इंदिरा एकादशी व्रत कथा
आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी - पितरों का उद्धार
इंदिरा एकादशी का महत्व
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के आराध्य देव भगवान विष्णु हैं।
इस व्रत के अद्भुत लाभ:
- समस्त पापों का नाश
- नरक में गए पितरों का उद्धार
- कथा श्रवण मात्र से अनंत फल
- व्रत के फल को पितरों को दिया जा सकता है
- पितर यमलोक से स्वर्ग जाते हैं
- आकाश से पुष्प वर्षा
- इस लोक में सुख, अंत में स्वर्ग
- पितृ ऋण से मुक्ति
विशेष: इस एकादशी का व्रत करके उसका फल अपने पितरों को समर्पित करने से वे यमलोक से मुक्त होकर स्वर्ग को जाते हैं।
[!IMPORTANT] इंदिरा एकादशी पितृ उद्धार के लिए विशेष महत्व रखती है। यदि आपके पिता या पूर्वज यमलोक में हैं, तो इस एकादशी का व्रत करके उसका फल उन्हें समर्पित करने से वे स्वर्ग के अधिकारी हो जाते हैं।
एकादशी व्रत विधि
पूजा सामग्री
- शालिग्राम जी की मूर्ति - विशेष महत्व
- तुलसी दल - भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय
- फूल और माला - सफेद और पीले फूल
- धूप-दीप - अगरबत्ती, घी का दीपक
- नैवेद्य - फल, मधु, मिष्ठान
- चंदन - लाल चंदन, केसर
- कलश - जल से भरा कलश
- पंचामृत - दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
- अक्षत - चावल के दाने
- श्राद्ध सामग्री - दशमी के लिए
- गौ भोजन - भोजन का हिस्सा गाय को
- दक्षिणा - ब्राह्मणों के लिए
व्रत की विधि
दशमी तिथि पर (एक दिन पहले):
- प्रातःकाल स्नान - श्रद्धा सहित
- दोपहर को भी स्नान करें
- जल से निकलकर श्रद्धापूर्वक पितरों का श्राद्ध करें
- एक समय भोजन करें
- रात्रि को पृथ्वी पर शयन करें
एकादशी के दिन:
- नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भक्तिपूर्वक व्रत धारण करें
- विशेष संकल्प लें (नीचे देखें)
- दोपहर को शालिग्रामजी की मूर्ति स्थापित करें
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें
- भोजन का कुछ हिस्सा गाय को दें
- विष्णु भगवान की धूप, दीप, नैवेद्य से पूजा करें
- पूर्ण उपवास रखें
एकादशी का विशेष संकल्प:
"मैं आज निराहार रहूंगा और समस्त भोगों को त्याग दूंगा। इसके पश्चात् कल भोजन करूंगा। हे भगवन्! आप मेरी रक्षा करने वाले हैं। आप मेरे व्रत को सम्पूर्ण कराइए।"
पितृ उद्धार के लिए प्रार्थना:
"हे भगवान विष्णु! मैं इस इंदिरा एकादशी व्रत का फल अपने पितरों को समर्पित करता हूं। वे यमलोक से मुक्त होकर स्वर्ग के अधिकारी हों। उनका उद्धार हो।"
रात्रि जागरण:
- रात्रि में जागरण करना चाहिए
- भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें
- पितरों के लिए प्रार्थना करें
- हरि नाम का जाप करें
- व्रत कथा का श्रवण-पठन करें
द्वादशी पारण:
- मौन होकर बंधु-बांधवों सहित भोजन करें
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं
- विशेष रूप से दक्षिणा दें
- आलस्यरहित होकर व्रत करें
- त्रयोदशी से पूर्व पारण करें
इंदिरा एकादशी व्रत कथा
आश्विन कृष्णपक्ष
श्री इंदिरा एकादशी की संपूर्ण कथा
कृष्ण भक्ति से सरोबार होकर अर्जुन बोले – "हे भगवन्! अब आप कृपापूर्वक आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा को कहिए। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसका व्रत करने से कौन-सा फल मिलता है। कृपा करके यह सब समझाकर कहिए।"
श्री कृष्ण भगवान् बोले – "हे अर्जुन! आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम इंदिरा है। इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। नरक में गये हुए पितरों का उद्धार हो जाता है। हे पार्थ! इस एकादशी की कथा के सुनने मात्र से ही मनुष्य को अनन्त फल मिलता है। मैं कथा कहता हूं, तुम ध्यानपूर्वक सुनो –
सतयुग में महिष्मती नाम की नगरी में इंद्रसेन नाम का एक प्रतापी राजा राज्य करता था। वह पुत्र, पौत्र, धन-धान्य आदि से पूर्ण था। उसके शत्रु सदैव उससे भयभीत रहते थे।
एक दिन राजा अपनी राज्य सभा में सुखपूर्वक बैठा था कि महर्षि नारद वहां आये। नारदजी को देखकर राजा आसन से उठा, प्रणाम करके उन्हें सम्मान सहित आसन दिया। तब महर्षि नारद ने कहा – "हे राजन्! आपके राज्य में सब कुशल से तो हैं? मैं आपकी धर्मपरायणता देखकर अत्यन्त प्रसन्न हूं।"
राजा बोला – "हे महर्षि! आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशलपूर्वक हैं तथा आपकी कृपा से मेरे समस्त यज्ञ कर्म आदि सफल हो गये हैं। हे देव! अब आप कृपा कर यह बताएं कि आपका यहां आगमन किस प्रयोजन से हुआ है? मैं आपकी क्या सेवा करूं?"
नारदजी बोले – "हे राजन्! मुझे एक महान् आश्चर्य हो रहा है कि एक समय जब मैं ब्रह्मलोक से यमलोक गया था, तब मैंने यमराज की सभा में तुम्हारे पिता को बैठे देखा। तुम्हारा पिता महान् ज्ञानी, दानी तथा धर्मात्मा था मगर एकादशी के व्रत के बिगड़ जाने के कारण वह यमलोक को गया है। तुम्हारे पिता ने तुम्हारे लिए एक संदेश भेजा है।"
"क्या संदेश है ऋषिवर? कृपा कर यथाशीघ्र कहें।" उत्सुकता से राजा ने पूछा।
"उसने कहा है कि महर्षि! आप मेरे पुत्र इंद्रसेन, जो कि महिष्मती नगरी का राजा है, के पास जाकर एक संदेश देने की कृपा करें कि मेरे किसी पूर्व जन्म के बुरे कर्म के कारण ही मुझे यह लोक मिला है। यदि मेरा पुत्र आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत करे और उस व्रत के फल को मुझे दे दे तो मेरी मुक्ति हो जाय। मैं भी इस लोक से छूटकर स्वर्ग लोक में वास करूं।"
अपने पिता के यमलोक में पड़े होने की बात सुनकर इंद्रसेन को अपार दु:ख पहुंचा और उसने नारदजी से कहा – "हे मुनिवर! यह तो बड़े दु:ख की बात है कि मेरे पिता यमलोक में पड़े हैं। मैं उनकी मुक्ति का उपाय अवश्य करूंगा, आप कृपा करके मुझे इंदिरा एकादशी व्रत की विधि बताएं।"
महर्षि नारद ने राजा को संपूर्ण विधि बताई - दशमी को श्राद्ध, एकादशी को शालिग्राम पूजन, ब्राह्मण भोजन, गौ-भोजन, रात्रि जागरण, द्वादशी को मौन पारण।
महर्षि नारद राजा को सब उपदेश देकर अन्तर्धान हो गये।
राजा ने इंदिरा एकादशी के आने पर उसका विधिपूर्वक व्रत किया। बन्धु-बान्धव सहित इस व्रत के करने से आकाश से पुष्पों की वर्षा हुई और राजा का पिता यमलोक से रथ पर चढ़कर स्वर्ग को गया।
राजा इंद्रसेन भी इस एकादशी के प्रभाव से इस लोक में सुख भोगकर अन्त में स्वर्ग लोक को गया।
श्री कृष्ण भगवान् बोले – "हे अर्जुन! यह मैंने तुम्हारे सामने इंदिरा एकादशी का माहात्म्य वर्णन किया। इस कथा के पढ़ने व सुनने मात्र से ही समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त में मनुष्य स्वर्ग लोक में जाकर वास करता है।"
कथासार
मनुष्य को चाहिए कि वह जो भी संकल्प करे, उसे तन-मन-धन से पूरा करे।
इस कथा की शिक्षा:
- एकादशी व्रत बिगड़ने से यमलोक - राजा के पिता ज्ञानी, दानी, धर्मात्मा थे फिर भी
- किसी भी कार्य का संकल्प तोड़ना उचित नहीं
- व्रत का फल पितरों को समर्पित किया जा सकता है
- पितर यमलोक से स्वर्ग जा सकते हैं
- पितृ ऋण अवश्य चुकाना चाहिए
- आकाश से पुष्प वर्षा - दिव्य स्वीकृति
- रथ पर चढ़कर स्वर्ग गए - सम्मान सहित
- बंधु-बांधवों सहित व्रत करना शुभ
- आलस्यरहित होकर व्रत करें
- मौन पारण का महत्व
- गाय को भोजन देना आवश्यक
- शालिग्राम पूजन विशेष फलदायी
जय श्री हरि!
भगवान विष्णु आरती और चालीसा
(व्रत के अंत में आरती अवश्य करें)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इंदिरा एकादशी कब मनाई जाती है?
इंदिरा एकादशी का सबसे मुख्य उद्देश्य/लाभ क्या है?
इंदिरा एकादशी की व्रत कथा किस राजा से संबंधित है?
इंदिरा एकादशी व्रत का पुण्य पितरों को कैसे दान करें?
क्या यह व्रत केवल पुत्र ही कर सकता है?
इंदिरा एकादशी के दिन शालिग्राम पूजा का क्या महत्व है?
इंदिरा एकादशी में क्या श्राद्ध तर्पण भी करना चाहिए?
इंदिरा एकादशी व्रत के नियम कब से शुरू होते हैं?
क्या इंदिरा एकादशी के दिन कौवों और गाय को भोजन कराना चाहिए?
संबंधित एकादशी व्रत कथाएं
निर्जला एकादशी
"भीमसेनी एकादशी"
मोक्षदा एकादशी
"मोक्ष प्राप्ति का मार्ग"
एकादशी व्रत महात्म्य
"सभी एकादशियों का सार"