वेदांतसंमतीचा काव्यसिंधू भरला।
श्रुतिशास्त्रग्रंथ साक्ष संगमू केला॥
महानुभव संतजनी अनुभव चाखियला।
अज्ञान जड जीवां मार्ग सुगम केला॥१॥
जय जयाजी दासबोधा ग्रंथराज प्रसिद्धा।
आरती ओंवाळीन विमलज्ञान बाळबोधा॥
नवविधा भक्तिपंथें रामरूपानुभवी।
चातुर्यनिधि मोठा मायाचक्र उघवी॥
हरिहर हृदयींचे गुह्य प्रगट दावीं।
बद्धची सिद्ध झाले असंख्यात मानवी॥२॥
वीसही दशकींचा अनुभव जो पाहे।
नित्यनेमें विवरीतां स्वयें ब्रह्मची होये॥
अपार पुण्य गांठी तरी श्रवण लाही।
कल्याण लेखकाचे भावगर्भ हृदयीं॥३॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
श्रुतिशास्त्रग्रंथ साक्ष संगमू केला॥
महानुभव संतजनी अनुभव चाखियला।
अज्ञान जड जीवां मार्ग सुगम केला॥१॥
जय जयाजी दासबोधा ग्रंथराज प्रसिद्धा।
आरती ओंवाळीन विमलज्ञान बाळबोधा॥
नवविधा भक्तिपंथें रामरूपानुभवी।
चातुर्यनिधि मोठा मायाचक्र उघवी॥
हरिहर हृदयींचे गुह्य प्रगट दावीं।
बद्धची सिद्ध झाले असंख्यात मानवी॥२॥
वीसही दशकींचा अनुभव जो पाहे।
नित्यनेमें विवरीतां स्वयें ब्रह्मची होये॥
अपार पुण्य गांठी तरी श्रवण लाही।
कल्याण लेखकाचे भावगर्भ हृदयीं॥३॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Vedantasammaticha kavyasindhu bharala,
Shrutishastragranth saksh sangamu kela. ||
Mahanubhav santajani anubhav chakhiyala,
Ajnana jad jivan marg sugam kela. ||1||
Jai Jayaji Dasbodha granthraj prasiddha,
Aarti onvalin vimalajnan balabodha. ||
Navavidha bhaktipanthen ramrupanubhavi,
Chaturyanidhi motha mayachakra ughavi. ||
Harihar hridayinche guhya pragat davin,
Baddhachi siddha jhale asankhyat manavi. ||2||
Visahi dashakincha anubhav jo pahe,
Nityanemen vivaritan swayen brahmachi hoye. ||
Apaar punya ganthi tari shravan lahi,
Kalyan lekhakache bhavagarbh hridayin. ||3||
॥ Iti Sampurnam ॥
Shrutishastragranth saksh sangamu kela. ||
Mahanubhav santajani anubhav chakhiyala,
Ajnana jad jivan marg sugam kela. ||1||
Jai Jayaji Dasbodha granthraj prasiddha,
Aarti onvalin vimalajnan balabodha. ||
Navavidha bhaktipanthen ramrupanubhavi,
Chaturyanidhi motha mayachakra ughavi. ||
Harihar hridayinche guhya pragat davin,
Baddhachi siddha jhale asankhyat manavi. ||2||
Visahi dashakincha anubhav jo pahe,
Nityanemen vivaritan swayen brahmachi hoye. ||
Apaar punya ganthi tari shravan lahi,
Kalyan lekhakache bhavagarbh hridayin. ||3||
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"दासबोधांची आरती" एक अनूठी मराठी आरती है जो किसी देवता को नहीं, बल्कि 17वीं सदी के महान संत समर्थ रामदास (Samarth Ramdas) द्वारा रचित पवित्र ग्रंथ, 'दासबोध' (Dasbodh), को समर्पित है। यह आरती 'दासबोध' को एक 'ग्रंथराज' (ग्रंथों का राजा) के रूप में पूजती है और इसे 'विमलज्ञान बाळबोधा' (निर्मल ज्ञान देने वाला) मानती है। इस आरती की रचना समर्थ रामदास के प्रमुख शिष्य, कल्याण स्वामी (Kalyan Swami) ने की थी, जैसा कि अंतिम पंक्ति से ज्ञात होता है। यह आरती ग्रंथ को एक जीवित गुरु के रूप में देखती है, जो अज्ञानी जीवों के लिए मोक्ष का मार्ग सरल बनाता है।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
यह आरती दासबोध ग्रंथ के आध्यात्मिक महत्व और उसकी महिमा का वर्णन करती है:
- वेदांत का सार (Essence of Vedanta): "वेदांतसंमतीचा काव्यसिंधू भरला।" यह पंक्ति दासबोध को वेदांत के सिद्धांतों से भरा हुआ एक काव्य-रूपी सागर (poetic ocean) बताती है, जिसकी साक्षी श्रुतियां और शास्त्र हैं।
- भक्ति का मार्ग (Path of Devotion): "नवविधा भक्तिपंथें रामरूपानुभवी।" दासबोध नौ प्रकार की भक्ति (Navavidha Bhakti) का मार्ग दिखाकर भगवान राम के स्वरूप का अनुभव कराता है।
- आत्म-साक्षात्कार (Self-Realization): "वीसही दशकींचा अनुभव जो पाहे। नित्यनेमें विवरीतां स्वयें ब्रह्मची होये॥" जो व्यक्ति दासबोध के सभी बीस दशकों (sections) का अनुभव करता है और नित्य उसका मनन करता है, वह स्वयं ब्रह्म स्वरूप हो जाता है।
- सरल मार्गदर्शक (A Simple Guide): "अज्ञान जड जीवां मार्ग सुगम केला॥" इस ग्रंथ ने अज्ञानी और सांसारिक जीवों के लिए आध्यात्मिक उन्नति (spiritual progress) का मार्ग सुगम बना दिया है।
आरती करने की विधि और विशेष अवसर
- यह आरती मुख्य रूप से दासबोध (Dasbodh) के नित्य पाठ या पारायण के अंत में गाई जाती है।
- दास नवमी (Das Navami), जो समर्थ रामदास की पुण्यतिथि है, के दिन इस आरती का विशेष रूप से गायन किया जाता है।
- आरती करने से पहले, दासबोध ग्रंथ को एक स्वच्छ आसन पर स्थापित करें। उसे पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
- ग्रंथ के समक्ष घी का दीपक जलाकर, पूर्ण श्रद्धा और सम्मान के साथ इस आरती को गाएं, यह मानते हुए कि आप साक्षात ज्ञान-स्वरूप की आरती कर रहे हैं।
