Sri Somasundara Ashtakam – श्री सोमसुन्दराष्टकम्

इन्द्र उवाच ।
एकं ब्रह्माद्वितीयं च परिपूर्णं परापरम् ।
इति यो गीयते वेदैस्तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ १ ॥
ज्ञातृज्ञानज्ञेयरूपं विश्वव्याप्यं व्यवस्थितम् ।
यं सर्वैरप्यदृश्योयस्तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ २ ॥
अश्वमेधादियज्ञैश्च यः समाराध्यते द्विजैः ।
ददाति च फलं तेषां तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ३ ॥
यं विदित्वा बुधाः सर्वे कर्मबन्धविवर्जिताः ।
लभन्ते परमां मुक्तिं तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ४ ॥
देवदेवं यमाराध्य मृकण्डुतनयो मुनिः ।
नित्यत्वमगमत्सद्यस्तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ५ ॥
निजनेत्राम्बुजकृतं पूजया परितोष्ययम् ।
श्रीपतिर्लभते चक्रं तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ६ ॥
येन सर्वं जगत्सृष्टं रक्षितं संहृतं क्रमात् ।
नत्वं विज्ञानमानन्दं तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ७ ॥
यस्मात्परं चापरं च किञ्चिद्वस्तु न विद्यते ।
ईश्वरं सर्वभूतानां तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ८ ॥
यस्मै वेदाश्च चत्वारो नमस्यन्त वपुर्धराः ।
ईशानं सर्वविद्यानां तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ९ ॥
यस्य प्रणाममात्रेण सन्ति सर्वाश्च सम्पदः ।
सर्वसिद्धिप्रदं शम्भुं तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ १० ॥
यस्य दर्शनमात्रेण ब्रह्महत्यादि पातकम् ।
अवश्यं नश्यति क्षिप्रं तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ ११ ॥
उत्तमाङ्गं च चरणं ब्रह्मणा विष्णुनापि च ।
न दृश्यते यस्य यत्नस्तं वन्दे सोमसुन्दरम् ॥ १२ ॥
इति श्रीहालास्यमाहात्म्ये इन्द्रकृतं श्रीसोमसुन्दराष्टकम् ।
इतर पश्यतु ।
श्री सोमसुन्दराष्टकम् - परिचय
श्री सोमसुन्दराष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत अष्टकम है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री सोमसुन्दराष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. श्री सोमसुन्दराष्टकम् के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।