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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी - पापों का नाश करने वाली

पापांकुशा एकादशी का महत्व

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के आराध्य देव भगवान विष्णु हैं।

इस व्रत के अद्भुत लाभ:

  • समस्त पापों का नाश
  • अक्षय पुण्य का भागी
  • स्वर्ग लोक की प्राप्ति
  • कठिन तपस्याओं के बराबर फल
  • यम के दुःख नहीं भोगने पड़ते
  • हजार अश्वमेध + सौ राजसूय से भी श्रेष्ठ
  • स्वस्थ शरीर, सुंदर स्त्री, धन-धान्य
  • रात्रि जागरण से विघ्नरहित स्वर्ग
  • 30 पुरुषों की मुक्ति (मातृपक्ष 10 + पितृपक्ष 10 + स्त्रीपक्ष 10)
  • हरिलोक की प्राप्ति

विशेष: इस एकादशी के दिन क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करने वाले विष्णु भगवान को नमस्कार करने से कठिन तपस्याओं का फल मिल जाता है।

[!IMPORTANT] पापांकुशा एकादशी संसार में सबसे पवित्र तिथि है। इस एकादशी का व्रत हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ से भी श्रेष्ठ है। यदि कोई किसी कारणवश केवल उपवास भी करे तो यम दर्शन नहीं होते

एकादशी व्रत विधि

पूजा सामग्री

  • तुलसी दल - भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय
  • फूल और माला - सफेद और पीले फूल
  • धूप-दीप - अगरबत्ती, घी का दीपक
  • नैवेद्य - फल, मधु, मिष्ठान
  • चंदन - लाल चंदन, केसर
  • कलश - जल से भरा कलश
  • पंचामृत - दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
  • अक्षत - चावल के दाने
  • वस्त्र - भगवान को अर्पित करने के लिए
  • दान सामग्री - भूमि, गौ, अन्न, जल, उपानह (जूते), वस्त्र, छत्र
  • दक्षिणा - ब्राह्मणों के लिए

व्रत की विधि

दशमी तिथि पर (एक दिन पहले):

  • सात्त्विक भोजन करें
  • मांस, प्याज, लहसुन से परहेज करें
  • रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • पापों से बचने का दृढ़ संकल्प लें

एकादशी के दिन:

  • प्रातःकाल स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करने वाले भगवान विष्णु का ध्यान करें
  • तुलसी दल से पूजन करें
  • फूल, नैवेद्य अर्पित करें
  • धूप, दीप से पूजन करें
  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
  • पूर्ण उपवास रखें

पाप नाश प्रार्थना:

"हे क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करने वाले भगवान विष्णु! आप पापांकुशा हैं - पापों को अंकुश लगाने वाले। मेरे सभी पाप नष्ट करें। मुझे यम के दुःख न भोगने पड़ें। मुझे अक्षय पुण्य का भागी बनाएं।"


रात्रि जागरण:

  • रात्रि में जागरण करने से विघ्नरहित स्वर्ग मिलता है
  • भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें
  • हरि नाम का जाप करें
  • व्रत कथा का श्रवण-पठन करें

द्वादशी पारण और दान:

  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं
  • यथाशक्ति दान करें:
    • भूमि, गौ, अन्न, जल
    • उपानह (जूते), वस्त्र, छत्र
  • दरिद्री भी यथाशक्ति कुछ दान अवश्य करें
  • विशेष रूप से दक्षिणा दें
  • त्रयोदशी से पूर्व पारण करें

विशेष नोट: विष्णुभक्त शिव की निंदा न करें, शिवभक्त विष्णु की निंदा न करें - दोनों नरक को जाते हैं।

पापांकुशा एकादशी का माहात्म्य

आश्विन शुक्लपक्ष

पापांकुशा एकादशी का संपूर्ण माहात्म्य

अर्जुन बोले – "हे भगवन्! आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम क्या है तथा इस व्रत के करने से कौन-कौन से फल मिलते हैं। यह सब कृपा पूर्वक कहिए।"

श्री कृष्ण भगवान् बोले – "हे अर्जुन! आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पापांकुशा है। इसका व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और करने वाला अक्षय पुण्य का भागी होता है।

इस एकादशी के दिन मनवांछित फल की प्राप्ति के लिए भगवान् विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस पूजन के द्वारा मनुष्य को स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।

हे पार्थ! जो मनुष्य कठिन तपस्याओं के द्वारा फल प्राप्ति करते हैं, वह फल इस एकादशी के दिन क्षीर-सागर में शेषनाग पर शयन करने वाले विष्णु भगवान् को नमस्कार कर देने से मिल जाता है और मनुष्य को यम के दु:ख नहीं भोगने पड़ते।


हे अर्जुन! जो विष्णुभक्त शिवजी की निन्दा करते हैं अथवा जो शिवभक्त विष्णु भगवान् की निन्दा करते हैं, वे नरक को जाते हैं।

हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ का फल इस एकादशी के फल के सोलहवें हिस्से के बराबर भी नहीं होता है अर्थात् इस एकादशी व्रत के समान संसार में अन्य कोई व्रत नहीं है।

इस एकादशी के समान विश्व में पवित्र तिथि नहीं है। जो मनुष्य एकादशी व्रत नहीं करते हैं, उन्हें पाप घेरे रहते हैं। यदि कोई मनुष्य किसी कारणवश केवल इस एकादशी का उपवास भी करता है तो उसे यम दर्शन नहीं होते।


इस एकादशी के व्रत से मनुष्य को स्वस्थ शरीर और सुन्दर स्त्री तथा धन-धान्य मिलता है और अन्त में वह स्वर्ग का अधिकारी हो जाता है। जो मनुष्य इस एकादशी के व्रत में रात्रि-जागरण करते हैं, उन्हें बिना किसी विघ्न के स्वर्ग मिलता है।

जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत करते हैं, उनके मातृपक्ष के दस पुरुष, पितृपक्ष के दस पुरुष और स्त्री पक्ष के दस पुरुष, विष्णु का भेष धारण करके तथा सुन्दर आभूषणों से युक्त होकर विष्णु लोक को जाते हैं।

जो मनुष्य आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करते हैं, उन्हें हरिलोक मिलता है।


जो मनुष्य एकादशी के दिन भूमि, गौ, अन्न, जल, उपानह, वस्त्र, छत्र आदि का दान करते हैं, उन्हें यम के दर्शन नहीं करने पड़ते। दरिद्री मनुष्य को भी यथाशक्ति कुछ दान देकर कुछ पुण्य अवश्य ही अर्जित करना चाहिए।

जो मनुष्य तालाब, बगीचा, धर्मशाला, प्याऊ, आदि बनवाते हैं, उन्हें नरक के दु:ख नहीं भोगने पड़ते। वह मनुष्य इस लोक में नीरोगी, दीर्घायु वाले, पुत्र तथा धन-धान्य से पूर्ण होकर सुख भोगते हैं तथा अन्त में स्वर्ग लोक को जाते हैं। उन्हें दुर्गति नहीं भोगनी पड़ती।"

कथासार

व्यक्ति को चाहिए कि वह पापों से बचने का दृढ़ संकल्प करे।

इस कथा की शिक्षा:

  • विष्णु का ध्यान-स्मरण किसी भी रूप में सुखदायक और पापनाशक है
  • एकादशी के दिन स्मरण-कीर्तन सभी क्लेशों व पापों का नाश करता है
  • केवल उपवास से भी यम दर्शन से मुक्ति
  • रात्रि जागरण से विघ्नरहित स्वर्ग
  • 30 पुरुषों की मुक्ति (3 पक्षों से 10-10)
  • विष्णु और शिव की निंदा दोनों नरक ले जाती है
  • हजार अश्वमेध से भी श्रेष्ठ यह व्रत
  • दरिद्र भी यथाशक्ति दान करे
  • तालाब, बगीचा, धर्मशाला बनाने से नरक से मुक्ति
  • स्वस्थ शरीर, सुंदर स्त्री, धन-धान्य की प्राप्ति
  • हरिलोक की प्राप्ति

जय श्री हरि!

FAQ

पापांकुशा कब?

आश्विन शुक्ल। अक्टूबर में।

महत्व?

पाप नाश। यम दर्शन मुक्ति।

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जय श्री हरि! ॥

।। ॐ नमः शिवाय ।।