। आकाश की शून्यता को देखें। अब कल्पना करें कि वह विशाल शून्यता एक तरल (Liquid) की तरह आपके सिर के ऊपर से आपके अंदर प्रवाहित हो रही है। यह आपके विचारों को धो रही है। आपका सिर अब भारी नहीं, बल्कि आकाश की तरह हल्का और खाली है। जब अंदर और बाहर केवल आकाश रह जाए, तो उस अवस्था को 'भैरव' (Supreme Consciousness) जानें।
Spatial Processing & Relaxation: जब हम 'विस्तार' (Expansion) या 'Horizon' (क्षितिज) के बारे में सोचते हैं, तो हमारी आँखें 'Panoramic Vision' (विहंगम दृष्टि) में जाती हैं। यह सीधा हमारे Parasympathetic Nervous System (विश्राम तंत्र) को ट्रिगर करता है। Cortisol (तनाव हार्मोन) का स्तर गिरता है। मनोविज्ञान में इसे 'Open Focus' थेरेपी कहा जाता है, जहाँ संकीर्ण ध्यान (Narrow Focus) से हटकर विस्तृत ध्यान (Diffused Focus) पर जोर दिया जाता है, जिससे तुरंत मानसिक एंग्जायटी (Anxiety) से राहत मिलती है।
विधि 63: तीन अवस्थाओं से परे (Beyond Waking, Dreaming, Sleeping)
"किञ्चिज्ज्ञातं द्वैतदायि बाह्यालोकस्तमः पुनः। विश्वादि भैरवं रूपं ज्ञात्वानन्तप्रकाशभृत्॥ ८६॥"
अर्थ: जागृत अवस्था (Waking) में द्वैत (Duality) का थोड़ा ज्ञान होता है, और निद्रा (Sleep) में बाह्य प्रकाश (Outer Light) अंधकार बन जाता है। लेकिन जो इन तीनों (जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति) को भैरव का ही रूप मानकर जानता है, वह अनंत प्रकाश (Infinite Light) से भर जाता है।
विधि की विस्तृत व्याख्या
हम आम तौर पर तीन अवस्थाओं में जीते हैं:
- जागृत (Waking): जहाँ हम दुनिया को देखते हैं।
- स्वप्न (Dreaming): जहाँ हम मन की दुनिया देखते हैं।
- सुषुप्ति (Deep Sleep): जहाँ घोर अंधकार और बेहोशी होती है।
शिव कहते हैं कि एक 'चौथी अवस्था' (Fourth State - Turiya) भी है। वह अवस्था जो इन तीनों को देखती है। जब आप जाग रहे हैं, तो कौन जानता है कि आप जाग रहे हैं? जब आप सपना देख रहे हैं, तो वह कौन है जो सपने को देख रहा है? वह साक्षी (Witness) ही भैरव है।
प्रयोग कैसे करें:
जब आप रात को सोने जाएं, तो सोने से ठीक पहले के क्षण पर ध्यान दें। जागना खत्म हो रहा है, नींद आ रही है। उस 'Sandhi' (Junction Point) को पकड़ने की कोशिश करें। न आप जागे हैं, न सोए हैं। आप बस 'हैं'। इसी तरह सुबह उठते ही, आँखें खोलने से पहले, उस अवस्था को देखें। यही वह खिड़की है जहाँ से अनंत प्रकाश (Infinite Consciousness) में प्रवेश किया जा सकता है। अंधकार (नींद) और प्रकाश (जागृत) दोनों उस एक ही चेतना के खेल हैं।
Hypnagogic & Hypnopompic States: विज्ञान इन अवस्थाओं को 'Hypnagogic' (सोने से पहले) और 'Hypnopompic' (जागने से पहले) कहता है। इस समय हमारा मस्तिष्क Theta Waves (4-7 Hz) में होता है, जो गहरी रचनात्मकता और अवचेतन (Subconscious) के द्वार खोलता है। आमतौर पर हम इस अवस्था से बेहोशी में गुजर जाते हैं। लेकिन योगी (Yogi) इस अवस्था में 'जागरूक' (Lucid) रहकर अपने अवचेतन मन को री-प्रोग्राम कर सकते हैं और सामान्य चेतना (Beta Waves) से सुपर-चेतना (Gamma Waves) की ओर बढ़ सकते हैं।
विधि 64: बाह्य अंधकार का ध्यान (Meditation on External Darkness)
"एवमेव दुर्निशायां कृष्णपक्षागमे चिरम्। तैमिरं भावयन् रूपं भैरवं रूपमेष्यति॥ ८७॥"
अर्थ: तूफानी रात्रि (Dark Night) में या कृष्ण पक्ष (Dark Fortnight/New Moon) के घोर अंधकार में, साधक को उस अंधकार को ही भैरव का रूप मानकर लंबे समय तक ध्यान (Gazing) करना चाहिए। इससे वह भैरव-स्वरूप हो जाता है।
विधि की विस्तृत व्याख्या
हम अंधकार (Darkness) से डरते हैं क्योंकि हमने उसे मृत्यु और अज्ञान से जोड़ दिया है। लेकिन शिव कहते हैं कि अंधकार 'शांति' का मूल है। प्रकाश उत्तेजना (Excitement) है, अंधकार विश्राम (Rest) है। गर्भ (Womb) में अंधकार था, बीज (Seed) जमीन के नीचे अंधकार में पनपता है। अंधकार जीवनदाई है।
यह विधि 'Trataka' (त्राटक) का एक रूप है, लेकिन किसी वस्तु पर नहीं, बल्कि 'अभाव' (Absence of light) पर।
प्रयोग कैसे करें:
अपने कमरे में पूर्ण अंधकार (Pitch Darkness) करें। इतना अंधेरा कि हाथ भी न दिखे। आँखें खुली रखें (Open Eyes Meditaton)। अंधेरे को 'खालीपन' न समझें, बल्कि उसे एक 'उपस्थिति' (Presence) समझें। महसूस करें कि अंधेरा आपको चारों तरफ से छू रहा है, आपको गले लगा रहा है। अंधेरे की गहराई में झांकें। धीरे-धीरे आप पाएंगे कि आपकी आँखें खुली हैं लेकिन मन सो गया है। यह एक अद्भुत शांति (Deep Silence) लाएगा।
Sensory Deprivation & Melatonin: पूर्ण अंधकार में रहने से मस्तिष्क Melatonin हार्मोन का उत्पादन तेज कर देता है, जो न केवल नींद लाता है बल्कि शरीर को 'Repair' और 'Rejuvenate' करता है। जब आँखों को कोई दृश्य (Visual Input) नहीं मिलता, तो मस्तिष्क का 'Visual Cortex' शांत हो जाता है। इसे 'Ganzfeld Effect' के समान माना जा सकता है। बाहरी उत्तेजना के अभाव में, मस्तिष्क अपने आंतरिक स्रोतों (Inner Sources) की ओर मुड़ता है, जिससे गहरे ध्यान और कभी-कभी 'Hallucinatory' या आध्यात्मिक अनुभव हो सकते हैं।
विधि 65: आंतरिक अंधकार का ध्यान (Meditation on Internal Darkness)
"एवमेव निमील्यादौ नेत्रे कृष्णाभमग्रतः। प्रसार्य भैरवं रूपं भावयंस्तन्मयो भवेत्॥ ८८॥"
अर्थ: इसी प्रकार (जैसे बाहर अंधकार का ध्यान किया), साधक को अपनी आँखें बंद (Closed Eyes) करके अपने सामने फैले हुए घने अंधकार का ध्यान करना चाहिए। उस अंधकार को भैरव का रूप मानकर उसमें विलीन होकर तन्मय हो जाना चाहिए।
विधि की विस्तृत व्याख्या
यदि आप बाहर अंधकार नहीं पा सकते (जैसे शहर की रोशनी में), तो शिव यह विधि देते हैं। जब हम आँखें बंद करते हैं, तो हमें क्या दिखता है? अंधकार। लेकिन हम उस पर कभी ध्यान नहीं देते। हम तुरंत ख्यालों (thoughts) में खो जाते हैं।
यह विधि सरल है: आँखें बंद करो और जो काला पर्दा (Black Screen) सामने दिखता है, उसे देखते रहो।
प्रयोग कैसे करें:
आँखें बंद करें। अपनी भौहों के मध्य (Third Eye Center) के स्थान पर उस अंधकार को देखें। विचारों को आने-जाने दें, लेकिन आपका पूरा ध्यान उस 'कालेपन' (Blackness) पर हो। यह कालापन निर्जीव नहीं है; यह संभावनाओं से भरा है। जैसे ब्लैकहोल (Black Hole) सब कुछ निगल लेता है, वैसे ही यह आंतरिक अंधकार आपके सभी दुखों, चिंताओं और अहंकार को निगल सकता है। इसे प्रेम से देखें, भय से नहीं।
Alpha State Induction: जब हम आँखें बंद करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क तुरंत Alpha Waves (8-12 Hz) उत्पन्न करना शुरू कर देता है, जो विश्राम की अवस्था है। बंद आँखों के सामने दिखने वाले अंधकार को विज्ञान में 'Eigengrau' (आंतरिक ग्रे) कहा जाता है। जब हम इस पर फोकस करते हैं, तो हम मस्तिष्क को 'Visual Thinking' (दृश्य सोच) से रोकते हैं। यह एकाग्रता (Concentration) को बढ़ाता है और 'Mental Chatter' (मन की बकवास) को शांत करने का सबसे तेज़ तरीका है।
निष्कर्ष: शून्य ही पूर्ण है
ये 5 विधियाँ (61-65) हमें हमारी सीमित पहचान से निकालकर असीमित अस्तित्व में फेंक देती हैं। चाहे वह शरीर को 'आकाश' मानना हो, या 'अंधकार' को गले लगाना हो—हर विधि का उद्देश्य एक ही है: उस 'मैं' को मिटाना जो हमें ब्रह्मांड से अलग करता है।
अंधकार से डरें नहीं, उसमें उतरें। शून्य से भागें नहीं, उसे ओढ़ लें (Embrace the Void)। क्योंकि वहीं, उस गहरी खाई में, भगवान भैरव आपका इंतजार कर रहे हैं।
"जब तुम कुछ नहीं होते (When you are nothing), तभी तुम सब कुछ होते हो (Then you are everything)। यही तंत्र का परम रहस्य है।"