Makar Sankranti Surya Puja Vidhi: सूर्य को अर्घ्य देने की विधि, मंत्र और नियम | Sun Worship Guide

मकर संक्रांति सूर्य पूजा: विधि, महत्व और मंत्र
आरोग्य और सफलता के लिए सूर्य उपासना
मकर संक्रांति का पर्व प्रत्यक्ष देवता 'भगवान सूर्य' को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं, जिससे पिता-पुत्र के रिश्तों में मिठास आती है।
ज्योतिष में सूर्य को 'आत्मा' और 'राजा' का कारक माना गया है। मकर संक्रांति के दिन अगर सही विधि से सूर्य को अर्घ्य दिया जाए, तो कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं और व्यक्ति को समाज में अपार मान-सम्मान व अच्छी सेहत (Health) की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?
"इस पर्व का वैज्ञानिक और पौराणिक महत्व विस्तार से जानें।"
सूर्य पूजा का शुभ मुहूर्त (Auspicious Timing)
मकर संक्रांति के दिन 'पुण्य काल' (सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर तक) में पूजा करना सबसे उत्तम माना गया है। कोशिश करें कि सूर्योदय (Sunrise) के समय ही अर्घ्य दें।
अर्घ्य सामग्री: लोटे में क्या-क्या डालें?
सूर्य देव को सादा जल चढ़ाने के बजाय, मकर संक्रांति पर लोटे में ये 5 चीजें जरूर मिलाएं। इसे 'विशेष अर्घ्य' कहा जाता है।
अर्घ्य सामग्री सूची
- लाल फूल (Red Flowers): सूर्य देव को लाल रंग प्रिय है (गुड़हल या गुलाब)।
- रोली/कुमकुम: मान-सम्मान और विजय के लिए।
- अक्षत (Rice): बिना टूटे हुए चावल, जीवन में पूर्णता के लिए।
- काला तिल: शनि दोष और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए।
- गुड़ (Jaggery): रिश्तों में मिठास और सूर्य की कृपा के लिए।
हमेशा तांबे के लोटे (Copper Vessel) का ही उपयोग करें। लोहे, स्टील या प्लास्टिक के बर्तन से सूर्य को जल देना वर्जित माना गया है, इससे पूजा का फल नहीं मिलता।
अर्घ्य देने की विधि (Step-by-Step Vidhi)
सूर्य अर्घ्य प्रक्रिया
- स्नान और संकल्प: सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ (हल्के लाल या पीला) कपड़े पहनें।
- दिशा: पूर्व दिशा (East) की ओर मुख करके खड़े हो जाएं।
- अर्घ्य मुद्रा: लोटे को अपने सिर से ऊपर उठाएं और दोनों हाथों से थामें।
- जल धारा: धीरे-धीरे जल की धारा छोड़ें। ध्यान रखें कि गिरता हुआ जल आपके पैरों पर न पड़े (इसके लिए नीचे कोई गमला या बाल्टी रख लें)।
- दर्शन: जल की गिरती हुई धारा के बीच से सूर्य देव का दर्शन करें।
- मंत्र जाप: जल छोड़ते समय 'ॐ सूर्याय नमः' का जाप करते रहें।
- परिक्रमा: अर्घ्य देने के बाद वहीं खड़े होकर अपने स्थान पर ही 3 बार प्रदक्षिणा (घूमना) करें।
शक्तिशाली सूर्य मंत्र (Powerful Mantras)
अर्घ्य देते समय या उसके बाद इन मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल 100 गुना बढ़ जाता है।
ॐ आदित्याय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥
हम आदित्य को जानते हैं, मार्तण्ड का ध्यान करते हैं। सूर्य देव हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
सूर्य बीज मंत्र (Surya Beej Mantra)
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
(यह मंत्र सूर्य की ऊर्जा को शरीर में धारण करने के लिए सबसे शक्तिशाली है।)
सूर्य पौराणिक मंत्र
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम।
तमोारिं सर्वपापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरम।।
(अर्थ: जपाकुसुम के समान लाल रंग वाले, कश्यप के पुत्र, महातेजस्वी, अंधकार के शत्रु और सभी पापों का नाश करने वाले दिवाकर को मैं प्रणाम करता हूँ।)
पूजा के लाभ (Benefits)
- आरोग्य (Health): "आरोग्यं भास्करादिच्छेत्" — सूर्य की उपासना से पुराने रोग, विशेषकर आँखों और त्वचा के रोग दूर होते हैं।
- करियर में सफलता: अगर आप सरकारी नौकरी या उच्च पद की चाहत रखते हैं, तो यह पूजा वरदान समान है।
- आत्मविश्वास: डिप्रेशन और डर खत्म होता है, आत्मबल (Willpower) बढ़ता है।
राशि अनुसार दान करें
"जानें अपनी राशि के अनुसार मकर संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए।"
पूजा के बाद 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करना शत्रुओं पर विजय दिलाता है। अगर पाठ न कर सकें, तो केवल इसे सुनें।
हे सूर्य देव! हमारे जीवन से अज्ञान का अंधेरा मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाएं।
सूर्य आराधना की शुभकामनाएं!
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