Logoपवित्र ग्रंथ

कामिका एकादशी व्रत कथा

श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी - तुलसी पूजन का महत्व

कामिका एकादशी का महत्व

श्रावण माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के आराध्य देव भगवान विष्णु हैं।

इस व्रत के अद्भुत लाभ:

  • कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल
  • गंगा स्नान से भी उत्तम फल
  • केदार और कुरुक्षेत्र में ग्रहण स्नान के बराबर पुण्य
  • समुद्र और वन सहित पृथ्वी दान से भी अधिक फल
  • बछड़ा सहित गौदान के बराबर पुण्य
  • ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से मुक्ति
  • यमराज के दर्शन नहीं, नरक के कष्ट नहीं
  • स्वर्ग और विष्णुलोक की प्राप्ति
  • तुलसी पूजन का विशेष महत्व - भगवान को सबसे प्रिय

विशेष: अध्यात्म विद्या से भी अधिक फल कामिका एकादशी का व्रत करने से मिलता है।

[!IMPORTANT] कामिका एकादशी पर तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु रत्न, मोती, मणि से भी अधिक तुलसी से प्रसन्न होते हैं। तुलसी दल से पूजा करने का फल एक भार स्वर्ण और चार भार चांदी दान के बराबर है।

एकादशी व्रत विधि

पूजा सामग्री

  • तुलसी दल - अत्यंत आवश्यक और प्रिय
  • फूल और माला - सफेद और पीले फूल
  • धूप-दीप - अगरबत्ती, घी या तिल के तेल का दीपक
  • नैवेद्य - फल, मधु, मिष्ठान
  • चंदन - लाल चंदन, केसर
  • कलश - जल से भरा कलश
  • पंचामृत - दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
  • अक्षत - चावल के दाने
  • वस्त्र - भगवान को अर्पित करने के लिए
  • दक्षिणा - ब्राह्मणों के लिए

व्रत की विधि

दशमी तिथि पर (एक दिन पहले):

  • सात्त्विक भोजन करें
  • मांस, प्याज, लहसुन से परहेज करें
  • रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • तुलसी के पौधे की व्यवस्था करें

एकादशी के दिन:

  • प्रातःकाल स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • भगवान विष्णु (शंख, चक्र, गदाधारी) की विधिवत पूजा करें
  • तुलसी दल से विशेष पूजन करें
  • तुलसीजी को जल से स्नान कराएं
  • फूल, नैवेद्य अर्पित करें
  • धूप, दीप (घी या तिल का तेल) से पूजन करें
  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
  • पूर्ण उपवास रखें

तुलसी पूजन मंत्र:

"हे तुलसीजी! आप भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय हैं। आपके दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। मैं आपको भगवान के चरण कमलों में अर्पित करता/करती हूं। कृपया मुझे मुक्ति प्रदान करें।"


रात्रि जागरण और दीप दान:

  • रात्रि में जागरण करना अत्यंत फलदायी है
  • भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें
  • दीप दान करें - घी या तिल के तेल का दीपक
  • भगवान के सामने दीपक जलाएं - इससे पितरों को स्वर्ग में अमृत प्राप्त होता है
  • हरि नाम का जाप करें
  • व्रत कथा का श्रवण-पठन करें

विशेष: जो मनुष्य कामिका एकादशी की रात्रि को जागरण करते हैं और दीप-दान करते हैं, उनके पुण्यों को लिखने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं।


द्वादशी पारण:

  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं
  • विशेष रूप से दक्षिणा और मिष्टान्न दें
  • गरीबों को अन्न दान करें
  • त्रयोदशी से पूर्व पारण करें

कामिका एकादशी माहात्म्य

श्रावण कृष्णपक्ष

श्री कामिका एकादशी का संपूर्ण माहात्म्य

कुन्तीपुत्र श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन बोले - "हे भगवन्! मैंने आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप मुझे श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाइए। उस एकादशी का नाम क्या है? तथा इसकी विधि क्या है? इसमें कौन से देवता की पूजा होती है? इसका व्रत करने से मनुष्य को क्या फल प्राप्त होता है?"


भीष्म और नारद का संवाद:

श्री कृष्ण भगवान् बोले - "हे अर्जुन! मैं श्रावण मास की पावन एकादशी की कथा कहता हूं, ध्यानपूर्वक सुनो। एक समय इस एकादशी की पावन कथा को भीष्म पितामह ने लोकहित के लिए नारद जी से कहा था।

एक समय नारदजी ने कहा - 'हे पितामह! आज मेरी श्रावण के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की इच्छा है। अतः आप एकादशी की व्रत कथा विधि सहित सुनाइए।'

नारद के वचनों को सुनकर भीष्म पितामह बोले - 'हे नारदजी! आपने अत्यन्त सुन्दर प्रस्ताव किया है। आप ध्यान लगाकर सुनिए -


कामिका एकादशी का परिचय:

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम कामिका है। इस एकादशी की कथा सुनने मात्र से ही वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।

कामिका एकादशी के व्रत में शंख, चक्र, गदाधारी भगवान् विष्णु की पूजा होती है। जो मनुष्य इस एकादशी को धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान् विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें गंगा स्नान के फल से भी उत्तम फल मिलता है।


विभिन्न तीर्थों के बराबर फल:

सूर्य या चन्द्र ग्रहण में केदार और कुरुक्षेत्र में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह पुण्य कामिका एकादशी को विष्णु भगवान् की भक्तिपूर्वक पूजा करने से मिल जाता है।

श्रावण मास में श्री विष्णु भगवान् की पूजा करने का फल समुद्र और वन सहित पृथ्वी दान करने के फल से भी अधिक होता है।

व्यतीपात में गण्डकी नदी में स्नान करने से जो फल मिलता है, वह फल भगवान् की पूजा करने से मिलता है।


सर्वोत्तम व्रत:

संसार में भगवान् की पूजा का फल सबसे अधिक है। अतः भक्तिपूर्वक भगवान् की पूजा न बन सके तो श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।

आभूषणों से युक्त बछड़ा सहित गौ-दान करने से जो फल मिलता है, वह फल कामिका एकादशी के व्रत से मिल जाता है।

जो उत्तम द्विज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का व्रत करते हैं तथा श्री विष्णु भगवान् की पूजा करते हैं। उससे समस्त देव, नाग, किन्नर, पितृ आदि की पूजा हो जाती है।

इसलिए पाप से डरने वाले व्यक्तियों को विधि-विधान सहित इस व्रत को करना चाहिए। संसार सागर तथा पापों में फंसे हुए मनुष्यों को इनसे छूटने के लिए कामिका एकादशी का व्रत करना चाहिए।


पाप नाश और मुक्ति:

कामिका एकादशी के व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, संसार में इससे अधिक पापों को नष्ट करने वाला कोई और उपाय नहीं है।

हे नारदजी! स्वयं भगवान् ने अपने मुख से कहा है कि मनुष्यों को अध्यात्म विद्या से जो फल मिलता है, उससे अधिक फल कामिका एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है।

इस व्रत के करने से मनुष्य को न यमराज के दर्शन होते हैं और न ही नरक के दु:ख भोगने पड़ते हैं। वह स्वर्ग का अधिकारी बन जाता है।


तुलसी पूजन का महत्व:

जो लोग इस दिन तुलसी दल से भक्तिपूर्वक श्री विष्णु भगवान् की पूजा करते हैं, वे इस संसार सागर में रहते हुए भी इस प्रकार अलग रहते हैं जिस प्रकार कमल पुष्प जल में रहता हुआ भी जल से अलग रहता है।

भगवान् की तुलसी दल से पूजा करने का फल एक भार स्वर्ण और चार भार चांदी के दान के फल के बराबर है। श्री विष्णु भगवान् रत्न, मोती, मणि आदि आभूषणों की अपेक्षा तुलसी दल से अधिक प्रसन्न होते हैं।

जो मनुष्य भगवान् की तुलसी दल से पूजा करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।


तुलसीजी की महिमा:

हे नारदजी! मैं भगवान् की अत्यन्त प्रिय श्री तुलसीजी को नमस्कार करता हूं।

  • तुलसीजी के दर्शन मात्र से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं
  • शरीर के स्पर्श मात्र से मनुष्य पवित्र हो जाता है
  • तुलसीजी को जल से स्नान कराने से मनुष्य की समस्त यम यातनाएं नष्ट हो जाती हैं
  • जो मनुष्य तुलसीजी को भक्तिपूर्वक भगवान् के चरण-कमलों में अर्पित करता है, उसे मुक्ति मिलती है

रात्रि जागरण और दीप दान का महत्व:

जो मनुष्य इस कामिका एकादशी की रात्रि को जागरण करते हैं और दीप-दान करते हैं, उनके पुण्यों को लिखने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं।

जो मनुष्य एकादशी के दिन भगवान् के सामने दीप जलाते हैं, उनके पितर स्वर्ग लोक में अमृत का पान करते हैं।

जो मनुष्य भगवान् के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाते हैं, उनको सूर्य लोक में भी सहस्त्रों दीपकों का प्रकाश मिलता है।


व्रत का फल:

प्रत्येक मनुष्य को कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या आदि के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और इस लोक में सुख भोगकर अन्त में वे विष्णु लोक को जाते हैं।

इस कामिका एकादशी के माहात्म्य के श्रवण व पठन से मनुष्य स्वर्ग लोक को जाते हैं।

कथासार

भगवान् विष्णु सर्वोपरि हैं, वे अपने भक्तों की निश्चल भक्ति से सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं। तुलसी जी भगवान् विष्णु की प्रिया है।

इस कथा की शिक्षा:

  • भगवान् हीरे-मोती, सोना-चांदी से इतने प्रसन्न नहीं होते, जितनी प्रसन्नता उन्हें तुलसी अर्पण करने पर होती है
  • तुलसी दर्शन, स्पर्श और पूजन का अद्भुत महत्व है
  • कामिका एकादशी ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से भी मुक्ति दिलाती है
  • यह व्रत अध्यात्म विद्या से भी अधिक फलदायी है
  • रात्रि जागरण और दीप दान से पितरों को स्वर्ग में अमृत प्राप्त होता है
  • यमराज के दर्शन नहीं होते, नरक के कष्ट नहीं भोगने पड़ते
  • संसार में रहते हुए भी कमल की तरह अलिप्त रहना
  • गंगा स्नान, केदार-कुरुक्षेत्र स्नान, पृथ्वी दान, गौदान - सबसे अधिक फल

जय श्री हरि!

FAQ

कामिका एकादशी कब?

श्रावण कृष्ण। जुलाई-अगस्त में।

महत्व?

तुलसी पूजन। ब्रह्महत्या मुक्ति।

संबंधित

जय श्री हरि! ॥

।। ॐ नमः शिवाय ।।