अपरा एकादशी व्रत कथा
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी - अपार पुण्य और धन
अपरा एकादशी का महत्व
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी को अपरा एकादशी (या अचला एकादशी) कहा जाता है। इस एकादशी के आराध्य देव भगवान विष्णु हैं।
इस व्रत के अद्भुत लाभ:
- अपार धन और पुण्य की प्राप्ति
- लोक में प्रसिद्धि - प्रसिद्ध और सम्मानित होना
- ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से मुक्ति
- भूत योनि से छुटकारा
- निंदा, झूठी गवाही, असत्य भाषण आदि पापों का नाश
- क्षत्रिय के युद्ध से भागने के पाप से मुक्ति
- गुरु निंदा के पाप से छुटकारा
- विष्णुलोक की प्राप्ति
विशेष दान और तीर्थों के समान फल:
- तीनों पुष्कर स्नान
- कार्तिक मास स्नान
- गंगा तट पर पिंडदान
- कुंभ में केदारनाथ दर्शन
- बद्रिकाश्रम निवास
- सूर्य-चंद्र ग्रहण में कुरुक्षेत्र स्नान
- हाथी, घोड़े, गौ, भूमि, स्वर्ण दान
[!IMPORTANT] अपरा का अर्थ है "अपार" (असीम)। यह व्रत अपार पुण्य और धन देने वाला है। यह पापरूपी वृक्ष को काटने के लिए कुल्हाड़ी और पापरूपी अंधकार के लिए सूर्य के समान है।
एकादशी व्रत विधि
पूजा सामग्री
- फूल और माला - तुलसी दल, सफेद और पीले फूल
- धूप-दीप - अगरबत्ती, घी का दीपक
- नैवेद्य - फल, मधु, मिष्ठान
- चंदन - लाल चंदन, केसर
- कलश - जल से भरा कलश
- तुलसी पत्र - पवित्र तुलसी के पत्ते
- पंचामृत - दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
- अक्षत - चावल के दाने
- वस्त्र - भगवान को अर्पित करने के लिए
- दक्षिणा - ब्राह्मणों के लिए
व्रत की विधि
दशमी तिथि पर (एक दिन पहले):
- सात्त्विक भोजन करें
- मांस, प्याज, लहसुन से परहेज करें
- रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें
- मन को पवित्र रखें
एकादशी के दिन:
- प्रातःकाल स्नान करें
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक पूजा करें
- तुलसी दल, फूल, नैवेद्य अर्पित करें
- धूप, दीप से पूजन करें
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
- पाप मुक्ति और अपार पुण्य के लिए प्रार्थना करें
- पूर्ण उपवास रखें
अपार पुण्य प्राप्ति के लिए विशेष प्रार्थना:
"हे भगवान विष्णु! आप अपरा एकादशी के स्वामी हैं। आप अपार धन, पुण्य और भक्ति प्रदान करने वाले हैं। मुझे भी अपार पुण्य और भक्ति प्रदान करें। मेरे सभी पाप नष्ट करें। मुझे विष्णुलोक की प्राप्ति हो।"
रात्रि जागरण:
- रात्रि में जागरण करना अत्यंत फलदायी है
- भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें
- हरि नाम का जाप करें
- व्रत कथा का श्रवण-पठन करें
द्वादशी पारण:
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं
- विशेष रूप से दक्षिणा और दान दें
- गरीबों को अन्न दान करें
- यदि संभव हो तो गौ दान करें
- त्रयोदशी से पूर्व पारण करें
अपरा एकादशी माहात्म्य
ज्येष्ठ कृष्णपक्ष
श्री अपरा एकादशी का संपूर्ण माहात्म्य
अर्जुन बोले – "हे भगवान्! ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उसका माहात्म्य क्या है? इसमें किस देवता की पूजा की जाती है तथा इस व्रत को करने की क्या विधि है? कृपा करके यह सब मुझसे विस्तार से कहिए।"
अपरा एकादशी का महत्व:
श्री कृष्ण भगवान् बोले – "हे पार्थ! ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम अपरा है। क्योंकि यह अपार धन और पुण्यों को देने वाली तथा सभी पापों को नष्ट करने वाली है। जो मनुष्य इसका व्रत करते हैं, उनकी लोक में प्रसिद्धि होती है।
अपरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या, भूत योनि, दूसरे की निन्दा आदि से उत्पन्न पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं, स्त्रीगमन, झूठी गवाही, असत्य भाषण, झूठा वेद पढ़ना, झूठा शास्त्र बनाना, ज्योतिष द्वारा किसी को भरमाना, झूठा वैद्य बनकर लोगों को ठगना आदि सब पाप अपरा एकादशी के व्रत से नष्ट हो जाते हैं।
क्षत्रिय और शिष्य के पाप:
जो क्षत्रिय युद्ध क्षेत्र से भाग जाय तो वह नरक को जाता है परन्तु अपरा एकादशी का व्रत करने से उसे भी स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
जो शिष्य गुरु से विद्या ग्रहण करते हैं, परन्तु बाद में उनकी निन्दा करते हैं तो वह अवश्य ही नरक में जाते हैं। वह भी अपरा एकादशी का व्रत करने से स्वर्ग को चले जाते हैं।
तीर्थों के समान फल:
जो फल तीनों पुष्करों में स्नान करने से या कार्तिक मास में स्नान करने से अथवा गंगाजी के तट पर पितरों को पिंडदान करने से मिलता है, वह अपरा एकादशी का व्रत करने से मिलता है।
सिंह राशि वालों को बृहस्पति के दिन गोमती में स्नान करने से, कुम्भ में श्रीकेदारनाथजी के दर्शन करने से तथा बद्रिकाश्रम में रहने से तथा सूर्य-चन्द्र ग्रहण में कुरुक्षेत्र में स्नान करने से जो फल मिलता है, वह फल अपरा एकादशी के व्रत के बराबर है।
दान के समान फल:
हाथी-घोड़े के दान से तथा यज्ञ में स्वर्ण दान से जो फल मिलता है, वह फल अपरा के व्रत के फल के बराबर है।
गौ व भूमि या स्वर्ण के दान का फल भी इसके फल के बराबर होता है।
व्रत की शक्ति:
यह व्रत पापरूपी वृक्षों के काटने के लिए कुल्हाड़ी के समान है। पापरूपी अन्धकार के लिए सूर्य के समान है।
अतः मनुष्य को इस एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत सब व्रतों में श्रेष्ठ है। अपरा एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक विष्णु भगवान् का पूजन करना चाहिए। जिससे अन्त में विष्णु पद की प्राप्ति होती है।
माहात्म्य का निष्कर्ष:
हे राजन्! मैंने यह अपरा एकादशी की कथा लोकहित के लिए कही है। इसके पढ़ने व सुनने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
कथासार
अपरा का अर्थ है – अपार या अतिरिक्त, जो मनुष्य अपरा एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें भगवान श्री हरि विष्णु की अतिरिक्त भक्ति प्राप्त होती है।
इस कथा की शिक्षा:
- भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि होती है
- अपरा एकादशी अपार पुण्य देने वाली है
- यह व्रत अनेक महान तीर्थों के बराबर फल देता है
- गौ, भूमि, स्वर्ण दान के समान पुण्य मिलता है
- झूठे शास्त्र बनाना, झूठे वैद्य/ज्योतिषी बनकर लोगों को ठगना - ये घोर पाप हैं
- क्षत्रिय का युद्ध से भागना और गुरु निंदा भी घोर अपराध हैं
- लेकिन अपरा एकादशी इन सभी पापों से मुक्ति दिला सकती है
- यह पापरूपी वृक्ष के लिए कुल्हाड़ी है
जय श्री हरि!
भगवान विष्णु आरती और चालीसा
(व्रत के अंत में आरती अवश्य करें)